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अदाणी ग्रुप का बड़ा ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट, राजस्थान से चंबल होकर यूपी पहुंचेगी 800 KV ट्रांसमिशन लाइन

अदाणी ग्रुप के बड़े ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट और राजस्थान से यूपी तक 800 KV ट्रांसमिशन लाइन का न्यूज़ ग्राफ़िक - न्यूज़ क्रिटिक

राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक देश के बड़े अदाणी ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट के तहत हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। करीब 950 किलोमीटर लंबी ±800 KV HVDC लाइन राजस्थान के भड़ला से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर तक नवीकरणीय बिजली पहुंचाएगी।

इस परियोजना की क्षमता 6,000 मेगावाट है। इसका मकसद राजस्थान के बड़े नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से पैदा होने वाली बिजली को देश के राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाना है। परियोजना को जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

अदाणी ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट से बदलेगा बिजली ट्रांसमिशन का नेटवर्क

अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की यह परियोजना राजस्थान में तैयार हो रही नवीकरणीय ऊर्जा को उत्तर भारत के बड़े बिजली केंद्रों तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके तहत भड़ला, राजस्थान से फतेहपुर, उत्तर प्रदेश के बीच ±800 KV HVDC ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा।

कंपनी के मुताबिक यह करीब 950 किलोमीटर लंबा ग्रीन ट्रांसमिशन कॉरिडोर होगा। इसके जरिए 6 गीगावाट यानी 6,000 मेगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा को स्थानांतरित किया जा सकेगा।

800 KV HVDC तकनीक क्यों खास है?

HVDC यानी हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट तकनीक का इस्तेमाल लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में बिजली के ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है। राजस्थान जैसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र को दूर स्थित बिजली खपत वाले क्षेत्रों से जोड़ने में यह तकनीक उपयोगी है।

इस परियोजना में ±800 KV का सिस्टम इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें भड़ला और फतेहपुर के पास 6,000 MW क्षमता के HVDC टर्मिनल विकसित किए जाने हैं।

राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक पहुंचेगी ग्रीन बिजली

राजस्थान देश के प्रमुख सौर ऊर्जा केंद्रों में शामिल है। राज्य के भड़ला क्षेत्र में बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित हुई है। इसी क्षेत्र से नवीकरणीय बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।

अदाणी समूह की परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से पैदा होने वाली बिजली को फतेहपुर तक पहुंचाना है। कंपनी के अनुसार यह बिजली राष्ट्रीय ग्रिड में शामिल होकर देश के अलग-अलग हिस्सों की मांग को पूरा करने में मदद करेगी।

इससे राजस्थान में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा को केवल स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल करने के बजाय लंबी दूरी तक भेजना आसान होगा।

चंबल क्षेत्र से जुड़ेगा बड़ा ट्रांसमिशन कॉरिडोर

परियोजना के रूट को लेकर उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तीनों राज्यों का उल्लेख है। मार्च 2026 की सरकारी परियोजना निगरानी रिपोर्ट में राजस्थान पार्ट-I पावर ट्रांसमिशन परियोजना को इन तीन राज्यों से जुड़ी मल्टी-स्टेट परियोजना के रूप में दर्ज किया गया है।

इसी वजह से इस ट्रांसमिशन नेटवर्क का असर मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। चंबल क्षेत्र से जुड़े हिस्सों में लाइन और उससे संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी।

हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में पूरे रूट के हर जिले या गांव की अंतिम सूची नहीं दी गई है। इसलिए किसी विशेष जिले या गांव को अंतिम रूट का हिस्सा बताने से पहले आधिकारिक सर्वे और भूमि अधिग्रहण की जानकारी देखना जरूरी होगा।

6000 MW बिजली ट्रांसमिशन की क्षमता

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6,000 MW क्षमता है। इसे दो 3,000 MW बाइपोल के रूप में विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दस्तावेजों में दोनों बाइपोल के लिए ±800 KV HVDC व्यवस्था का उल्लेख है।

इसका मतलब है कि राजस्थान से बड़ी मात्रा में नवीकरणीय बिजली को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर तक पहुंचाने के लिए एक हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन कॉरिडोर तैयार होगा।

परियोजना में फतेहपुर पर 5×1500 MVA क्षमता के 765/400 KV ट्रांसफॉर्मर भी शामिल हैं।

परियोजना की प्रमुख बातें

  • शुरुआत: भड़ला, राजस्थान
  • गंतव्य: फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
  • ट्रांसमिशन तकनीक: ±800 KV HVDC
  • क्षमता: 6,000 MW
  • अनुमानित लंबाई: करीब 950 किलोमीटर
  • लक्षित कमीशनिंग: जुलाई 2029
  • उद्देश्य: राजस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाना

ये आंकड़े कंपनी और सरकारी परियोजना दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं।

अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस कर रही परियोजना

इस बड़े ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की सहायक कंपनी राजस्थान पार्ट-I पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के माध्यम से विकसित किया जा रहा है। परियोजना के लिए जापानी बैंकों से दीर्घकालिक वित्तपोषण भी हासिल किया गया है।

MUFG बैंक और सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन समेत जापानी वित्तीय संस्थानों ने परियोजना के वित्तपोषण में भूमिका निभाई है। यह भारत में बड़े स्तर के नवीकरणीय ऊर्जा ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय भागीदारी को भी दिखाता है।

BHEL और Hitachi Energy भी परियोजना से जुड़े

इस परियोजना में तकनीकी स्तर पर भारत और जापान की कंपनियों की भागीदारी भी है। BHEL और Hitachi Energy के कंसोर्टियम ने ±800 KV, 6,000 MW HVDC टर्मिनल से जुड़ा अनुबंध हासिल किया है।

HVDC टर्मिनल परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हीं के जरिए बिजली को ट्रांसमिशन के लिए उपयुक्त रूप में बदला और फिर ग्रिड में भेजा जाता है।

इस तरह परियोजना में अदाणी समूह के साथ भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BHEL और वैश्विक तकनीकी कंपनी Hitachi Energy की विशेषज्ञता भी शामिल है।

ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने में मिलेगी मदद

भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उसके लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार करने पर भी जोर दिया है। केवल सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। उनसे पैदा होने वाली बिजली को उत्पादन केंद्रों से मांग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ग्रिड की जरूरत होती है।

अदाणी ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट इसी जरूरत को पूरा करने वाले बड़े ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है। राजस्थान से बिजली को उत्तर प्रदेश तक पहुंचाने से राष्ट्रीय ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

अदाणी ग्रीन एनर्जी के अनुसार कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 5.1 GW की नई ग्रीनफील्ड क्षमता जोड़ी और उसकी कुल परिचालन नवीकरणीय क्षमता 19.3 GW तक पहुंच गई। राजस्थान भी कंपनी के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है।

परियोजना से जुड़ी चुनौतियां भी बड़ी

इतने लंबे ट्रांसमिशन कॉरिडोर को तैयार करना आसान काम नहीं है। लाइन के लिए टावर, सब-स्टेशन, भूमि, पर्यावरणीय मंजूरी और अलग-अलग राज्यों में निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं की जरूरत होती है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की परियोजना रिपोर्ट में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भूमि तथा वन क्षेत्र से जुड़े विवरण भी दर्ज हैं। रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के हिस्से में सर्वे का कुछ काम बाकी होने का उल्लेख किया गया था।

इससे साफ है कि परियोजना के निर्माण में तकनीकी काम के साथ जमीन और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी महत्वपूर्ण स्थान है।

जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य

सरकारी दस्तावेजों में इस परियोजना की लक्षित पूर्णता जुलाई 2029 बताई गई है। परियोजना की इंजीनियरिंग और अन्य शुरुआती गतिविधियां पहले से चल रही हैं।

कंपनी ने भी परियोजना को 2029 तक चालू करने की योजना बताई है। इसके पूरा होने के बाद राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक बड़े पैमाने पर नवीकरणीय बिजली पहुंचाने की क्षमता तैयार हो जाएगी।

निष्कर्ष

अदाणी ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के भड़ला से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर तक बनने वाला ±800 KV HVDC ट्रांसमिशन कॉरिडोर भारत के बड़े ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल है। करीब 950 किलोमीटर लंबे इस नेटवर्क की क्षमता 6,000 MW होगी।

राजस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाने वाला यह प्रोजेक्ट केवल बिजली ट्रांसमिशन को मजबूत नहीं करेगा, बल्कि देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए भी अहम भूमिका निभा सकता है। अब परियोजना की प्रगति, भूमि से जुड़े कार्य और 2029 की लक्षित समयसीमा पर नजर रहेगी।

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