पंजाब विधानसभा में गरमाया माहौल, सीएम भगवंत मान और सुखपाल खैरा के बीच तीखी नोकझोंक
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान शुक्रवार को माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। यह विवाद उस वक्त सामने आया जब मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष के विधायक सदन की कार्यवाही के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह घटना एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान हुई, जब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां वेतन संशोधन से जुड़े एक प्रस्ताव को पढ़ रहे थे। उसी दौरान मुख्यमंत्री ने खैरा की ओर इशारा करते हुए उनके मोबाइल उपयोग पर आपत्ति जताई।
मोबाइल इस्तेमाल को लेकर उठा विवाद
सत्र के दौरान सीएम मान ने अपनी सीट से खड़े होकर अध्यक्ष का ध्यान इस ओर दिलाया कि सुखपाल सिंह खैरा अपने मोबाइल फोन में व्यस्त हैं और सदन की कार्यवाही पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे खैरा से पूछें कि अभी जो प्रस्ताव पढ़ा जा रहा है, उसके बारे में उन्हें क्या जानकारी है।
मान ने यह भी कहा कि अगर खैरा को फोन इस्तेमाल करना ही है, तो वे सदन के बाहर जाकर इसका उपयोग करें। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन का माहौल और अधिक गर्म हो गया।
अध्यक्ष ने मामले को शांत करने की कोशिश करते हुए खैरा को सदन की मर्यादा बनाए रखने और प्रस्ताव को ध्यान से सुनने की सलाह दी। लेकिन इसके बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आया।
खैरा की तीखी प्रतिक्रिया और बढ़ता तनाव
मुख्यमंत्री के आरोपों के जवाब में भोलाथ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान का विरोध किया और अपनी बात रखते हुए नाराजगी जाहिर की। दोनों नेताओं के बीच बहस बढ़ती गई, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।
इस दौरान कई विधायक अपनी-अपनी सीटों से खड़े हो गए और माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। अध्यक्ष को बार-बार हस्तक्षेप करते हुए सदन में शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
आप विधायकों की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग
इस विवाद के दौरान आम आदमी पार्टी के अन्य विधायक भी सक्रिय हो गए और उन्होंने खैरा के व्यवहार पर सवाल उठाए। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खैरा के आचरण की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
चीमा ने आरोप लगाया कि खैरा अक्सर सदन में अशांति पैदा करने की कोशिश करते हैं और उनका यह रवैया लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, इस घटना ने पंजाब विधानसभा के सत्र को काफी हद तक प्रभावित किया और सरकार तथा विपक्ष के बीच बढ़ती खींचतान को भी उजागर किया। यह मामला न केवल सदन की कार्यवाही में बाधा बना, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी और ज्यादा गर्म कर गया। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
