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ट्विशा शर्मा केस: प्रेगनेंसी के बाद टूटा रिश्ता, पुराने रिश्तों के तानों से बढ़ा विवाद; चार्जशीट में मौत तक की पूरी कहानी

न्यूज़ क्रिटिक (News Critic) का ग्राफ़िक जिसमें त्विशा शर्मा केस में प्रेगनेंसी के बाद टूटे रिश्ते, पुराने तानों और ससुराल छोड़ने के विवाद को दर्शाया गया है।

भोपाल की मॉडल-एक्टर ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई की 636 पन्नों की चार्जशीट के बाद घटनाक्रम की कई परतें सामने आई हैं। चार्जशीट में प्रेगनेंसी, पुराने रिश्तों को लेकर कथित टिप्पणियों, पैसों और पति-पत्नी के बीच बढ़ते विवाद का जिक्र है।
जांच एजेंसी ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया है। हालांकि ट्विशा के परिवार ने चार्जशीट पर असंतोष जताते हुए उनकी मौत को आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या बताया है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।

636 पन्नों की चार्जशीट में क्या सामने आया?

ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनके ससुराल में हुई थी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और सीबीआई ने पति समर्थ सिंह तथा उनकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ 636 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।

चार्जशीट में दोनों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत दहेज प्रताड़ना, आत्महत्या के लिए उकसाने और साझा मंशा से अपराध से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। दोनों आरोपियों को मामले में आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई की जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा था। विवाद के पीछे कई अलग-अलग मुद्दों का जिक्र चार्जशीट और उससे जुड़ी रिपोर्टों में किया गया है।

शादी के बाद पुराने रिश्तों को लेकर बढ़ा विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक ट्विशा ने शादी के बाद समर्थ को अपने पुराने रिश्तों के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद आरोप है कि उनके अतीत को लेकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा।

चार्जशीट में कथित तौर पर पुराने रिश्तों और ट्विशा के चरित्र को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि सास और पति की ओर से भी इस तरह की बातें कही जाती थीं।

इस तरह के विवाद धीरे-धीरे पति-पत्नी के रिश्ते में बड़ा तनाव पैदा करने लगे। परिवार के अनुसार, ट्विशा को लगने लगा था कि ससुराल में उनके अतीत को बार-बार मुद्दा बनाया जा रहा है।

पिता की तबीयत बिगड़ी तो नोएडा चली गई थीं ट्विशा

चार्जशीट के मुताबिक मार्च 2026 में ट्विशा के पिता को हार्ट अटैक आया था। इसके बाद वह अपने मायके नोएडा चली गई थीं।

24 मार्च को वह दोबारा भोपाल लौटीं। जांच के मुताबिक इस दौरान भी उनके और ससुराल वालों के बीच तनाव बना हुआ था।

रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि ट्विशा की सास अक्सर उनसे पीरियड्स को लेकर सवाल करती थीं। चार्जशीट में इस बातचीत का भी जिक्र किया गया है।

प्रेगनेंसी ने बढ़ाया पति-पत्नी के बीच तनाव

मामले में सबसे अहम मोड़ अप्रैल 2026 में आया। चार्जशीट के अनुसार 16 अप्रैल को ट्विशा को अपनी प्रेगनेंसी के बारे में पता चला और 17 अप्रैल को अस्पताल में इसकी पुष्टि हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक ट्विशा बच्चे को लेकर असमंजस में थीं और वह फैसला लेने के लिए समय चाहती थीं। इसी मुद्दे पर पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया।

चार्जशीट में आरोप है कि 17 अप्रैल को विवाद इतना बढ़ गया कि ट्विशा को घर से निकाल दिया गया। इसके बाद वह राजस्थान के नसीराबाद पहुंचीं और 19 अप्रैल को अपने माता-पिता को घटना की जानकारी दी।

प्रेगनेंसी को लेकर सवाल और अबॉर्शन का विवाद

सीबीआई की जांच के मुताबिक ट्विशा और समर्थ के बीच बच्चे को लेकर मतभेद बने हुए थे। चार्जशीट में आरोप है कि समर्थ उनसे बच्चे के पिता को लेकर भी सवाल करता था।

30 अप्रैल को दोनों भोपाल के एक अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार वहां गर्भावस्था को लेकर काउंसलिंग हुई और डॉक्टर ने कुछ समय बाद दोबारा निर्णय लेने की बात कही।

6 मई को दोनों फिर अस्पताल गए। चार्जशीट के अनुसार समर्थ ने डॉक्टर से कहा कि बच्चा नहीं रखना है और यह दोनों का फैसला है। इसी दौरान ट्विशा को नौकरी का ऑफर भी मिला, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था।

मां को मैसेज कर कहा- मुझे लेकर चले जाओ

चार्जशीट में 6 मई की रात का घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ट्विशा ने अपनी मां को संदेश भेजकर उन्हें अपने साथ ले जाने के लिए कहा था।

इसके बाद 7 मई को वह फिर अस्पताल गईं। रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर ने उस समय गर्भावस्था की स्थिति को देखते हुए प्रक्रिया को लेकर जानकारी दी। बाद में 8 मई तक गर्भपात होने की बात चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आई है।

इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। आरोप है कि ट्विशा ने अपनी मां से परिवार में उनके बारे में कही जा रही बातों को लेकर चिंता जताई थी।

पैसों को लेकर भी सामने आया विवाद

ट्विशा शर्मा केस में करीब 20 लाख रुपये के शेयर और डीमैट अकाउंट का मुद्दा भी सामने आया है। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक इस रकम को लेकर भी तनाव था।

रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में ट्विशा को भोपाल की एक बैंक शाखा ले जाया गया था। आरोप है कि उनसे पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि यह उनके पिता का पैसा है।

यानी मामले में घरेलू विवाद के साथ आर्थिक विवाद का एंगल भी जांच का हिस्सा रहा।

नौकरी जाने के बाद भी कथित तौर पर दिए गए ताने

चार्जशीट में ट्विशा की नौकरी को लेकर भी कथित टिप्पणियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार नौकरी छोड़ने के बाद उनके पति की ओर से उनकी अंग्रेजी को लेकर भी आपत्तिजनक बातें कही जाती थीं।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परिवार के अनुसार नौकरी और आर्थिक स्वतंत्रता को लेकर ट्विशा पहले से तनाव में थीं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

ससुराल छोड़कर नोएडा जाने की कोशिश

अप्रैल के अंत में ट्विशा के माता-पिता भोपाल पहुंचे थे। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने ससुराल पक्ष से पुराने रिश्तों को लेकर की जा रही कथित टिप्पणियों पर सवाल उठाए।

इसी दौरान समर्थ के बेंगलुरु जाने की बात भी सामने आई। ट्विशा ने उनके साथ जाने से इनकार किया और अपनी प्रेगनेंसी का हवाला दिया।

इसके बाद ट्विशा भोपाल से नोएडा चली गईं। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने दोस्तों से नौकरी की जरूरत के बारे में भी बात की थी।

12 मई को क्या हुआ?

12 मई 2026 को ट्विशा और समर्थ के बीच फिर विवाद हुआ। चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक दोनों के बीच कहासुनी और गाली-गलौज हुई थी।

इस दौरान ट्विशा ने अपनी मां को फोन किया। रिपोर्ट के अनुसार वह रो रही थीं। उनकी मां ने इसके बाद गिरिबाला सिंह से संपर्क किया।

चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी के अनुसार घटना के बाद समर्थ द्वारा ट्विशा के शव को सीढ़ियों से नीचे लाने की फुटेज जांच का हिस्सा है।

परिवार ने चार्जशीट पर जताई असहमति

सीबीआई ने पति और सास के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना से जुड़े आरोप लगाए हैं, लेकिन ट्विशा के परिवार ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

परिवार का कहना है कि ट्विशा की मौत को केवल आत्महत्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने हत्या का आरोप लगाया है और चार्जशीट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

यही वजह है कि मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। चार्जशीट जांच एजेंसी का पक्ष है और अदालत में आरोप साबित होना बाकी है।

कोर्ट में भी सामने आए गंभीर तथ्य

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाही से जुड़े रिकॉर्ड में भी मामले की गंभीरता सामने आई है। अदालत के सामने पेश केस डायरी के आधार पर ट्विशा की मौत को एंटीमॉर्टम हैंगिंग बताया गया और शरीर पर अन्य चोटों का भी उल्लेख हुआ।

अदालत ने यह भी कहा कि केस डायरी में ट्विशा को कथित रूप से प्रताड़ित करने और प्रेगनेंसी खत्म करने के लिए दबाव से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज थे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।

अब आगे क्या होगा?

सीबीआई की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई होगी।

इस केस में कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं, जिनमें प्रेगनेंसी को लेकर विवाद, कथित मानसिक प्रताड़ना, पुराने रिश्तों को लेकर टिप्पणियां, पैसों का विवाद और मौत से पहले के घटनाक्रम शामिल हैं।

इन सभी पहलुओं की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

निष्कर्ष

ट्विशा शर्मा केस की सीबीआई चार्जशीट ने शादी के कुछ महीनों के भीतर रिश्ते में बढ़े तनाव की एक लंबी कड़ी सामने रखी है। प्रेगनेंसी से जुड़ा विवाद, पुराने रिश्तों को लेकर कथित ताने, आर्थिक दबाव, नौकरी को लेकर टिप्पणियां और ससुराल छोड़कर मायके जाने की कोशिश जैसे कई घटनाक्रम जांच का हिस्सा बने हैं।

मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह आरोपी हैं और दोनों पर गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। वहीं ट्विशा का परिवार चार्जशीट से संतुष्ट नहीं है और उनकी मौत को हत्या बता रहा है। ऐसे में अब इस मामले में अदालत की सुनवाई और साक्ष्यों की जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी।

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