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केदारनाथ में कचरे का अंबार: 5 महीने में निकला 50 टन कचरा, टूट गए पिछले सारे रिकॉर्ड

केदारनाथ धाम में कचरे का अंबार, 5 महीने में निकला 50 टन कचरा - News Critic

केदारनाथ में कचरे का नया रिकॉर्ड

केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ कचरा भी बढ़ रहा है। इस साल केवल पांच महीने में 50.30 मीट्रिक टन कचरा सामने आया है।

यह आंकड़ा अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच का है। नगर पंचायत ने यह जानकारी आरटीआई के जवाब में दी है।

सबसे बड़ी बात यह है कि पांच महीने का यह आंकड़ा पिछले तीन साल के पूरे आंकड़ों से ज्यादा है। 2025 में पूरे यात्रा सीजन में 21.40 मीट्रिक टन कचरा दर्ज हुआ था।

यानी 2026 के सिर्फ पांच महीनों में कचरा 2025 के मुकाबले करीब 135 प्रतिशत ज्यादा हो गया। यह बढ़ता आंकड़ा केदारनाथ की सफाई व्यवस्था पर दबाव दिखाता है।

पिछले तीन साल के रिकॉर्ड से ज्यादा कचरा

नगर पंचायत के आंकड़े केदारनाथ में कचरे की बढ़ती मात्रा को दिखाते हैं।

  • 2023: 32.58 मीट्रिक टन
  • 2024: 26.10 मीट्रिक टन
  • 2025: 21.40 मीट्रिक टन
  • 2026 अप्रैल-अगस्त: 50.30 मीट्रिक टन

इन आंकड़ों से साफ है कि इस साल स्थिति अलग है। केवल पांच महीने में ही कचरा पिछले तीनों वर्षों के पूरे आंकड़ों से आगे निकल गया।

2026 का आंकड़ा 2023 से करीब 54 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं 2024 के मुकाबले यह करीब 93 प्रतिशत अधिक है।

2025 से तुलना करें तो यह अंतर करीब 135 प्रतिशत है। यही वजह है कि केदारनाथ में कचरा प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ी है।

मई में सबसे ज्यादा कचरा निकला

नगर पंचायत ने महीने के हिसाब से भी आंकड़े दिए हैं। इसमें मई का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा।

अप्रैल में 1.7 मीट्रिक टन कचरा दर्ज हुआ। मई में यह बढ़कर 16.3 मीट्रिक टन हो गया।

इसके बाद जून में 11.5 मीट्रिक टन कचरा निकला। जुलाई में यह आंकड़ा 10.5 मीट्रिक टन रहा।

अगस्त में भी स्थिति ज्यादा नहीं बदली। इस महीने 10.3 मीट्रिक टन कचरा दर्ज हुआ।

इस तरह पांच महीनों में कुल कचरा 50.30 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। आंकड़ों से पता चलता है कि यात्रा सीजन के दौरान कचरे का दबाव तेजी से बढ़ा।

करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा

केदारनाथ में केवल सामान्य कचरे की मात्रा ही नहीं बढ़ी है। प्लास्टिक कचरा भी बड़ी चुनौती बन रहा है।

नगर पंचायत के अनुसार, 2026 में अब तक करीब 20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा सामने आया है। इसमें से 18.5 मीट्रिक टन प्लास्टिक को प्रोसेस किया जा चुका है।

यह कुल प्लास्टिक कचरे का करीब 92.5 प्रतिशत है। वहीं लगभग 1.5 मीट्रिक टन प्लास्टिक अभी बाकी है।

पहाड़ी क्षेत्र में प्लास्टिक का निपटान आसान नहीं होता। ऐसे में बढ़ती मात्रा कचरा प्रबंधन व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।

केदारनाथ में लैंडफिल की कितनी क्षमता?

कचरे के निपटान के लिए केदारनाथ में लैंडफिल की व्यवस्था भी है। नगर पंचायत के अनुसार, यहां लैंडफिल की कुल क्षमता 30 हजार वर्ग फुट है।

इसमें करीब 28 हजार वर्ग फुट जगह अभी बची हुई है। पिछले पांच साल में केदारनाथ में चार लैंडफिल बनाए गए हैं।

हालांकि, कचरे की मात्रा लगातार बढ़ने पर भविष्य की जरूरतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए यह मुद्दा अहम है।

आरटीआई के जरिए सामने आए आंकड़ों ने कचरा प्रबंधन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे

इस साल केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक करीब 15 लाख श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच चुके हैं।

श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ता है। इसमें सड़क, पानी, सफाई और कचरा प्रबंधन शामिल हैं।

केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में कचरे को नीचे लाना भी आसान काम नहीं है। इसलिए यहां कचरे को कम करना और सही तरीके से अलग करना जरूरी हो जाता है।

इसी वजह से पर्यावरण से जुड़े लोगों ने भी कचरे के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता जताई है।

हिमालयी पर्यावरण पर बढ़ सकता है दबाव

केदारनाथ हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। यहां का पर्यावरण काफी संवेदनशील माना जाता है।

ऐसे क्षेत्र में प्लास्टिक और दूसरे कचरे का बढ़ना चिंता का विषय है। कचरे की मात्रा बढ़ने पर उसके संग्रह और निपटान की जरूरत भी बढ़ती है।

अगर कचरा समय पर प्रोसेस नहीं हुआ तो लैंडफिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, कचरे के गलत निपटान से आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, नगर पंचायत के आंकड़ों के अनुसार बड़ी मात्रा में प्लास्टिक प्रोसेस भी किया गया है। इसलिए समस्या के साथ-साथ कचरा प्रबंधन के प्रयासों को भी आंकड़ों के साथ देखना जरूरी है।

RTI से सामने आई पूरी तस्वीर

केदारनाथ में कचरे का यह आंकड़ा एक आरटीआई के जवाब से सामने आया है। नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने नगर पंचायत से कचरे को लेकर जानकारी मांगी थी।

जवाब में नगर पंचायत ने 2023 से 2026 तक के आंकड़े उपलब्ध कराए। इसी जानकारी से पता चला कि 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही कचरा पुराने रिकॉर्ड से काफी आगे निकल गया।

इस जानकारी के बाद केदारनाथ की सफाई व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा पर चर्चा तेज हुई है। बढ़ती तीर्थयात्रा के साथ कचरा प्रबंधन को मजबूत करना अब अहम मुद्दा बन गया है।

आगे क्या चुनौती होगी?

केदारनाथ में कचरे की बढ़ती मात्रा आने वाले समय के लिए चुनौती है। खासकर तब, जब श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

ऐसे में कचरे को अलग-अलग करना जरूरी होगा। प्लास्टिक को अलग करके उसका प्रोसेसिंग सिस्टम मजबूत करना भी जरूरी है।

इसके अलावा, यात्रियों और दुकानदारों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत होगी। कचरा कम पैदा करना भी इस समस्या का एक अहम समाधान हो सकता है।

केदारनाथ में कचरा प्रबंधन केवल सफाई का मुद्दा नहीं है। यह हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा से भी जुड़ा है।

निष्कर्ष

केदारनाथ में कचरे का आंकड़ा इस साल नया रिकॉर्ड बना चुका है। अप्रैल से अगस्त के बीच 50.30 मीट्रिक टन कचरा दर्ज हुआ।

यह मात्रा 2025 के पूरे यात्रा सीजन से ढाई गुना से ज्यादा है। साथ ही, यह पिछले तीनों वर्षों के पूरे साल के आंकड़ों से भी अधिक है।

करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा भी सामने आया है। इसमें से 92.5 प्रतिशत प्लास्टिक प्रोसेस किया जा चुका है।

अब चुनौती बढ़ते कचरे को नियंत्रित करने की है। केदारनाथ में कचरा प्रबंधन को मजबूत करना हिमालयी पर्यावरण के लिए अहम होगा।

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