असम में बड़ा खुलासा: पाकिस्तान को सीक्रेट जानकारी भेजने के आरोप में सेना का रिटायर्ड जवान समेत 2 गिरफ्तार
असम में कथित जासूसी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने पाकिस्तान को सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार लोगों में सेना का एक रिटायर्ड जवान भी शामिल है। वह रिटायरमेंट के बाद अनुबंध के आधार पर सेना के साथ काम कर रहा था।
असम जासूसी मामले में दो लोग गिरफ्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर हुई।
आरोप है कि दोनों लोग पाकिस्तान के संपर्क में थे। उन्होंने सेना की आवाजाही से जुड़ी जानकारी साझा की थी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, दोनों आरोपियों को आगे की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
एक आरोपी रिटायर्ड सेना जवान
इस मामले में एक आरोपी सेना का रिटायर्ड जवान है। रिटायर होने के बाद भी वह अनुबंध के आधार पर सेना से जुड़ा था।
मुख्यमंत्री के अनुसार, उस पर पाकिस्तान के संपर्क में रहने का आरोप है। वह कथित तौर पर सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा कर रहा था।
रिटायर्ड जवान की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच एजेंसियां उसकी भूमिका की जानकारी जुटा रही हैं।
यह पहलू इसलिए भी अहम है क्योंकि वह रिटायरमेंट के बाद भी सेना से जुड़ा था। ऐसे में जांच एजेंसियां उसके संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।
दूसरे आरोपी का नाम अभिषेक कुमार सिंह
पुलिस ने दूसरे आरोपी की पहचान अभिषेक कुमार सिंह के रूप में की है। वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का रहने वाला है।
अभिषेक की उम्र 31 साल बताई गई है। वह गुवाहाटी में किराये के मकान में रह रहा था।
असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने उसे गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 3 और 4 अक्टूबर की दरम्यानी रात हुई थी।
पुलिस के अनुसार, अभिषेक पर पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव को सुरक्षा बलों से जुड़ी जानकारी देने का आरोप है।
मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिला था शुरुआती इनपुट
इस मामले की शुरुआत तेजपुर स्थित गजराज कोर की मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिले इनपुट से हुई।
इसके बाद असम एसटीएफ ने सोनितपुर पुलिस के साथ मिलकर जानकारी जुटाई। जांच के दौरान अभिषेक की संदिग्ध गतिविधियों का पता चला।
पुलिस ने इसके बाद गुवाहाटी में कार्रवाई की। आरोपी को किराये के मकान से गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई में पुलिस ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान और दस्तावेज भी बरामद किए हैं।
मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिले हैं। कुछ दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
इन सामान की अब जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों का संपर्क किन लोगों से था।
साथ ही, कथित तौर पर कौन-सी जानकारी साझा की गई, इसकी भी जांच होगी। अभी इस जानकारी की पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है।
पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी रहने की बात कही है।
पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव से संपर्क का आरोप
पुलिस की शुरुआती जांच में पाकिस्तान से जुड़े एक खुफिया ऑपरेटिव का नाम सामने आया है। आरोप है कि अभिषेक उसके संपर्क में था।
पुलिस को शक है कि उसके निर्देश पर सुरक्षा बलों से जुड़ी जानकारी साझा की गई। हालांकि, इस जानकारी की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
अभी यह साफ नहीं है कि कितनी जानकारी साझा की गई थी। जांच एजेंसियां इसी सवाल का जवाब तलाश रही हैं।
हनीट्रैप का एंगल भी सामने आया
इस मामले में हनीट्रैप का एंगल भी सामने आया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, शुरुआती जानकारी में दोनों आरोपियों के हनीट्रैप में फंसने की बात सामने आई है।
हनीट्रैप के जरिए किसी व्यक्ति से निजी या भावनात्मक संपर्क बनाया जाता है। इसके बाद उससे संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, इस मामले में हनीट्रैप की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं।
इसलिए फिलहाल इसे जांच का हिस्सा माना जा रहा है। इसे अंतिम तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सेना की गतिविधियों की जानकारी देने का आरोप
मुख्यमंत्री ने बताया कि दोनों आरोपियों पर सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा करने का आरोप है।
इसमें सेना की आवाजाही से संबंधित जानकारी शामिल होने की बात कही गई है। ऐसी जानकारी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हो सकती है।
हालांकि, पुलिस ने अभी यह नहीं बताया है कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी साझा की गई। जांच पूरी होने के बाद ही इसकी तस्वीर साफ होगी।
जांच एजेंसियां यह भी पता करेंगी कि जानकारी किस माध्यम से भेजी गई थी।
केंद्रीय एजेंसियां करेंगी आगे की जांच
असम पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दोनों आरोपियों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाएगा।
केंद्रीय एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच कर सकती हैं। इससे उनके संपर्कों और गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।
इसके अलावा, एजेंसियां यह भी जांच सकती हैं कि इस मामले में और लोग शामिल हैं या नहीं।
अगर किसी बड़े नेटवर्क के संकेत मिलते हैं, तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। हालांकि, अभी ऐसी किसी अतिरिक्त गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से मामला अहम
सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी संवेदनशील होती है। ऐसी जानकारी गलत हाथों तक पहुंचने पर सुरक्षा से जुड़े सवाल उठ सकते हैं।
इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई करती हैं। असम के इस मामले में भी शुरुआती इनपुट मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिलने की बात सामने आई है।
अब जांच का मुख्य फोकस कथित सूचना साझा करने पर रहेगा। साथ ही, पाकिस्तान से जुड़े संपर्कों की भी जांच की जाएगी।
आरोपों की जांच अभी जारी
इस मामले में पुलिस ने गंभीर आरोपों के आधार पर कार्रवाई की है। लेकिन अभी जांच पूरी नहीं हुई है।
इसलिए आरोपियों की भूमिका से जुड़े सभी दावों को जांच के नतीजों के बाद ही अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
फिलहाल पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां सबूत जुटाने में लगी हैं। मोबाइल फोन, सिम कार्ड और दस्तावेजों की जांच से अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में मामले से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।
निष्कर्ष
असम जासूसी मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच तेज हो गई है। पाकिस्तान को कथित तौर पर सेना से जुड़ी जानकारी देने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इनमें एक रिटायर्ड सेना जवान है। दूसरा आरोपी बिहार का रहने वाला अभिषेक कुमार सिंह है। पुलिस के अनुसार, मामले में पाकिस्तान से जुड़े एक खुफिया ऑपरेटिव का संपर्क सामने आया है।
हनीट्रैप के एंगल की भी जांच हो रही है। अब केंद्रीय एजेंसियां पूरे मामले की आगे जांच करेंगी। इससे यह पता चल सकेगा कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी साझा हुई और इसमें और कौन लोग शामिल थे।

