MP के 10 हजार शिक्षकों पर TET का संकट: 2011-13 में प्रमोशन पाने वालों की स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले से होगी साफ
मध्यप्रदेश में MP में शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता को लेकर नया विवाद सामने आया है। वर्ष 2011 और 2013 के बीच पदोन्नत करीब 10 हजार शिक्षक इस समय असमंजस में हैं।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से वर्षवार और कैडरवार सूची जारी करने की मांग की है। वहीं, सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों को TET देना जरूरी होगा।
MP में शिक्षकों पर TET का नया पेंच
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश के करीब डेढ़ लाख प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के सामने पात्रता से जुड़ा सवाल खड़ा हुआ है।
इसी बीच 2011 से 2013 के बीच पदोन्नति पाने वाले करीब 10 हजार शिक्षक अलग स्थिति में हैं। इन शिक्षकों को लेकर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे भी TET की अनिवार्यता के दायरे में आएंगे या नहीं।
मामले में शिक्षक संगठनों ने सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा के लिए आवेदन करने से पहले शिक्षकों को यह पता होना चाहिए कि किन-किन वर्गों के लिए TET अनिवार्य है।
2011-13 में पदोन्नत शिक्षकों का मामला क्या है?
मध्यप्रदेश में वर्ष 2011 और 2013 के बीच बड़ी संख्या में शिक्षकों को पदोन्नति मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट के TET संबंधी फैसले के बाद इन शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामला इसलिए पेचीदा है क्योंकि इन शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति अलग-अलग समय के नियमों के तहत हुई थी। ऐसे में यह तय करना जरूरी है कि TET की शर्त उन पर किस तरह लागू होगी।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार को पहले वर्षवार और कैडरवार स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसके बाद ही शिक्षकों को परीक्षा के संबंध में निर्णय लेना चाहिए।
करीब 10 हजार शिक्षक असमंजस में
रिपोर्ट के अनुसार, 2011 और 2013 के बीच पदोन्नत करीब 10 हजार शिक्षकों की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इन शिक्षकों को लेकर विभागीय स्तर पर भी अंतिम सूची जारी नहीं हुई है।
यही वजह है कि शिक्षक संगठनों ने सरकार से पात्र शिक्षकों की स्पष्ट सूची जारी करने की मांग की है। इससे यह पता चल सकेगा कि किन शिक्षकों को TET परीक्षा में शामिल होना होगा।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से क्या मांग की?
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग वर्षवार और कैडरवार सूची जारी करने की है।
शिक्षक संगठन चाहते हैं कि विभाग स्पष्ट करे कि कौन से शिक्षक TET की अनिवार्यता के दायरे में हैं और किन्हें इससे राहत मिल सकती है। इससे शिक्षकों के बीच बना असमंजस कम होगा।
ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षा केंद्र की मांग
शिक्षक संगठनों ने TET परीक्षा से जुड़े व्यावहारिक मुद्दे भी सरकार के सामने रखे हैं। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन विकल्प तथा शिक्षकों के लिए नजदीकी परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।
संगठनों का तर्क है कि लंबे समय से सेवा में मौजूद शिक्षकों के लिए परीक्षा की प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्यों जुड़ा है मामला?
TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को महत्वपूर्ण फैसला दिया था। इसमें अदालत ने RTE Act के तहत आने वाले स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए TET को निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में शामिल माना।
बाद में 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं का निपटारा करते हुए TET योग्यता हासिल करने की समय सीमा को 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया।
इससे शिक्षकों को अतिरिक्त समय मिला है। हालांकि, मध्यप्रदेश में पुराने शिक्षकों और पदोन्नत शिक्षकों की अलग-अलग श्रेणियों को लेकर अभी भी कई सवाल बाकी हैं।
TET की समय सीमा बढ़ाकर 2028 की गई
सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले के बाद TET पास करने की समय सीमा बढ़ाई गई है। अब निर्धारित श्रेणी में आने वाले शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक यह योग्यता हासिल करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों से TET नियमित अंतराल पर कराने का प्रयास करने को भी कहा है। अदालत ने परीक्षा साल में दो बार कराने को प्राथमिकता देने की बात कही है, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सके।
MP में करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित
TET की अनिवार्यता का असर मध्यप्रदेश के करीब डेढ़ लाख प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों पर पड़ने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी शिक्षकों की स्थिति एक जैसी नहीं है।
अलग-अलग नियुक्ति वर्ष, सेवा अवधि और पद के आधार पर नियमों का प्रभाव अलग हो सकता है। इसी वजह से 2011-13 में पदोन्नत शिक्षकों के मामले में स्पष्ट सूची का इंतजार किया जा रहा है।
पुराने शिक्षकों को लेकर भी सरकार सक्रिय
मध्यप्रदेश सरकार पुराने शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2005 और 2008 में परीक्षा पास करने वाले शिक्षकों को राहत देने से जुड़ा मामला भी सरकार के स्तर पर उठाया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद पात्र शिक्षकों की सूची जारी की जाएगी।
शिक्षक अभी TET फॉर्म भरें या नहीं?
यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। शिक्षक संगठन चाहते हैं कि पहले सरकार यह स्पष्ट करे कि 2011-13 में पदोन्नत हुए शिक्षक परीक्षा के लिए पात्र या अनिवार्य श्रेणी में आते हैं या नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने फिलहाल शिक्षकों से TET फॉर्म नहीं भरने की अपील की है। हालांकि, शिक्षकों को अंतिम निर्णय लेने से पहले सरकार और संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
सरकारी स्तर पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि किन शिक्षकों के लिए आवेदन जरूरी है।
TET विवाद का असर पदोन्नति पर भी
TET का मामला केवल नौकरी में बने रहने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध भविष्य की पदोन्नति से भी जुड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, संबंधित श्रेणी के सेवारत शिक्षकों के लिए TET पदोन्नति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण योग्यता है। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि TET पास किए बिना ऐसे शिक्षक पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे।
इस वजह से पुराने शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ी है। खासकर वे शिक्षक जो पहले ही सेवा में पदोन्नति पा चुके हैं, वे अपनी वर्तमान स्थिति को लेकर विभागीय स्पष्टीकरण चाहते हैं।
सरकार के सामने क्या चुनौती है?
मध्यप्रदेश सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग श्रेणी के शिक्षकों की स्थिति स्पष्ट करना है। इसके लिए नियुक्ति वर्ष, पदोन्नति वर्ष, कैडर और सेवा नियमों का अलग-अलग अध्ययन करना होगा।
इसके बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि किस शिक्षक को TET देना जरूरी है। इसी वजह से सरकार सुप्रीम कोर्ट की कानूनी स्थिति और आगामी निर्णय का इंतजार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्णय का इंतजार
मंत्री और विभागीय अधिकारियों से बातचीत के बाद शिक्षकों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। सरकार की ओर से पात्र शिक्षकों की सूची जारी करने की बात कही गई है।
इस सूची से शिक्षकों को अपनी स्थिति समझने में आसानी होगी। साथ ही TET आवेदन को लेकर भी भ्रम कम होगा।
शिक्षकों के लिए आगे क्या होगा?
आने वाले समय में इस मामले में तीन चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी।
- सुप्रीम कोर्ट का संबंधित निर्णय।
- मध्यप्रदेश सरकार की वर्षवार और कैडरवार सूची।
- TET परीक्षा और आवेदन को लेकर विभाग के अंतिम निर्देश।
इन तीनों के आधार पर शिक्षकों को आगे की प्रक्रिया तय करनी होगी। तब तक किसी एक श्रेणी के सभी शिक्षकों को TET से मुक्त या अनिवार्य मानना जल्दबाजी होगी।
निष्कर्ष
MP में शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता को लेकर 2011-13 में पदोन्नत करीब 10 हजार शिक्षकों के बीच असमंजस बना हुआ है। शिक्षक संगठन चाहते हैं कि सरकार पहले वर्षवार और कैडरवार सूची जारी करे, ताकि यह साफ हो सके कि किन शिक्षकों को परीक्षा देनी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद TET की योग्यता को लेकर देशभर में नई व्यवस्था बनी है। मई 2026 में अदालत ने इसकी समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है।
अब मध्यप्रदेश में 2011-13 में पदोन्नत शिक्षकों की स्थिति पर सबकी नजर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राज्य सरकार की आधिकारिक सूची के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन 10 हजार शिक्षकों पर TET की शर्त किस रूप में लागू होगी।

