बिहार विधान परिषद में बड़ा बदलाव: अवधेश नारायण सिंह का इस्तीफा, जेडीयू के राम बच्चन राय बने सभापति
बिहार की राजनीति में सोमवार को विधान परिषद से जुड़ा बड़ा बदलाव सामने आया। भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधान परिषद के उपसभापति प्रो. राम बच्चन राय को सौंपा। इसके बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता राम बच्चन राय को परिषद का नया सभापति बनाया गया।
इस बदलाव के साथ बिहार विधान परिषद के सभापति पद की जिम्मेदारी भाजपा से जेडीयू के पास चली गई है। यह घटनाक्रम सत्तारूढ़ एनडीए के भीतर पदों के बंटवारे से जुड़ा बताया जा रहा है। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम में क्या हुआ और इसका क्या मतलब है।
अवधेश नारायण सिंह ने क्यों छोड़ा सभापति पद?
अवधेश नारायण सिंह ने 28 सितंबर 2026 को बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा उपसभापति राम बच्चन राय को सौंपा। इसके साथ ही सभापति का पद रिक्त हो गया था।
अपने त्यागपत्र में अवधेश नारायण सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक और संसदीय सफर का उल्लेख किया। उन्होंने परिषद के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों से मिले सहयोग के लिए आभार जताया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभापति पद से इस्तीफा देने के बाद वह विधान परिषद के सदस्य बने रहेंगे। यानी उनका विधान परिषद से नाता खत्म नहीं हुआ है।
अवधेश नारायण सिंह गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। उन्होंने इससे पहले भी परिषद के सभापति और कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली है।
अब जेडीयू के राम बच्चन राय बने सभापति
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता राम बच्चन राय को बिहार विधान परिषद का नया सभापति बनाया गया है। इससे पहले वह परिषद के उपसभापति की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
राम बच्चन राय लंबे समय से बिहार की राजनीति और विधान परिषद से जुड़े रहे हैं। वह अकादमिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, वह जुलाई 2024 से परिषद के उपसभापति थे और 2021 में राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में आए थे।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद राम बच्चन राय ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिलती है, वह उसे निभाने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने पद मिलने पर आभार भी जताया।
भाजपा और जेडीयू के बीच क्या है पदों का समीकरण?
बिहार विधान परिषद सभापति के बदलाव को एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा और जेडीयू के बीच सदनों के प्रमुख पदों को लेकर सत्ता साझेदारी की व्यवस्था है।
फिलहाल बिहार विधानसभा के अध्यक्ष का पद भाजपा के पास है। प्रेम कुमार विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं, विधान परिषद के सभापति का पद अब जेडीयू के पास आ गया है।
इस व्यवस्था के तहत दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के बीच विधानसभा और विधान परिषद के महत्वपूर्ण पदों का बंटवारा किया गया है। इसलिए अवधेश नारायण सिंह का इस्तीफा और राम बच्चन राय की नियुक्ति इसी राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बताई जा रही है।
हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं हो सकती हैं। आधिकारिक तौर पर सामने आई जानकारी में पदों के बंटवारे और गठबंधन व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
अवधेश नारायण सिंह का राजनीतिक सफर
अवधेश नारायण सिंह बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह लंबे समय से विधान परिषद की राजनीति से जुड़े रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पहली बार 2012 में बिहार विधान परिषद के सभापति का पद संभाला था। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग समय पर सभापति और कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारियां भी निभाईं। जून 2024 में उन्हें फिर सभापति पद की जिम्मेदारी मिली थी।
इस बार उनके इस्तीफे के बाद भी उनका विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्यकाल जारी रहेगा। यानी वह सदन में सदस्य के तौर पर अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
उन्होंने अपने इस्तीफे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई नेताओं के प्रति आभार जताया।
राम बच्चन राय के सामने अब क्या जिम्मेदारियां?
बिहार विधान परिषद के नए सभापति के रूप में राम बच्चन राय के सामने सदन की कार्यवाही को संचालित करने की जिम्मेदारी होगी। सभापति विधान परिषद की कार्यवाही में महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका निभाते हैं।
उनका काम सदन की बैठकों का संचालन करना और संसदीय नियमों के अनुसार कार्यवाही को आगे बढ़ाना होता है। साथ ही, सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कार्यवाही को नियमों के तहत चलाना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
राम बच्चन राय पहले से उपसभापति के पद पर थे। इसलिए परिषद की कार्यप्रणाली से उनका परिचय पहले से रहा है। अब सभापति के रूप में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी पहले की तुलना में बढ़ गई है।
एमएलसी चुनाव से पहले हुआ बदलाव
बिहार विधान परिषद में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम भी सामने आ चुका है। रिपोर्टों के अनुसार इन सीटों पर मतदान 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
इस वजह से सभापति पद में बदलाव को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, सभापति पद का बदलाव और आगामी एमएलसी चुनाव अलग-अलग संवैधानिक एवं चुनावी प्रक्रियाएं हैं।
विधान परिषद में नए सभापति की नियुक्ति के बाद अब सदन की कार्यवाही राम बच्चन राय के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी।
बिहार की राजनीति में क्या बदला?
बिहार विधान परिषद सभापति पद में बदलाव से सदन के शीर्ष पदों का राजनीतिक संतुलन बदल गया है। पहले यह पद भाजपा के पास था। अब इसकी जिम्मेदारी जेडीयू नेता राम बच्चन राय संभाल रहे हैं।
दूसरी ओर, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष का पद भाजपा के पास बना हुआ है। इस तरह विधानसभा और विधान परिषद के दोनों प्रमुख पद अलग-अलग सहयोगी दलों के पास हैं।
यह व्यवस्था बिहार में एनडीए के भीतर सत्ता साझेदारी की तस्वीर को भी सामने रखती है। हालांकि, इससे सरकार की नीतियों या गठबंधन के भविष्य को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
अब बिहार विधान परिषद की कार्यवाही नए सभापति राम बच्चन राय के नेतृत्व में चलेगी। वहीं, अवधेश नारायण सिंह विधान परिषद के सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक भूमिका जारी रखेंगे।
आने वाले समय में विधान परिषद की बैठकों और आगामी एमएलसी चुनाव के दौरान नए सभापति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। खासकर चुनावी प्रक्रिया के दौरान सदन से जुड़े कामकाज पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बिहार विधान परिषद सभापति पद पर बड़ा बदलाव हो चुका है। अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद जेडीयू के राम बच्चन राय ने इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाल ली है।
निष्कर्ष
बिहार विधान परिषद में हुए इस बदलाव से सभापति पद भाजपा से जेडीयू के पास चला गया है। अवधेश नारायण सिंह ने 28 सितंबर को इस्तीफा दिया और इसके बाद राम बच्चन राय को नया सभापति बनाया गया।
यह बदलाव एनडीए के भीतर विधानसभा और विधान परिषद के प्रमुख पदों के बंटवारे से जुड़ा है। अब राम बच्चन राय के सामने सदन की कार्यवाही को नियमों के अनुसार संचालित करने की जिम्मेदारी होगी। वहीं, अवधेश नारायण सिंह सदस्य के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे।

