शरीयत से टकराने वाला कानून मंजूर नहीं: भोपाल में मुफ्ती गुफरान ने UCC समर्थकों को चीफ गेस्ट बनाने पर उठाए सवाल
भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बहस तेज हो गई है। मुफ्ती गुफरान ने UCC पर अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शरीयत से टकराने वाला कोई कानून मंजूर नहीं किया जा सकता।
मुफ्ती गुफरान ने UCC समर्थकों को कार्यक्रमों में चीफ गेस्ट बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब मध्य प्रदेश में UCC विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है।
मध्य प्रदेश में UCC को लेकर क्या हुआ?
मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 विधानसभा में पेश किया था। सरकार का कहना है कि इसका मकसद सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था बनाना है।
विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। सरकार इसे समान अधिकार और सामाजिक समानता से जोड़कर देख रही है।
विधानसभा में चर्चा के बाद UCC विधेयक पारित हो गया। इसके बाद इस कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई।
मुफ्ती गुफरान ने UCC पर क्या कहा?
मुफ्ती गुफरान ने UCC को लेकर स्पष्ट आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शरीयत से टकराने वाला कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उनके बयान में मुस्लिम व्यक्तिगत कानून का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं से जुड़े मामलों में समुदाय की भावनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
मुफ्ती गुफरान का यह बयान UCC को लेकर चल रही बहस में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी मध्य प्रदेश में मुस्लिम धार्मिक नेताओं की ओर से UCC को लेकर आपत्ति सामने आती रही है।
UCC समर्थकों को चीफ गेस्ट बनाने पर सवाल
मुफ्ती गुफरान ने UCC के समर्थकों को कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को लेकर समुदाय के सामने उठने वाले सवालों की ओर ध्यान दिलाया।
उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति UCC का खुलकर समर्थन करता है, तो उसे धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बनाने से क्या संदेश जाता है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने आयोजकों और समाज के लोगों से सवाल किया।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि UCC इस समय मध्य प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में UCC समर्थक की मौजूदगी भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का कारण बन सकती है।
भोपाल में पहले भी सामने आ चुकी है UCC पर आपत्ति
UCC को लेकर भोपाल में पहले भी धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है। विधानसभा सत्र के दौरान भोपाल शहर काजी ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी।
रिपोर्टों के अनुसार, शहर काजी ने मुस्लिम समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखने की मांग की थी। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और विधायक आतिफ अकील भी मौजूद थे।
इस मुलाकात से साफ हुआ कि UCC को लेकर मुस्लिम समुदाय के कुछ धार्मिक प्रतिनिधियों में चिंता है। अब मुफ्ती गुफरान के बयान ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
UCC में किन मुद्दों को शामिल किया गया है?
समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करना है। मध्य प्रदेश सरकार ने इसके तहत कई महत्वपूर्ण विषयों को कानून के दायरे में रखा है।
इनमें प्रमुख रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध शामिल हैं। इसके अलावा बहुविवाह और विवाह के पंजीकरण से जुड़े नियम भी चर्चा में रहे हैं।
UCC के प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:
- विवाह का पंजीकरण जरूरी करने का प्रावधान।
- एक से अधिक विवाह पर रोक।
- तलाक के लिए समान कानूनी प्रक्रिया।
- उत्तराधिकार में समान अधिकार।
- लिव-इन संबंधों का पंजीकरण।
- कुछ धार्मिक प्रथाओं पर कानूनी प्रावधान।
सरकार का कहना है कि इन नियमों से सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार मिलेंगे। वहीं, विरोध करने वाले पक्षों का मानना है कि कुछ नियम धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित कर सकते हैं।
सरकार UCC को क्यों जरूरी बता रही है?
मध्य प्रदेश सरकार UCC को समानता से जोड़कर देख रही है। सरकार का तर्क है कि अलग-अलग समुदायों के लिए अलग नियम होने के बजाय व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून होना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना है। सरकार का कहना है कि इससे किसी धर्म को निशाना बनाना उद्देश्य नहीं है।
सरकार के अनुसार, महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना भी UCC का एक अहम उद्देश्य है। विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े मामलों में समान नियम लागू होने से कानूनी प्रक्रिया आसान हो सकती है।
मुस्लिम समुदाय की मुख्य चिंता क्या है?
UCC पर मुस्लिम समुदाय की मुख्य चिंता व्यक्तिगत कानूनों को लेकर है। मुस्लिम धर्म में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में शरीयत की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
ऐसे में जब कोई नया कानून इन विषयों पर समान नियम लागू करता है, तो धार्मिक संगठनों की ओर से सवाल उठना स्वाभाविक है। मुफ्ती गुफरान का बयान भी इसी चिंता को सामने रखता है।
उनका कहना है कि धार्मिक मान्यताओं से जुड़े मामलों में समुदाय की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए।
UCC को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी
मध्य प्रदेश विधानसभा में UCC विधेयक पेश होने के दौरान विपक्ष ने भी कई सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने विधेयक की प्रक्रिया और इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी।
सत्ता पक्ष UCC को सामाजिक बदलाव और समान अधिकारों की दिशा में कदम बता रहा है। वहीं, विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठन इसके अलग-अलग प्रावधानों को लेकर सवाल कर रहे हैं।
इस तरह UCC पर बहस केवल धार्मिक मुद्दे तक सीमित नहीं है। इसमें राजनीति, कानून, व्यक्तिगत अधिकार और सामाजिक परंपराएं भी शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
UCC विधेयक के विधानसभा से पारित होने के बाद अब इसकी आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। कानून लागू होने के बाद इसके नियमों को लेकर भी कई सवालों के जवाब सामने आएंगे।
सबसे ज्यादा ध्यान विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों पर रहेगा। इन विषयों पर अदालतों में भी कानूनी सवाल उठ सकते हैं।
इसके साथ ही सरकार और धार्मिक संगठनों के बीच संवाद की भूमिका भी अहम होगी। यदि कानून को लेकर कोई विवाद सामने आता है, तो उसका समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही होगा।
मुफ्ती गुफरान के बयान से फिर गरमाया मुद्दा
मुफ्ती गुफरान के बयान ने भोपाल में UCC की चर्चा को फिर तेज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि शरीयत से टकराने वाला कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही उन्होंने UCC समर्थकों को चीफ गेस्ट बनाने पर सवाल उठाकर एक अलग बहस शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि इस बयान पर राजनीतिक दलों और दूसरे धार्मिक संगठनों की क्या प्रतिक्रिया आती है।
फिलहाल मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की प्रक्रिया और इसके प्रावधानों पर चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और ज्यादा चर्चा में रह सकता है।
निष्कर्ष
भोपाल में मुफ्ती गुफरान ने UCC को लेकर अपनी स्पष्ट असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि शरीयत से टकराने वाला कोई कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने UCC समर्थकों को चीफ गेस्ट बनाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार UCC को सभी नागरिकों के लिए समान कानून और अधिकारों की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।
अब इस मुद्दे पर आगे की बहस कानून के प्रावधानों और उनके असर पर केंद्रित रहेगी। साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता और समान नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन भी चर्चा का बड़ा विषय बना रहेगा।

