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छत्तीसगढ़ में बाढ़ का कहर, 300 से अधिक गांव बने टापू; बस्तर और बीजापुर में राहत कार्य के लिए वायुसेना ने संभाला मोर्चा

छत्तीसगढ़ में भारी बाढ़ से 300 से अधिक गांव टापू बने, बस्तर और बीजापुर में वायुसेना का राहत कार्य - न्यूज़ क्रिटिक

छत्तीसगढ़ में बाढ़ ने कई इलाकों में मुश्किल बढ़ा दी है। भारी बारिश के कारण बस्तर संभाग में नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। कई गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

हालात बिगड़ने के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। बस्तर में भारतीय वायुसेना ने भी मोर्चा संभाला है। हेलीकॉप्टर की मदद से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

छत्तीसगढ़ में बाढ़ से 571 गांव प्रभावित

राज्य में बाढ़ का असर बड़े क्षेत्र में देखने को मिला है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 571 गांव प्रभावित हुए हैं। वहीं, 22,377 लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू किया। अब तक करीब 16 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके लिए कई राहत शिविर बनाए गए हैं।

सरकार के अनुसार प्रभावित इलाकों में 173 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में लोगों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने राहत शिविरों में लोगों से मुलाकात की। साथ ही, अधिकारियों से बचाव कार्य की जानकारी ली।

बस्तर में वायुसेना ने संभाला मोर्चा

बस्तर में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बाद वायुसेना की मदद ली गई। कई जगह सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल हो गया था। ऐसे में हेलीकॉप्टर से राहत पहुंचाई गई।

डोंगाघाट गांव के पास 12 लोग बाढ़ के पानी में फंस गए थे। ये लोग एक कच्चे मकान की छत पर मौजूद थे। वायुसेना ने हेलीकॉप्टर की मदद से सभी को सुरक्षित निकाल लिया।

बचाए गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण इलाके में खतरा बढ़ गया था।

इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर

बस्तर क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसके बाद आसपास के कई इलाकों में पानी भर गया।

कई सड़कें भी प्रभावित हुईं। इससे राहत टीमों को मौके तक पहुंचने में परेशानी हुई। इसलिए कुछ स्थानों पर हवाई बचाव अभियान चलाया गया।

इससे पहले भी बाढ़ में फंसे लोगों को वायुसेना की मदद से सुरक्षित निकाला गया था। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी बढ़ाई है।

बीजापुर में भी राहत अभियान जारी

बीजापुर में भी भारी बारिश और बाढ़ का असर देखने को मिला है। कई इलाकों में पानी भरने से सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई।

बाढ़ के बीच छह सदस्यीय एक सर्वे टीम भी फंस गई थी। यह टीम फसल सर्वे के काम में लगी थी। बाद में हेलीकॉप्टर की मदद से सभी सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया।

प्रशासन के लिए ऐसे इलाकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती है। कई जगह सड़क और पुल प्रभावित हुए हैं। इसलिए राहत कार्य में हवाई मदद महत्वपूर्ण हो गई है।

16 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। सरकार के अनुसार करीब 16 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

इसके अलावा राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को रखा गया है। प्रशासन इन शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।

बाढ़ के कारण कई परिवारों के घरों को भी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही फसलों और पशुधन पर भी असर पड़ा है।

मकानों को भी पहुंचा नुकसान

सरकारी जानकारी के अनुसार 199 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, करीब 11 हजार मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

बारिश और बाढ़ से 172 मवेशियों की मौत की भी जानकारी सामने आई है। प्रशासन अब नुकसान का आकलन कर रहा है।

सर्वे पूरा होने के बाद प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता दी जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की मदद

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अलग-अलग स्थानों पर राहत शिविर बनाए गए हैं। यहां लोगों को सुरक्षित रखने के साथ जरूरी मदद दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने भी राहत शिविरों का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की। साथ ही, अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

सुकमा में करीब 300 प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की जानकारी भी सामने आई है। यह सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से देने की बात कही गई है।

सड़क संपर्क टूटने से बढ़ी परेशानी

बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। इससे राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।

खासकर बस्तर के अंदरूनी इलाकों में यह चुनौती ज्यादा है। कई जगह पानी का बहाव तेज है। इसलिए सामान्य वाहनों से पहुंचना आसान नहीं है।

ऐसे में प्रशासन को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वहीं, जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर से भी मदद पहुंचाई जा रही है।

भारी बारिश से बिगड़े हालात

बस्तर संभाग में लगातार बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ा। इसके कारण निचले इलाकों में पानी भर गया।

इसके बाद कई गांवों में लोगों की परेशानी बढ़ गई। कुछ स्थानों पर घरों में पानी घुस गया। वहीं, कई परिवारों को सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा।

प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए राहत टीमों को सक्रिय किया। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा

फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। इसके लिए प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है।

वहीं, राहत शिविरों में लोगों की जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है। भोजन और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर है।

बाढ़ का पानी कम होने के बाद नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद सड़क, पुल और मकानों की मरम्मत का काम शुरू होगा।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन ने लोगों से नदी और नालों के पास नहीं जाने की अपील की है।

इसके अलावा पानी से भरी सड़कों पर वाहन चलाने से बचना चाहिए। तेज बहाव वाली जगहों को पार करने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए।

अगर किसी इलाके में पानी तेजी से बढ़ रहा है, तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाना जरूरी है। आपात स्थिति में प्रशासन और राहत टीमों से मदद लेनी चाहिए।

आगे भी जारी रहेगा राहत अभियान

छत्तीसगढ़ में बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। बस्तर, बीजापुर और सुकमा में राहत कार्य जारी हैं।

वहीं, वायुसेना भी जरूरत के अनुसार बचाव अभियान में मदद कर रही है। हेलीकॉप्टर के जरिए उन लोगों तक पहुंच बनाई जा रही है, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है।

बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करना अगली बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए प्रशासन को सड़क, बिजली और अन्य सुविधाओं की भी समीक्षा करनी होगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में बाढ़ ने बस्तर संभाग के कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित किया है। 571 गांवों के 22 हजार से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। करीब 16 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, बस्तर और बीजापुर में वायुसेना की मदद से भी रेस्क्यू किया गया है।

फिलहाल प्रशासन का ध्यान लोगों की सुरक्षा पर है। साथ ही, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने का काम जारी है। आने वाले दिनों में पानी का स्तर और मौसम राहत अभियान के लिए अहम रहेगा।

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