मराठी टेस्ट के विरोध में ऑटो-टैक्सी चालकों की 3 दिन की हड़ताल: बोले- ट्रेनिंग से बाहर के सवाल पूछे जा रहे
मुंबई में मराठी टेस्ट ऑटो टैक्सी हड़ताल का मामला अब तूल पकड़ रहा है। ऑटो और टैक्सी चालकों के एक वर्ग ने भाषा परीक्षा के विरोध में तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है।
ड्राइवरों का कहना है कि वे मराठी सीखने के लिए तैयार हैं। लेकिन टेस्ट में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं, जो उन्हें दी गई ट्रेनिंग में शामिल नहीं थे।
मराठी टेस्ट ऑटो टैक्सी हड़ताल से मुंबई में असर
मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालकों के एक वर्ग ने मराठी भाषा की परीक्षा के विरोध में हड़ताल शुरू की है। यह हड़ताल 24 अगस्त से शुरू हुई और तीन दिन तक चलने की बात कही गई है।
हड़ताल का असर शहर के कई इलाकों में दिखाई दिया। यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिलने में परेशानी हुई। कई लोगों को बस और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा।
ड्राइवरों का विरोध मराठी भाषा सीखने की शर्त से ज्यादा परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर है। उनका आरोप है कि परीक्षा में ट्रेनिंग से अलग सवाल पूछे जा रहे हैं।
ड्राइवरों ने क्या कहा?
ड्राइवरों का कहना है कि उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से कराई गई मराठी ट्रेनिंग में हिस्सा लिया है। ट्रेनिंग में रोजमर्रा की बातचीत पर ध्यान दिया गया था।
इसके बावजूद RTO की जांच के दौरान उनसे ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं, जो प्रशिक्षण में नहीं बताए गए। इससे कई चालक परीक्षा में असफल हो रहे हैं।
मराठी भाषा की परीक्षा क्यों शुरू हुई?
महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा की कार्यकारी जानकारी जरूरी की है। सरकार का कहना है कि ड्राइवरों को यात्रियों से सामान्य बातचीत करने में सक्षम होना चाहिए।
इसी उद्देश्य से परिवहन विभाग ने प्रशिक्षण और परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की। यह अभियान राज्य के कई RTO और प्रशिक्षण केंद्रों में चलाया गया।
इस प्रक्रिया में ड्राइवरों को मराठी की सामान्य बातचीत सिखाई गई। इसमें यात्री से गंतव्य पूछना, किराया समझना और रास्ते से जुड़े सवालों का जवाब देना शामिल था।
105 दिन का प्रशिक्षण अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में ड्राइवरों के लिए 105 दिन का प्रशिक्षण और मूल्यांकन अभियान चलाया गया। इसमें बड़ी संख्या में चालकों ने हिस्सा लिया।
मुंबई में करीब 1.25 लाख ड्राइवरों ने प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें से 7,750 ड्राइवर परीक्षा में सफल नहीं हो सके। वहीं, 14 हजार से अधिक ड्राइवरों ने अभी प्रशिक्षण पूरा नहीं किया था।
टेस्ट में 16 सवाल पूछे जा रहे
RTO की ओर से ड्राइवरों की मराठी समझ जांचने के लिए 16 सवालों वाला टेस्ट लिया जा रहा है। इसमें औपचारिक भाषा ज्ञान के बजाय रोजमर्रा की बातचीत पर जोर दिया गया है।
टेस्ट में ऐसे सवाल शामिल हैं, जिनका संबंध यात्रियों से बातचीत से है। ड्राइवरों से रास्ता, किराया और वाहन से जुड़ी सामान्य बातचीत करने की क्षमता जांची जा रही है।
लेकिन हड़ताल कर रहे चालकों का कहना है कि सवालों का स्तर उनकी ट्रेनिंग से अलग है। इसी वजह से वे परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
फेल होने पर क्या कार्रवाई होगी?
RTO की जांच में जो चालक मराठी की जरूरी जानकारी नहीं दिखा पा रहे हैं, उन्हें नोटिस दिया जा रहा है। ऐसे चालकों को भाषा सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जा रहा है।
अगर चालक तय समय के बाद भी जरूरी स्तर हासिल नहीं करता है, तो उसके ड्राइविंग बैज पर कार्रवाई हो सकती है। नियमों के तहत बैज निलंबित किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
यही कार्रवाई ड्राइवरों की चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। उनका कहना है कि इससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है।
ड्राइवरों का कहना- मराठी सीखने से ऐतराज नहीं
हड़ताल कर रहे ड्राइवरों की मुख्य दलील यह है कि उन्हें मराठी सीखने से परेशानी नहीं है। उनकी शिकायत परीक्षा के तरीके और सवालों को लेकर है।
ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें जिस पाठ्यक्रम के आधार पर ट्रेनिंग दी गई, उसी के अनुसार परीक्षा होनी चाहिए। अगर टेस्ट में अलग सवाल पूछे जाएंगे, तो उन्हें तैयारी का उचित मौका नहीं मिलेगा।
उनका यह भी कहना है कि कई ड्राइवर लंबे समय से मुंबई में काम कर रहे हैं। अचानक भाषा परीक्षा और कार्रवाई की प्रक्रिया से उनके सामने आर्थिक चिंता खड़ी हो गई है।
मुंबई में यात्रियों की बढ़ी परेशानी
हड़ताल का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा है। कई इलाकों में ऑटो और टैक्सी की उपलब्धता कम हो गई।
सुबह और व्यस्त समय में यात्रियों को वाहन के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ा। कुछ लोगों को बस और दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा।
मुंबई जैसे बड़े शहर में ऑटो और टैक्सी रोजाना लाखों लोगों के सफर का हिस्सा हैं। इसलिए ड्राइवरों की हड़ताल का असर आम यात्रियों तक पहुंचना स्वाभाविक है।
सरकार ने मराठी को लेकर क्या कहा?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विवाद के बीच कहा है कि ड्राइवरों से मराठी भाषा का विशेषज्ञ होने की उम्मीद नहीं की जा रही है। सरकार की मांग काम चलाने लायक मराठी समझने की है।
सरकार का तर्क है कि यात्रियों और ड्राइवरों के बीच सामान्य बातचीत के लिए स्थानीय भाषा की जानकारी जरूरी है। परिवहन विभाग ने इसी आधार पर भाषा प्रशिक्षण और टेस्ट की प्रक्रिया शुरू की है।
इससे सरकार और ड्राइवरों के बीच बातचीत से समाधान निकलने की संभावना भी बनी हुई है।
RTO की कार्रवाई से विवाद बढ़ा
20 अगस्त से महाराष्ट्र के अलग-अलग RTO में मराठी भाषा की जांच शुरू हुई। अधिकारियों ने ड्राइवरों से मौखिक बातचीत के जरिए उनकी भाषा समझने की क्षमता जांची।
कुछ ड्राइवरों को परीक्षा में संतोषजनक प्रदर्शन नहीं करने पर नोटिस दिया गया। 25 अगस्त को महाराष्ट्र के RTO ने 331 ऑटो और टैक्सी चालकों को नोटिस जारी किए। इनमें 139 चालक मुंबई महानगर क्षेत्र से थे।
इस कार्रवाई के बाद ड्राइवरों का विरोध और तेज हो गया।
नोटिस के बाद बढ़ी नाराजगी
ड्राइवर संगठनों का कहना है कि परीक्षा में पारदर्शिता जरूरी है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण और परीक्षा के बीच अंतर नहीं होना चाहिए।
यदि सरकार किसी खास स्तर की मराठी की अपेक्षा करती है, तो पहले उसका स्पष्ट पाठ्यक्रम जारी किया जाना चाहिए। इसके बाद पर्याप्त समय देकर परीक्षा लेना उचित होगा।
मराठी टेस्ट पर कानूनी सवाल भी
ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी की अनिवार्यता का मुद्दा अब कानूनी स्तर पर भी पहुंच गया है। 25 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट में इस नियम को चुनौती देने वाली जनहित याचिका दायर किए जाने की जानकारी सामने आई।
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2017 में ऑटो रिक्शा परमिट के लिए इसी तरह की मराठी भाषा की शर्त को खारिज किया था। मौजूदा नियम की कानूनी स्थिति अब अलग से जांच का विषय बन सकती है।
इस मामले में अदालत का रुख आगे की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
ड्राइवरों की हड़ताल से आगे क्या?
फिलहाल ड्राइवरों का एक वर्ग तीन दिन की हड़ताल पर है। इस दौरान सरकार और परिवहन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती विवाद को बातचीत से सुलझाने की होगी।
ड्राइवर चाहते हैं कि परीक्षा उनके प्रशिक्षण के अनुसार हो। वहीं सरकार मराठी की बुनियादी जानकारी को सार्वजनिक परिवहन सेवा के लिए जरूरी मान रही है।
अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो परीक्षा और प्रशिक्षण की प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है।
यात्रियों और ड्राइवरों के लिए क्या अहम है?
इस पूरे विवाद में कुछ बातें खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं:
- मराठी की कार्यकारी जानकारी को लेकर नियम लागू किया जा रहा है।
- RTO ड्राइवरों की भाषा क्षमता की जांच कर रहा है।
- टेस्ट में 16 सवाल पूछे जा रहे हैं।
- असफल ड्राइवरों को सुधार के लिए समय दिया जा रहा है।
- लगातार असफल रहने पर बैज पर कार्रवाई हो सकती है।
- ड्राइवरों का आरोप है कि कुछ सवाल ट्रेनिंग से बाहर के हैं।
- विरोध में ऑटो और टैक्सी चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू की है।
- हड़ताल से मुंबई में यात्रियों को परेशानी हो रही है।
निष्कर्ष
मुंबई में मराठी टेस्ट ऑटो टैक्सी हड़ताल ने भाषा नियम को लेकर चल रहे विवाद को और बढ़ा दिया है। ड्राइवरों का कहना है कि वे मराठी सीखने के लिए तैयार हैं, लेकिन परीक्षा में ट्रेनिंग से बाहर के सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि ड्राइवरों के लिए मराठी की विशेषज्ञता नहीं, बल्कि कामकाज के स्तर की जानकारी जरूरी है। RTO ने इसी आधार पर जांच और नोटिस की प्रक्रिया शुरू की है।
अब देखना होगा कि सरकार ड्राइवरों की शिकायतों पर क्या कदम उठाती है। फिलहाल इस विवाद का असर मुंबई के सार्वजनिक परिवहन और आम यात्रियों पर साफ दिखाई दे रहा है।

