CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! विपक्ष ने तैयार किया ड्राफ्ट, जानें क्या है पूरा मामला
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष एक बार फिर सक्रिय है। ज्ञानेश कुमार महाभियोग प्रस्ताव के लिए विपक्षी दलों की ओर से नया ड्राफ्ट तैयार किए जाने की खबर सामने आई है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित नोटिस में हालिया विवादों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को आधार बनाया जा सकता है। हालांकि, यह अभी प्रस्ताव की तैयारी का चरण है और इसे संसद में स्वीकार किया जाना अलग प्रक्रिया है।
ज्ञानेश कुमार महाभियोग को लेकर क्या है ताजा मामला?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष नए सिरे से हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रस्ताव का ड्राफ्ट कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है।
विपक्ष संसद के दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी में है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे सवालों पर राजनीतिक बहस तेज है।
प्रस्ताव के लिए जरूरी संसदीय समर्थन जुटाना भी महत्वपूर्ण होगा। इसलिए ड्राफ्ट तैयार होना अपने आप में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी होने के बराबर नहीं है।
विवाद की शुरुआत किस मुद्दे से हुई?
हाल में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता सूची के प्रबंधन, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े दूसरे विषय शामिल थे। विपक्ष ने इन्हीं रिपोर्टों को नए प्रस्ताव के लिए महत्वपूर्ण आधारों में शामिल किया है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन घटनाओं को अलग तरीके से पेश किया है। आयोग का कहना है कि लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक विचार-विमर्श किसी बहु-सदस्यीय संस्था की सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
पहले भी आ चुका है ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नोटिस
यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की है। इस साल मार्च में भी दोनों सदनों में उनके खिलाफ नोटिस दिए गए थे।
12 मार्च को राज्यसभा में 63 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस दिया गया था। लोकसभा में दिए गए नोटिस पर 130 सांसदों के हस्ताक्षर होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसके बाद 6 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उस नोटिस को खारिज कर दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, उनका कहना था कि लगाए गए आरोप संविधान के तहत हटाने के लिए जरूरी प्रथम दृष्टया ‘दुराचार’ के आधार को स्थापित नहीं करते।
अप्रैल में फिर दिया गया था नोटिस
24 अप्रैल को राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक और नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्ष अब नए घटनाक्रमों को शामिल करते हुए फिर से प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसलिए आगामी नोटिस पहले के प्रयासों से अलग आधारों और हालिया घटनाओं को शामिल कर सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी पदों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन आधारों पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
इसका मतलब है कि केवल राजनीतिक असहमति या किसी फैसले पर विवाद के आधार पर CEC को सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
नोटिस के लिए कितने सांसदों का समर्थन चाहिए?
CEC को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए संसद में निर्धारित संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
इसके बाद संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी नोटिस को स्वीकार या अस्वीकार करने पर निर्णय लेते हैं। नोटिस स्वीकार होने की स्थिति में आगे जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
जांच समिति की क्या भूमिका होती है?
नोटिस स्वीकार होने के बाद एक विशेष जांच समिति गठित की जाती है। यह समिति लगाए गए आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी को देती है।
यदि समिति आरोपों को सिद्ध दुराचार या अक्षमता के रूप में स्वीकार करती है, तो मामला संसद के सामने आगे बढ़ सकता है। इसके बाद दोनों सदनों में संवैधानिक रूप से निर्धारित विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।
इस पूरी प्रक्रिया से स्पष्ट है कि नोटिस देना और अंतिम रूप से पद से हटाया जाना दो अलग चरण हैं।
विपक्ष का नया कदम किन मुद्दों पर आधारित है?
विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। इनमें SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची के प्रबंधन से जुड़े विवाद प्रमुख हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित तौर पर दर्ज की गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। विपक्ष का कहना है कि इन घटनाओं से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं।
यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये विपक्ष द्वारा लगाए गए राजनीतिक और प्रक्रियागत आरोप हैं। इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने मीडिया रिपोर्टों के बाद अपना पक्ष भी रखा है। आयोग के अनुसार, किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग सुझाव और टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
आयोग ने कहा है कि लिखित टिप्पणियों और तकनीकी सुझावों को अंतिम फैसले पर औपचारिक असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग के अनुसार, उसके सभी आधिकारिक फैसले कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार लिए गए हैं।
इस तरह पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। विपक्ष इन घटनाओं को CEC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला आधार मान रहा है, जबकि चुनाव आयोग इसे आंतरिक विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया बता रहा है।
क्या महाभियोग प्रस्ताव से ज्ञानेश कुमार तुरंत हट जाएंगे?
नहीं। प्रस्ताव तैयार होना या संसद में नोटिस देना अपने आप में CEC को पद से हटाने का फैसला नहीं है।
पहले नोटिस के लिए जरूरी संसदीय समर्थन, फिर पीठासीन अधिकारी का निर्णय और उसके बाद जांच की प्रक्रिया होती है। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही मामला संसद में आगे बढ़ सकता है।
अंतिम रूप से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में संविधान के तहत निर्धारित विशेष बहुमत जरूरी होता है। इसलिए ज्ञानेश कुमार महाभियोग की खबर को फिलहाल प्रस्ताव और प्रक्रिया की तैयारी के रूप में देखना उचित है, न कि पद से हटाए जाने के अंतिम निर्णय के रूप में।
आगे क्या हो सकता है?
विपक्षी दलों की ओर से नए नोटिस को अंतिम रूप देने और सांसदों के समर्थन जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, INDIA ब्लॉक के विभिन्न दल इस मुद्दे पर आपस में चर्चा कर रहे हैं।
नए प्रस्ताव में हालिया रिपोर्टों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को शामिल किए जाने की संभावना है। हालांकि, नोटिस स्वीकार होगा या नहीं, यह संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा।
इसके बाद यदि संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो जांच समिति और संसद की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल अंतिम परिणाम को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।
निष्कर्ष
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एक नए हटाने के प्रस्ताव की तैयारी कर रहा है। ज्ञानेश कुमार महाभियोग से जुड़ा यह मामला हालिया चुनावी प्रक्रिया, SIR और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज बताई गई आपत्तियों के बाद फिर चर्चा में आया है।
हालांकि, प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार होना अंतिम कार्रवाई नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान में तय लंबी और कड़ी संसदीय प्रक्रिया का पालन करना होगा।
फिलहाल विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का जवाब दोनों सार्वजनिक हैं। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि नया नोटिस कब और किस रूप में संसद में पेश होता है और संबंधित सदन उस पर क्या निर्णय लेता है।

