CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, हिमंत ने बताया ‘राजनीतिक एजेंडा’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विपक्षी दल उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया है।
ज्ञानेश कुमार इस्तीफा मांग पर विपक्ष का प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था।
इसके अलावा, CPI(M), CPI, CPI(ML)-लिबरेशन, RSP और AIFB ने भी संयुक्त बयान जारी किया। इन दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रदर्शन की घोषणा की है।
विपक्ष का यह विरोध चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद के बाद तेज हुआ है। इसमें आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी।
चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट पर विवाद
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच कई मामलों पर आपत्तियों का जिक्र किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मामले भी शामिल बताए गए। रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों के बीच कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सभी तीन चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।
राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद को लेकर उनके इस्तीफे की मांग की है।
राहुल गांधी की टिप्पणी चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट के बाद आई। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
इसके बाद विपक्षी दलों ने अपने विरोध को आगे बढ़ाने का फैसला किया। कांग्रेस समेत कई दल अब प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।
हिमंत बिस्वा सरमा ने क्या कहा?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव किया है। उन्होंने आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया।
सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग में फैसले सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। उनके अनुसार, CEC अकेले कोई फैसला नहीं ले सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि आयोग में फैसले सहमति या बहुमत के आधार पर होते हैं। इसलिए किसी एक अधिकारी को सभी फैसलों के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
ECI ने आंतरिक मतभेद पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट में बताए गए मतभेदों के संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार, संस्थागत चर्चा में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
SIR से जुड़े फैसलों को लेकर आयोग ने कहा कि इन्हें सभी तीन चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली थी। इस दावे के बाद विवाद का एक प्रमुख मुद्दा आयोग के फैसलों की प्रक्रिया बन गया है।
वहीं, विपक्ष इन घटनाओं को अलग नजरिए से देख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
SIR बना विवाद का बड़ा मुद्दा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पहले से राजनीतिक बहस चल रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसमें जरूरी सुधार करना है।
हालिया विवाद में SIR से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख हुआ है। इसी वजह से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक चर्चा और तेज हुई।
विपक्षी दल आयोग से जुड़े सवालों को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना रहे हैं। वहीं, आयोग अपनी प्रक्रिया और फैसलों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर रहा है।
विपक्ष ने देशव्यापी प्रदर्शन का किया ऐलान
विपक्षी दल अब इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है।
इसके अलावा, कई वाम दलों ने भी अलग-अलग तारीखों में प्रदर्शन की घोषणा की है। इन दलों की मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी है।
प्रदर्शन का यह कार्यक्रम 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलने की घोषणा की गई है। इससे साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहेगा।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी बयानबाजी
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर अब सरकार समर्थक और विपक्षी नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और फैसलों पर सवाल उठा रहा है।
दूसरी ओर, हिमंत बिस्वा सरमा ने आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया है। उन्होंने आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का हवाला दिया है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कहा कि चुनाव आयोग को अपने पक्ष को मजबूती से जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहना जरूरी है।
आगे क्या होगा?
अब इस विवाद में अगले कुछ दिनों की राजनीतिक गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी। विपक्ष अपने घोषित प्रदर्शन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से SIR और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया पर दिए गए स्पष्टीकरण भी चर्चा में रहेंगे।
फिलहाल, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग विपक्ष की प्रमुख मांग बनी हुई है। दूसरी ओर, सरकार समर्थक नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक विवाद के रूप में पेश किया है।
निष्कर्ष
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है और कई दलों ने विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है।
वहीं, हिमंत बिस्वा सरमा ने आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया है। उन्होंने चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का बचाव किया है।
अब इस मामले में चुनाव आयोग की आगे की प्रतिक्रिया और विपक्ष के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।

