दिल्ली HC के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, कोयला घोटाला मामलों से हटे दो जज
कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध पर शीर्ष अदालत ने कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई कर रहे दो विशेष जजों को उनके पद से हटाने की अनुमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन मामलों की सुनवाई के लिए नए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति होगी। दोनों मौजूदा जजों को दिल्ली हाईकोर्ट ने दूसरी जिम्मेदारियों के लिए अधिक उपयुक्त बताया था।
कोयला घोटाला मामलों से हटाए गए जज कौन हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष CBI अदालतों में कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई कर रहीं सुनेना शर्मा और धीरेज मोर को हटाने की दिल्ली हाईकोर्ट की मांग स्वीकार कर ली है।
सुनेना शर्मा को जनवरी 2026 में ही कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष जज नियुक्त किया गया था। वहीं, धीरेज मोर अप्रैल 2025 से इन मामलों की सुनवाई कर रहे थे।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को भेजे पत्र में दोनों न्यायिक अधिकारियों को उत्कृष्ट योग्यता वाला बताया। हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी सेवाओं का इस्तेमाल दूसरी जिम्मेदारियों के लिए किया जाना बेहतर होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का अनुरोध माना
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध पर विचार किया। इसके बाद शीर्ष अदालत ने दोनों जजों को कोयला घोटाला मामलों की विशेष अदालतों से हटाने की अनुमति दे दी।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले लंबे समय से अदालतों में चल रहे हैं। इन मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी विशेष अदालतों और न्यायिक अधिकारियों की व्यवस्था की थी।
अब कौन करेंगे कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई?
सुनेना शर्मा की जगह अब वीरेंद्र कुमार खारता को नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले साकेत की विशेष NDPS अदालत में जज के तौर पर काम कर रहे थे।
इसी तरह धीरेज मोर की जगह अजय गर्ग को जिम्मेदारी दी गई है। अजय गर्ग इससे पहले तीस हजारी अदालत में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे।
इस बदलाव के बाद कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई नए न्यायिक अधिकारियों के सामने आगे बढ़ेगी। इसका उद्देश्य लंबित मामलों की न्यायिक प्रक्रिया को जारी रखना है।
सुनेना शर्मा को सिर्फ छह महीने बाद क्यों हटाया गया?
सुनेना शर्मा ने जनवरी 2026 में कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे में करीब छह महीने बाद उनका स्थानांतरण एक असामान्य घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनके खिलाफ किसी तरह की शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। इसके उलट दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें और धीरेज मोर को “उत्कृष्ट योग्यता” वाला बताया है।
इसलिए इस फैसले को किसी न्यायिक प्रतिकूल कार्रवाई के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों की सेवाओं का इस्तेमाल दूसरी जिम्मेदारियों में करने की इच्छा जताई थी।
धीरेज मोर भी एक साल से ज्यादा समय बाद हटे
धीरेज मोर को अप्रैल 2025 में कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई के लिए विशेष जज बनाया गया था। वह इस जिम्मेदारी पर एक साल से अधिक समय से काम कर रहे थे।
अब दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध के बाद उन्हें भी इस विशेष अदालत की जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है। उनकी जगह अजय गर्ग को नियुक्त किया गया है।
दोनों जजों को अभी नई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट के बाद के आदेशों को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। सुनेना शर्मा और धीरेज मोर को फिलहाल कोई नई न्यायिक पोस्टिंग नहीं दी गई है।
दोनों अधिकारियों को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। हाईकोर्ट ने उनके पुराने मामलों में सुरक्षित किए गए फैसलों और आदेशों को तय समय के अनुसार सुनाने के निर्देश भी दिए हैं।
लंबित मामलों पर भी रहेगी नजर
कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब विशेष अदालतों के सामने कई मामले लंबित हैं। पिछले वर्ष उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दो विशेष अदालतों में CBI द्वारा दर्ज 29 भ्रष्टाचार के मामले लंबित थे, जबकि 27 से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका था।
इसलिए नए जजों की नियुक्ति के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लंबित मामलों की सुनवाई किस गति से आगे बढ़ती है। लंबे समय से चल रहे मामलों में लगातार न्यायिक प्रक्रिया बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती रहती है।
कोयला घोटाला मामलों में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। 2014 में शीर्ष अदालत ने 1993 से 2010 के बीच आवंटित 214 कोयला ब्लॉकों के आवंटन रद्द कर दिए थे।
इसके बाद अदालत ने संबंधित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष CBI जज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। बाद में लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए दो विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई।
पहले भी बदलते रहे हैं विशेष जज
कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई के लिए विशेष जजों में बदलाव पहले भी हुआ है। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनेना शर्मा को विशेष जज नियुक्त किया था।
इससे पहले संजय बंसल इन मामलों की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने विशेष जज के तौर पर करीब साढ़े चार साल से अधिक समय तक काम किया था और बाद में उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया गया था।
अप्रैल 2025 में अरुण भारद्वाज की जगह धीरेज मोर को नियुक्त किया गया था। अब एक बार फिर दोनों विशेष अदालतों के न्यायिक अधिकारियों में बदलाव किया गया है।
कोयला घोटाला मामला क्या है?
कोयला घोटाला मुख्य रूप से कोयला ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा में आया था। आरोपों और जांच का संबंध इस बात से रहा कि अलग-अलग कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटित करने की प्रक्रिया में नियमों और पारदर्शिता का पालन किस तरह हुआ।
CBI ने आवंटन से जुड़े विभिन्न मामलों में अलग-अलग आपराधिक जांच और मुकदमे दर्ज किए। इन मामलों में सरकारी अधिकारियों, कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर मामले में आरोप अलग हो सकते हैं और किसी आरोपी की दोषसिद्धि केवल अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही मानी जाती है।
नए जजों के सामने क्या होगी चुनौती?
नए विशेष जजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित मामलों की सुनवाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना होगी। कई मामले पुराने हैं और उनमें बड़ी संख्या में दस्तावेज तथा गवाह शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा, अलग-अलग मामलों की प्रकृति भी अलग हो सकती है। इसलिए नए न्यायिक अधिकारियों को प्रत्येक मामले की स्थिति समझकर आगे की कार्यवाही तय करनी होगी।
सुरक्षित फैसलों का भी करना होगा निपटारा
हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक, जिन मामलों में सुनेना शर्मा और धीरेज मोर ने फैसला या आदेश सुरक्षित किया है, उन्हें निर्धारित तारीख पर सुनाना होगा।
अगर किसी कारण से ऐसा संभव नहीं हो पाता है तो आदेश के मुताबिक इन्हें दो से तीन सप्ताह के भीतर सुनाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संबंधित तारीखों को पुरानी और नई अदालतों की कारण सूची तथा अदालत की वेबसाइट पर भी दर्ज किया जाना है।
क्या इस बदलाव से मामलों पर असर पड़ेगा?
जजों में बदलाव से मामलों की सुनवाई की प्रशासनिक व्यवस्था जरूर बदलेगी। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि लंबित मामलों में लगाए गए आरोप या पहले की न्यायिक कार्यवाही अपने आप प्रभावित हो जाएगी।
नए जज उपलब्ध रिकॉर्ड, दस्तावेजों और पिछली कार्यवाही के आधार पर मामलों को आगे बढ़ाएंगे। अदालत में लंबित मुकदमों का अंतिम परिणाम संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्यों है नजर?
कोयला घोटाला मामले देश के सबसे चर्चित आर्थिक और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में रहे हैं। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और विशेष अदालतों की व्यवस्था के कारण न्यायिक नियुक्तियों से जुड़े फैसले भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
ताजा घटनाक्रम में खास बात यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने खुद दोनों न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं को दूसरी जिम्मेदारियों के लिए अधिक उपयोगी बताया। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
निष्कर्ष
कोयला घोटाला मामलों से हटाए गए जज सुनेना शर्मा और धीरेज मोर की जगह अब वीरेंद्र कुमार खारता और अजय गर्ग को जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद हुआ है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों हटाए गए जजों को उत्कृष्ट योग्यता वाला बताया है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस बदलाव को किसी दंडात्मक कार्रवाई के रूप में देखना सही नहीं होगा।
अब नए न्यायिक अधिकारियों के सामने लंबे समय से लंबित कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। आने वाले समय में इन मामलों की सुनवाई की गति और अदालतों में लंबित मुकदमों की प्रगति पर नजर रहेगी।

