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NEET पेपर लीक: CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

CBI files chargesheet against 13 accused including NTA subject experts on News Critic.

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट भी शामिल हैं।
CBI का दावा है कि यह मामला अचानक हुई किसी एक घटना का नतीजा नहीं था। जांच एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश पहले से तैयार की गई थी और इसमें एक्सपर्ट्स, कोचिंग से जुड़े लोगों, बिचौलियों और कुछ अभ्यर्थियों का नेटवर्क शामिल था।

NEET पेपर लीक CBI चार्जशीट में क्या सामने आया?

CBI ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है।
इसके अलावा Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। CBI ने अपनी चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का हवाला दिया है।

तीन NTA एक्सपर्ट्स पर गंभीर आरोप

चार्जशीट के मुताबिक, जांच में NTA से जुड़े तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को कथित तौर पर पेपर लीक का मुख्य स्रोत बताया गया है।
इनमें बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री एक्सपर्ट प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवाळदार के नाम शामिल हैं। CBI का आरोप है कि इन लोगों ने प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान मिली आधिकारिक पहुंच का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया।

कैसे लीक हुआ NEET का पेपर?

CBI की जांच के मुताबिक, पेपर लीक करने का तरीका डिजिटल और ऑफलाइन दोनों तरह का था। आरोप है कि कुछ विशेषज्ञों ने प्रश्नों को याद किया, कुछ सवाल कागज की पर्चियों पर लिखे और संबंधित NCERT किताबों के अध्याय और पैराग्राफ भी चिन्हित किए।
इसके बाद ये जानकारी बिचौलियों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाई गई। जांच एजेंसी का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल डिजिटल रिकॉर्ड से बचने के लिए भी किया गया था।

होटल में सवाल लिखने का भी आरोप

CBI चार्जशीट में एक खास तरीका भी सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आसान सवालों को कुछ एक्सपर्ट याद कर लेते थे और बाद में होटल लौटकर उन्हें कागज या किताब में लिख लेते थे।
चार्जशीट के मुताबिक, NTA केंद्र में विशेषज्ञों के प्रवेश और बाहर निकलने के दौरान नियमित तलाशी या फ्रिस्किंग की व्यवस्था नहीं थी। CBI ने इसी कमी को पेपर की गोपनीयता के लिए गंभीर सुरक्षा खामी के तौर पर रेखांकित किया है।

WhatsApp और Telegram से आगे पहुंचा पेपर

जांच में डिजिटल माध्यमों की भूमिका भी सामने आई है। CBI के अनुसार, लीक हुए प्रश्न PDF और तस्वीरों के रूप में WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए आगे भेजे गए।
जांच एजेंसी ने आरोपियों के मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की। इन उपकरणों से मिले चैट और फाइलों को कथित तौर पर पेपर के प्रसार की कड़ी जोड़ने में महत्वपूर्ण माना गया है।

बिचौलियों के जरिए बनी पूरी चेन

CBI के अनुसार, पेपर सीधे सभी अभ्यर्थियों तक नहीं पहुंचा। इसके लिए कई स्तरों पर बिचौलियों और दूसरे लोगों का इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि एक आरोपी से दूसरे आरोपी तक पेपर पहुंचता रहा। इसके बदले पैसों का लेन-देन किया गया और कुछ मामलों में भुगतान की गारंटी के लिए दस्तावेज भी लिए गए।

लाखों रुपये में हुआ पेपर का सौदा?

CBI चार्जशीट में पेपर लीक के बदले बड़ी रकम के लेन-देन का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी के मुताबिक, एक कथित सौदे में पेपर हासिल करने के लिए 25 लाख रुपये की रकम की बात सामने आई।
एक अन्य मामले में एक अभ्यर्थी और उसके पिता को कथित तौर पर 4 लाख रुपये में पेपर उपलब्ध कराने की पेशकश किए जाने का भी जिक्र है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और इनका अंतिम निर्धारण अदालत में होना बाकी है।

खाली चेक और शैक्षणिक प्रमाणपत्र बने गारंटी

जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। CBI के मुताबिक, नेटवर्क में कथित लेन-देन की गारंटी के लिए कुछ लोगों से मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक लिए गए।
जांच एजेंसी का दावा है कि ऐसे दस्तावेजों को भुगतान की सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल किया गया। तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज बरामद किए जाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।

CBI ने 13 आरोपियों को किया गिरफ्तार

CBI ने इस मामले में कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन NTA सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के अलावा कोचिंग से जुड़े लोग, बिचौलिए और कथित लाभार्थी अभ्यर्थी शामिल हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को हुई थी। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में जांच आगे बढ़ाई गई और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पांच राज्यों में हुई तलाशी

CBI ने मामले की जांच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य स्थानों पर कई जगह तलाशी ली।
एजेंसी के मुताबिक, कुल 92 स्थानों पर तलाशी की गई। इस दौरान मोबाइल फोन, संचार उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई। इन सामग्रियों की फोरेंसिक जांच भी की गई।

CBI ने 20 हजार पन्नों से ज्यादा दस्तावेज जुटाए

जांच एजेंसी की चार्जशीट से जुड़े दस्तावेजों और अनुलग्नकों की संख्या काफी बड़ी है। CBI के मुताबिक, चार्जशीट से संबंधित सामग्री करीब 20 हजार पन्नों तक पहुंचती है।
एजेंसी ने डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय और अकादमिक विशेषज्ञों की राय को भी जांच का हिस्सा बनाया है। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला तैयार किया गया है।

जांच में NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

NEET पेपर लीक की जांच में केवल आरोपियों की भूमिका ही सामने नहीं आई है। CBI ने परीक्षा प्रश्नपत्र की गोपनीय प्रक्रिया से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
चार्जशीट के अनुसार, विशेषज्ञों की एंट्री और एग्जिट के दौरान पर्याप्त तलाशी नहीं होने से गोपनीय सामग्री बाहर ले जाने का जोखिम बना रहा। यही वजह है कि जांच में सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

गोपनीय प्रश्नपत्र तक पहुंच बनी सबसे बड़ी कड़ी

CBI के मुताबिक, कथित साजिश में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी NTA की प्रश्नपत्र तैयार करने वाली प्रक्रिया तक पहुंच थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि तीनों विशेषज्ञों ने इसी आधिकारिक पहुंच का कथित दुरुपयोग किया।
इसके बाद सवाल अलग-अलग माध्यमों से बाहर भेजे गए। इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों और कोचिंग से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच में सामने आई है।

अदालत में अभी साबित होना बाकी हैं आरोप

CBI ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों और पेश किए गए साक्ष्यों पर अदालत में आगे सुनवाई होगी।
राउज एवेन्यू कोर्ट अब मामले में पेश की गई सामग्री पर विचार करेगा। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

छात्रों और अभिभावकों के लिए क्यों गंभीर है मामला?

NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। लाखों छात्र डॉक्टर बनने के लक्ष्य के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं।
ऐसे में प्रश्नपत्र की गोपनीयता से किसी भी तरह का समझौता छात्रों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर सवाल खड़ा करता है। पेपर लीक की जांच में सामने आई कथित अंदरूनी भूमिका ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

परीक्षा व्यवस्था में भरोसा सबसे जरूरी

प्रतियोगी परीक्षा में छात्रों का भरोसा उसकी सबसे बड़ी ताकत होता है। अगर किसी उम्मीदवार को परीक्षा से पहले प्रश्न मिल जाएं, तो मेहनत करने वाले दूसरे छात्रों के साथ सीधा अन्याय होता है।
इसलिए NEET पेपर लीक मामले में जांच के साथ-साथ भविष्य की परीक्षाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। डिजिटल निगरानी, प्रवेश जांच और गोपनीय सामग्री की सुरक्षित आवाजाही पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।

निष्कर्ष

NEET पेपर लीक CBI चार्जशीट ने मामले की जांच को एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंचा दिया है। CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें तीन NTA सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित नेटवर्क में प्रश्नपत्र तक अंदरूनी पहुंच, पर्चियों और याद किए गए सवालों के जरिए जानकारी बाहर निकालना, WhatsApp और Telegram पर प्रसार, बिचौलियों की भूमिका और पैसों के लेन-देन जैसी कड़ियां सामने आई हैं।
अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल CBI की चार्जशीट ने NEET-UG 2026 पेपर लीक की कथित साजिश, गिरफ्तारियों और प्रश्नपत्र के प्रसार के तरीके को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं।

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