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शेयर बाजार में भारी भूचाल: इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच सेंसेक्स 1700 अंक तक लुढ़का, निवेशकों के लाखों करोड़ डूबे

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मुंबई, 8 जून 2026:
मध्य पूर्व में बढ़ते इजरायल-ईरान तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1700 अंकों तक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में भी 500 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आ गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।

मध्य पूर्व संकट ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

हाल के दिनों में इजरायल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया है। अमेरिका की संभावित भागीदारी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते खतरे ने तेल आपूर्ति को लेकर आशंकाएं पैदा कर दी हैं।

इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला, जहां ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल दर्ज किया गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर असर डालती है।

किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट?

बाजार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में दिखाई दिए।

बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं

महंगाई बढ़ने की आशंका और ब्याज दरों पर संभावित प्रभाव के चलते बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली हुई।

ऑटो और उपभोक्ता क्षेत्र

पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना से ऑटो कंपनियों और उपभोक्ता क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना।

मेटल और रियल्टी सेक्टर

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण इन सेक्टरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

तेल एवं गैस कंपनियां

ऊंचे कच्चे तेल के दामों का असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है। हालांकि तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को कुछ लाभ मिल सकता है।

डिफेंस सेक्टर बना सहारा

तनावपूर्ण माहौल के बीच रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिली। निवेशकों ने इस सेक्टर में रुचि दिखाई।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाते हुए निवेशक सोना, डॉलर और बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके कारण रुपये पर भी दबाव बढ़ा है और डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा कमजोर हुई है।

निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट

बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति में अनुमानित 8 से 11 लाख करोड़ रुपये तक की कमी दर्ज की गई। यह हाल के महीनों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई स्तरों पर पड़ सकता है।

  • महंगाई में बढ़ोतरी की संभावना
  • तेल आयात बिल में इजाफा
  • चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने का जोखिम
  • रुपये पर अतिरिक्त दबाव
  • आर्थिक विकास दर (GDP Growth) प्रभावित होने की आशंका

हालांकि भारत के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और विविधीकृत अर्थव्यवस्था को राहत देने वाले कारकों के रूप में देखा जा रहा है।

आगे बाजार का रुख कैसा रह सकता है?

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार की दिशा पूरी तरह मध्य पूर्व की घटनाओं पर निर्भर करेगी। यदि तनाव कम होता है तो बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन संघर्ष और बढ़ने की स्थिति में निवेशकों को अधिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञ निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि के निवेश दृष्टिकोण को बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।

1. शेयर बाजार में आज इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?

इजरायल-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।

2. सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?

सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 1700 अंक तक टूटा, जबकि निफ्टी 500 से अधिक अंक नीचे चला गया।

3. किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा?

बैंकिंग, ऑटो, मेटल, रियल्टी और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

4. क्या कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं?

यदि मध्य पूर्व में तनाव जारी रहता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है।

5. क्या यह निवेश का सही समय है?

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान लंबी अवधि के निवेशक गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर रख सकते हैं, लेकिन निवेश से पहले वित्तीय सलाह लेना उचित रहेगा।

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