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‘पैसे लेकर दर्शन’ नेटवर्क पर एक्शन: ओंकारेश्वर में 2 कर्मचारी बर्खास्त, पंडित पर केस

न्यूज़ इन्फोग्राफिक जिसमें 'पैसे लेकर दर्शन' कराने वाले नेटवर्क पर एक्शन की खबर है। ओंकारेश्वर और श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की तस्वीरों के साथ एक व्यक्ति को पैसे देकर 'विशेष दर्शन' की पर्ची लेते हुए दिखाया गया है।

मध्य प्रदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंग मंदिरों में पैसे लेकर दर्शन कराने के आरोपों ने एक बार फिर मंदिर व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओंकारेश्वर में कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि एक पंडित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
दूसरी ओर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी इसी तरह की शिकायतों के बीच फिलहाल जांच कमेटी गठित किए जाने की बात सामने आई है। इससे दोनों मंदिरों में कार्रवाई के तरीके को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

ओंकारेश्वर में पैसे लेकर दर्शन कराने पर सख्ती

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में श्रद्धालुओं से पैसे लेकर शीघ्र या विशेष दर्शन कराने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। हाल के मामलों में मंदिर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के बाद व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है।

सितंबर की शुरुआत में गुजरात से आए 37 श्रद्धालुओं से शीघ्र दर्शन के नाम पर 25,900 रुपये वसूलने का मामला सामने आया था। आरोप था कि एक युवक ने खुद को मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा बताकर श्रद्धालुओं को जल्द दर्शन कराने का भरोसा दिया।

यह मामला सामने आने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर होने वाली कथित अवैध वसूली पर फिर सवाल उठे।

दो कर्मचारियों की सेवाएं खत्म

ओंकारेश्वर में इससे पहले भी दर्शन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। मई 2026 में श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों के बीच विवाद के बाद एक सुपरवाइजर समेत छह कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

वहीं जुलाई में प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर 11 श्रद्धालुओं से 13,200 रुपये वसूलने के आरोप में कार्रवाई की गई थी। मामले में एक आरक्षक को लाइन अटैच किया गया था, जबकि सुरक्षा गार्ड और फोटोग्राफर के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

ताजा कार्रवाई में दो कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने और एक पंडित के खिलाफ केस दर्ज किए जाने से मंदिर प्रशासन का रुख पहले की तुलना में ज्यादा सख्त नजर आ रहा है।

पंडित पर भी दर्ज हुआ केस

मामले में मंदिर से जुड़े पंडित की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है। आरोप है कि श्रद्धालुओं को पैसे लेकर विशेष या शीघ्र दर्शन कराने की व्यवस्था से जुड़े लोगों का नेटवर्क सक्रिय था।

ऐसे मामलों में पुलिस के लिए यह पता लगाना अहम होता है कि श्रद्धालुओं से पैसा किसने लिया, किसके कहने पर दर्शन की व्यवस्था कराई गई और रकम का बंटवारा किस तरह हुआ।

ओंकारेश्वर में पहले भी पंडित और मंदिर से जुड़े लोगों पर पैसे लेकर दर्शन कराने के आरोप सामने आ चुके हैं। मई 2024 में भी श्रद्धालुओं ने कर्मचारियों पर पैसे लेकर बिना लाइन दर्शन कराने के आरोप लगाए थे।

सिर्फ एजेंट ही नहीं, अंदर के नेटवर्क पर भी नजर

दर्शन के नाम पर ठगी या अवैध वसूली के मामलों में केवल बाहरी एजेंट ही जिम्मेदार हैं या मंदिर व्यवस्था से जुड़े कुछ लोग भी इसमें शामिल हैं, यह बड़ा सवाल है।

सितंबर में सामने आए मामले में आरोपी ने कथित तौर पर खुद को मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा बताया था। 37 श्रद्धालुओं से पैसे लेने के मामले में अब भुगतान और संपर्क से जुड़े सबूतों की जांच की जा रही है।

अगर जांच में मंदिर कर्मचारियों या अन्य अंदरूनी लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

महाकाल मंदिर में भी पैसे लेकर दर्शन के आरोप

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं से ज्यादा पैसे लेकर दर्शन कराने की शिकायतें नई नहीं हैं। दिसंबर 2024 में मंदिर के दो कर्मचारियों के खातों, Google Pay और PhonePe पर लाखों रुपये के लेनदेन की जांच की गई थी।

इसके बाद पुलिस जांच में मामले का दायरा बढ़ा था। रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कुछ और कर्मचारियों के नाम सामने आए थे और कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

वर्तमान में सामने आए नए आरोपों ने एक बार फिर महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है।

महाकाल में जांच कमेटी बनने से उठे सवाल

ओंकारेश्वर में कर्मचारियों की बर्खास्तगी और पंडित पर केस के मुकाबले महाकाल मंदिर में जांच कमेटी बनाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि किसी भी शिकायत पर पहले तथ्यों की जांच जरूरी होती है। जांच कमेटी का उद्देश्य यह पता लगाना हो सकता है कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और मंदिर व्यवस्था में किस स्तर पर खामी हुई।

महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था पहले भी कई बार विवादों में रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकार की ओर से बताया गया था कि चार वर्षों में भस्मारती में ठगी के सात मामले सामने आए और इन मामलों में सात FIR दर्ज की गई थीं।

शीघ्र दर्शन और अवैध वसूली में अंतर

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। मंदिरों में निर्धारित शुल्क देकर उपलब्ध आधिकारिक शीघ्र दर्शन व्यवस्था अलग है। समस्या तब पैदा होती है, जब कोई व्यक्ति निर्धारित व्यवस्था के बाहर जाकर अतिरिक्त रकम लेकर विशेष दर्शन कराने का दावा करता है।

महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन के लिए निर्धारित व्यवस्था पहले से मौजूद है। मध्य प्रदेश विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु निर्धारित राशि देकर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं।

इसलिए श्रद्धालुओं को किसी अनधिकृत व्यक्ति को नकद या निजी खाते में पैसा देने से बचना चाहिए।

ओंकारेश्वर में पहले भी सामने आए कई मामले

ओंकारेश्वर में अवैध वसूली और फर्जी प्रोटोकॉल के कई मामले इस साल सामने आ चुके हैं। जुलाई में 11 श्रद्धालुओं से कथित तौर पर 13,200 रुपये वसूले गए थे।

इसके अलावा मई 2026 में मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर अनधिकृत रिस्ट बैंड बेचने और मार्च में एक पंडित द्वारा पुराने प्रोटोकॉल बेल्ट के जरिए श्रद्धालुओं से रकम लेने की घटनाओं का भी उल्लेख सामने आया है।

इन घटनाओं से साफ है कि समस्या केवल एक मामले तक सीमित नहीं है। मंदिर प्रशासन के सामने ऐसी गतिविधियों पर स्थायी रोक लगाने की चुनौती है।

श्रद्धालुओं को कैसे रहना चाहिए सावधान?

मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में नहीं आना चाहिए। खासकर VIP, प्रोटोकॉल या गर्भगृह दर्शन के नाम पर निजी तौर पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहना जरूरी है।

श्रद्धालुओं को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • केवल अधिकृत काउंटर या ऑनलाइन माध्यम से ही भुगतान करें।
  • बिना रसीद किसी व्यक्ति को पैसा न दें।
  • VIP या प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर अनधिकृत दावे से सावधान रहें।
  • संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मंदिर प्रशासन या पुलिस को दें।
  • भुगतान की रसीद और डिजिटल ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

मंदिर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

ओंकारेश्वर और महाकाल दोनों ही मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं। यहां देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना मंदिर प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।

श्रद्धालुओं को अगर यह लगे कि पैसे देने वालों को सामान्य कतार से अलग सुविधा मिल रही है, तो इससे व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। इसलिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि निगरानी और शिकायत व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।

CCTV निगरानी, अधिकृत कर्मचारियों की पहचान, डिजिटल टिकटिंग और नियमित ऑडिट जैसे कदम अवैध वसूली रोकने में मदद कर सकते हैं।

निष्कर्ष

पैसे लेकर दर्शन कराने के आरोपों पर ओंकारेश्वर में दो कर्मचारियों की बर्खास्तगी और पंडित के खिलाफ केस की कार्रवाई ने मंदिर व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश दिया है। वहीं महाकाल मंदिर में जांच कमेटी बनाए जाने के बाद अब जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।

ओंकारेश्वर में इस साल सामने आए लगातार मामलों को देखते हुए यह जरूरी है कि मंदिर प्रशासन अंदरूनी और बाहरी दोनों स्तरों पर निगरानी बढ़ाए। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इन केंद्रों पर दर्शन व्यवस्था पारदर्शी और समान होनी चाहिए, ताकि किसी को पैसे या पहुंच के आधार पर अनुचित लाभ न मिले।

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