मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में गरमाई सियासत, संसद के बाहर NDA और विपक्ष आमने-सामने
संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। मंगलवार को संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन किया। स्थिति उस समय और चर्चा में आ गई, जब संसद के मुख्य प्रवेश द्वार मकर द्वार के पास NDA और विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की झड़प न हो, इसके लिए सुरक्षाकर्मियों ने बीच में घेरा बना रखा था।
प्रदर्शन के दौरान दोनों गठबंधनों के सांसद अलग-अलग मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते नजर आए। NDA सांसद झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठा रहे थे। वहीं, विपक्षी सांसद अयोध्या में राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित गड़बड़ी और दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
NDA सांसदों ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
NDA सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर छात्रों से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया। सांसद अपनी साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद संसद पुस्तकालय से मकर द्वार की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी को लेकर कई नारे लगाए।
सत्ता पक्ष के सांसदों की ओर से ‘राहुल गांधी जवाब दो’ और ‘राहुल गांधी भागो मत’ जैसे नारे लगाए गए। बीजेपी नेताओं का कहना था कि विपक्ष को सदन में चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष सुनना चाहिए और छात्रों से जुड़े मामलों पर अपनी बात रखनी चाहिए।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विभिन्न मुद्दों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर सदन की कार्यवाही से दूर रहने का आरोप लगाया। त्रिवेदी ने कहा कि विपक्ष को चर्चा से बचने के बजाय संसद में अपनी बात रखनी चाहिए और झारखंड जाकर छात्रों की स्थिति को समझना चाहिए।
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि झारखंड में छात्रों के मुद्दे पर राहुल गांधी चुप क्यों हैं। उन्होंने झारखंड में परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग करते हुए कहा कि इस विषय पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि छात्रों के आंदोलन से जुड़ी जानकारी देने के लिए गृह मंत्री तैयार हैं। उन्होंने संसद में लगातार हंगामे को उचित नहीं बताया। अठावले ने कहा कि झारखंड और दिल्ली, दोनों जगह हुए लाठीचार्ज के मामलों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।
खरगे बोले- विपक्ष का रुख नहीं बदला
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अपने मुद्दे या मांग में कोई बदलाव नहीं किया है। उनके मुताबिक, शुरुआत से विपक्ष की मांग रही है कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में सदन में सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब दिया जाए।
खरगे ने कहा कि इस घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से उस व्यक्ति या अधिकारी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिसने लाठीचार्ज का आदेश दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा के बजाय केवल अपना पक्ष रखकर आगे बढ़ना चाहती है।
झारखंड के मुद्दे को लेकर खरगे ने कहा कि संसद में कई विषय होते हैं और हर मुद्दे पर अलग-अलग चर्चा की जा सकती है। उनका कहना था कि छात्रों पर लाठीचार्ज और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे दूसरे मुद्दों को एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दोनों मुद्दों पर चर्चा की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा, परीक्षाओं और राम मंदिर से जुड़े सवालों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, इन विषयों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। झारखंड में छात्रों से जुड़े विवाद पर अखिलेश यादव ने बातचीत को समाधान का रास्ता बताया और कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री इस मामले में लगातार बातचीत कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मानसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है। दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों को लेकर सदन के अंदर और संसद परिसर में आक्रामक नजर आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद की कार्यवाही के दौरान भी हंगामा और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

