संसद का मानसून सत्र समाप्त, 12 विधेयक पारित; रिजिजू ने बताया कितना हुआ कामकाज
संसद मानसून सत्र गुरुवार को हंगामे और लगातार व्यवधान के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के समापन के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से पूरे सत्र के कामकाज का ब्यौरा दिया।
रिजिजू के मुताबिक, मानसून सत्र के दौरान संसद ने विधायी कामकाज के लिहाज से 12 विधेयक पारित किए, लेकिन सदनों में बहस और चर्चा का स्तर सरकार की अपेक्षा के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही।
संसद मानसून सत्र में कितना हुआ कामकाज?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार सत्र को दो अलग-अलग नजरियों से देखती है। एक तरफ विधायी कामकाज है, जहां 12 विधेयकों का पारित होना सरकार के लिए उपलब्धि है। दूसरी तरफ सदन में चर्चा और बहस का स्तर है, जिसे लेकर सरकार संतुष्ट नहीं है।
रिजिजू के अनुसार, लोकसभा में कुल 12 विधेयक पारित हुए। इनमें से केवल एक विधेयक पर सदन में पूरी तरह चर्चा हो सकी। वहीं राज्यसभा में विधेयकों पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि लगातार हंगामे और व्यवधान के कारण संसद के कामकाज का काफी समय प्रभावित हुआ। सरकार का आरोप है कि विपक्ष ने कई मौकों पर चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित की।
लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत रही
रिजिजू के अनुसार, इस मानसून सत्र में लोकसभा की उत्पादकता केवल 19 प्रतिशत रही। यानी सदन अपने निर्धारित समय के मुकाबले बहुत कम समय तक प्रभावी तरीके से काम कर सका।
राज्यसभा में स्थिति लोकसभा की तुलना में बेहतर रही। यहां उत्पादकता 39 प्रतिशत बताई गई। हालांकि, यह आंकड़ा भी सदन के निर्धारित समय के मुकाबले काफी कम है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 39 प्रतिशत उत्पादकता राज्यसभा की है, जबकि लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत रही। इसलिए 39 प्रतिशत को पूरे संसद की संयुक्त उत्पादकता मानना सही नहीं होगा।
12 विधेयक पारित, सिर्फ एक पर हुई पूरी चर्चा
किरण रिजिजू ने बताया कि संसद के मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए। लेकिन इनमें से केवल एक विधेयक पर दोनों सदनों में चर्चा हुई।
सरकार के अनुसार, लोकसभा में जिन 12 विधेयकों को पारित किया गया, उनमें से 11 विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा के पारित हुए। केवल एक विधेयक पर विस्तृत चर्चा हो सकी।
इस स्थिति को लेकर सरकार ने विपक्ष पर निशाना साधा। रिजिजू ने कहा कि अपने संसदीय अनुभव में उन्होंने पहली बार विपक्ष को चर्चा से बचते हुए देखा, जबकि सरकार बहस के लिए तैयार थी।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा
रिजिजू के अनुसार, लोकसभा में जिस एक विधेयक पर चर्चा हुई, वह लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 था। यह कानून प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य अनुचित तरीकों पर रोक लगाने से जुड़ा है।
सरकार ने इस संशोधन के जरिए परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को और सख्त करने की बात कही है। रिजिजू ने बताया कि कुछ अपराधों में न्यूनतम पांच साल से अधिकतम 10 साल तक की सजा और ज्यादा जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
पेपर लीक और परीक्षा में नकल से जुड़े मामलों को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी रही है। ऐसे में सरकार ने इस कानून को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्ती बढ़ाने से जोड़कर पेश किया।
रिजिजू ने विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिजिजू ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस, पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने बार-बार हंगामा किया।
रिजिजू ने कांग्रेस को सदन में व्यवधान के लिए जिम्मेदार बताया। उनका कहना था कि विपक्ष ने चर्चा के अवसरों का इस्तेमाल नहीं किया और लगातार विरोध के कारण सदन की उत्पादकता प्रभावित हुई।
सरकार का यह पक्ष है कि विरोध और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सदन को लगातार बाधित करना संसदीय कामकाज के लिए उचित नहीं है।
विपक्ष ने सरकार को बताया जिम्मेदार
वहीं विपक्ष का रुख सरकार से अलग रहा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष को पर्याप्त चर्चा का अवसर नहीं दिया।
विपक्ष की ओर से NEET विवाद, छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की गई थी। विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी इन मामलों पर जवाब चाहता था।
इस पूरे विवाद में सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। नतीजा यह रहा कि संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की वजह से प्रभावित रहा।
NEET मुद्दे पर भी नहीं बनी सहमति
सत्र के दौरान NEET से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्षी सांसद परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहे थे।
सरकार की ओर से बाद के दिनों में NEET से जुड़े विषय पर चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की पेशकश किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्ष प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब चाहता है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा।
विधायी कामकाज और बहस के बीच बड़ा अंतर
संसद के मानसून सत्र की सबसे अहम बात यह रही कि विधेयक पारित होने के बावजूद सदन में बहस का समय काफी सीमित रहा। सरकार ने इसे विधायी कामकाज की सफलता बताया, जबकि विपक्ष ने बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयक पारित किए जाने पर सवाल उठाए।
रिजिजू ने भी माना कि विधायी दृष्टि से 12 विधेयकों का पारित होना महत्वपूर्ण है, लेकिन चर्चा के स्तर से सरकार संतुष्ट नहीं है।
संसदीय लोकतंत्र में विधेयकों पर चर्चा का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इससे सांसद प्रस्तावित कानून के अलग-अलग पहलुओं पर सवाल उठा सकते हैं और सुझाव दे सकते हैं।
राज्यसभा में 39 प्रतिशत उत्पादकता
राज्यसभा में मानसून सत्र के दौरान उत्पादकता 39 प्रतिशत रही। रिजिजू के अनुसार, राज्यसभा में भी विपक्षी सांसदों की ओर से हंगामा हुआ और कई बार सांसद सदन से बाहर चले गए।
इसके बावजूद सरकार का कहना है कि सत्तापक्ष के अलावा कुछ विपक्षी सांसदों ने चर्चा में हिस्सा लिया। रिजिजू ने राज्यसभा में कामकाज की स्थिति को लोकसभा से बेहतर बताया।
हालांकि, 39 प्रतिशत उत्पादकता का अर्थ यह भी है कि राज्यसभा अपने निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा प्रभावी कामकाज में इस्तेमाल नहीं कर सकी।
सत्र के दौरान हंगामा क्यों रहा?
संसद का मानसून सत्र कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार गर्म रहा। शुरुआत से ही विपक्ष ने NEET और अन्य मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
इसके बाद छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी संसद में प्रमुख बन गया। विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मौजूदगी और जवाब की मांग की गई।
लगातार विरोध के कारण कई बार दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। अंतिम दिन भी संसद में सामान्य कामकाज की तस्वीर नहीं दिखी।
सरकार ने कहा- विधायी दृष्टि से सत्र सफल
रिजिजू ने संसद मानसून सत्र को पूरी तरह विफल नहीं माना। उन्होंने कहा कि अगर विधायी कामकाज के नजरिये से देखा जाए तो 12 विधेयकों का पारित होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बहस और चर्चा के लिहाज से सरकार संतुष्ट नहीं है। उनका कहना था कि विपक्ष के विरोध के कारण नए सांसदों को भी अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
सरकार के इस आकलन से साफ है कि उसके लिए विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण रहा, लेकिन सदन की कम उत्पादकता चिंता का विषय बनी रही।
संसद के कामकाज पर उठे सवाल
कम उत्पादकता ने एक बार फिर संसद के प्रभावी कामकाज को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जब सदन में निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा हंगामे में चला जाता है तो प्रश्नकाल, बहस, विधेयकों की जांच और सरकार की जवाबदेही जैसी संसदीय प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं।
दूसरी ओर विपक्ष का तर्क रहता है कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय और उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करे।
इस तरह संसद का कामकाज केवल सत्ता पक्ष या विपक्ष में से किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है। दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहमति से ही सदन प्रभावी ढंग से चल सकता है।
सत्र समाप्त होने के बाद अब आगे क्या?
मानसून सत्र के समाप्त होने के बाद अब संसद के अगले सत्र पर नजर रहेगी। मौजूदा सत्र में जिन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव हुआ, वे आगे भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रह सकते हैं।
NEET, परीक्षा व्यवस्था, छात्रों के प्रदर्शन और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर विपक्ष सरकार से जवाब मांगता रह सकता है। वहीं सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर देगी।
अगले सत्र में दोनों पक्षों के बीच टकराव कम होता है या फिर यही स्थिति जारी रहती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
संसद मानसून सत्र गुरुवार को समाप्त हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार, सत्र के दौरान 12 विधेयक पारित हुए, लेकिन केवल एक विधेयक पर दोनों सदनों में चर्चा हो सकी। लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही।
रिजिजू ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस, पर लगातार हंगामा कर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने और जवाबदेही से दूर रहने का आरोप लगाया।
कुल मिलाकर, संसद मानसून सत्र विधायी कामकाज के लिहाज से कुछ महत्वपूर्ण विधेयक पारित करने में सफल रहा, लेकिन कम उत्पादकता और सीमित बहस इसकी सबसे बड़ी चुनौती रही। अब नजर इस बात पर होगी कि अगले सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कम होता है या संसद में हंगामे का दौर जारी रहता है।

