सम्राट चौधरी बने बिहार के नए मुख्यमंत्री, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता परिवर्तन
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सम्राट चौधरी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। वह बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्हें राज्यपाल अता हसनैन ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह बदलाव पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद हुआ है।
सम्राट चौधरी के साथ सरकार में बिजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। दोनों नेता जनता दल (यूनाइटेड) से आते हैं, जिससे यह साफ है कि राज्य में गठबंधन सरकार बनी हुई है।
सियासी घटनाक्रम के बाद बनी नई सरकार
पिछले कुछ दिनों से बिहार में राजनीतिक हलचल तेज थी। सत्ता परिवर्तन की अटकलें पहले से ही लगाई जा रही थीं। इस बीच सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। 14 अप्रैल 2026 को उन्हें बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया, जिसके बाद उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया।
इसके बाद तेजी से घटनाएं आगे बढ़ीं और अगले ही दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इस शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी, जेडीयू और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से शुभकामनाएं दी जा रही हैं। पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से उन्हें बधाई संदेश मिल रहे हैं।
शपथ से पहले मंदिर में पूजा, फिर संभाली जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले सम्राट चौधरी ने धार्मिक आस्था भी दिखाई। उन्होंने पटना स्थित पंचरूप हनुमान मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह शपथ ग्रहण समारोह के लिए रवाना हुए।
लोकभवन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नेता और समर्थक मौजूद रहे। शपथ लेने के साथ ही उन्होंने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है।
नीतीश कुमार का इस्तीफा और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने बिहार के विकास के लिए लंबे समय तक काम किया है, लेकिन अब उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग मिलेगा और वे राज्य के विकास के लिए मार्गदर्शन देते रहेंगे। उनके इस्तीफे के बाद ही नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हुआ।
विधानसभा की स्थिति की बात करें तो एनडीए के पास बहुमत से कहीं ज्यादा, कुल 202 विधायक हैं। इससे नई सरकार को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, बिहार में यह सत्ता परिवर्तन राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार राज्य के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।
