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क्या फिर से लौटेगा कैश का जमाना? 53% UPI यूजर्स बोले—’दुकानदारों ने एक्स्ट्रा चार्ज लगाया तो छोड़ देंगे डिजिटल पेमेंट’

दुकान पर UPI क्यूआर कोड और कैश पेमेंट के बीच सोच में पड़ी महिला उपभोक्ता - News Critic

डिजिटल पेमेंट ने भारत में खरीदारी का तरीका काफी बदल दिया है। अब छोटी दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक QR कोड से भुगतान आम हो चुका है। लेकिन UPI चार्ज को लेकर सामने आए सर्वे ने डिजिटल पेमेंट के भविष्य पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

सर्वे के मुताबिक, अगर दुकानदार बड़े UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क ग्राहकों से वसूलते हैं, तो बड़ी संख्या में लोग दूसरे भुगतान विकल्प अपना सकते हैं। ऐसे में कैश और कार्ड की वापसी की चर्चा तेज हो गई है।

53% UPI यूजर्स ने कही डिजिटल पेमेंट छोड़ने की बात

LocalCircles के अगस्त 2026 के सर्वे में 45 हजार से ज्यादा UPI यूजर्स से राय ली गई। ये लोग देश के 322 जिलों से जुड़े थे।

सर्वे में 53% यूजर्स ने कहा कि अगर दुकानदार बड़े भुगतान पर MDR का खर्च उनसे वसूलते हैं, तो वे UPI से दूर हो सकते हैं। उस समय सवाल 3,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान को लेकर था।

यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि UPI की लोकप्रियता का बड़ा कारण इसका आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क वाला इस्तेमाल रहा है। ऐसे में ग्राहक से अलग से पैसा लेने की स्थिति भुगतान की आदत बदल सकती है।

अब 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर क्या बदलेगा?

15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होना है। यह शुल्क दुकानदार या व्यापारी स्तर पर लागू होगा।

सरकार ने साफ किया है कि इसका बोझ सीधे ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए। 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान और Person-to-Person भुगतान इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

यानी सामान्य छोटी खरीदारी में ग्राहक को UPI इस्तेमाल करने के लिए अलग शुल्क नहीं देना है। विवाद मुख्य रूप से बड़े भुगतान और व्यापारी पर पड़ने वाले MDR को लेकर है।

नए सर्वे में 76% लोग बदल सकते हैं भुगतान का तरीका

अक्टूबर की नई LocalCircles रिपोर्ट में 67 हजार से ज्यादा UPI यूजर्स की राय ली गई। इसमें सवाल पूछा गया कि अगर दुकानदार 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क मांगता है तो ग्राहक क्या करेगा।

इस सवाल के जवाब में केवल 14% लोगों ने कहा कि वे अतिरिक्त रकम देकर UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे। बाकी लोग दूसरे विकल्पों की ओर जाने की बात कह रहे हैं।

यानी अगर दुकानदार ग्राहक से शुल्क मांगते हैं, तो UPI की जगह दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ सकता है।

कैश की ओर लौट सकते हैं 27% ग्राहक

सर्वे में 31,206 लोगों ने बताया कि अतिरिक्त शुल्क लगने पर वे क्या करेंगे। इनमें 27% ने कहा कि वे कैश से भुगतान करेंगे।

वहीं, 26% लोग क्रेडिट कार्ड और 14% डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं। 4% लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS जैसे विकल्प अपना सकते हैं।

इस तरह कैश सबसे बड़ा अकेला विकल्प बनकर सामने आया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश में डिजिटल भुगतान खत्म हो जाएगा। यह बदलाव खास तौर पर बड़े भुगतान तक सीमित रह सकता है।

आगे भी UPI छोड़ने की तैयारी में कई यूजर्स

सर्वे में लोगों से भविष्य की भुगतान आदत को लेकर भी सवाल किया गया। 37,654 जवाबों में 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड को सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने की बात कही।

इतने ही यानी 26% लोगों ने कैश को अपना प्रमुख विकल्प बताया। 13% ने डेबिट कार्ड और 11% ने बैंक ट्रांसफर जैसे माध्यम चुने। वहीं, 20% लोगों ने कहा कि वे अतिरिक्त लागत होने के बावजूद UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे।

इस हिसाब से 76% लोग बड़े भुगतान के लिए UPI से दूसरे विकल्पों की ओर जाने की संभावना जता रहे हैं।

क्या सरकार ग्राहक से UPI चार्ज लेने देगी?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR और ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क एक ही चीज नहीं हैं। MDR व्यापारी स्तर पर लगने वाला शुल्क है।

सरकार का कहना है कि ग्राहक से इसे वसूलने की अनुमति नहीं होगी। वित्त मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि UPI उपयोगकर्ताओं पर सीधे कोई लेनदेन शुल्क नहीं लगाया जा रहा है।

इसके अलावा, बैंकों और संबंधित संस्थाओं के जरिए यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है कि व्यापारी इस लागत को ग्राहक पर न डालें।

दुकानदार भी MDR को लेकर चिंतित

यह मामला केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं है। LocalCircles के एक अलग सर्वे में 32 हजार से ज्यादा कारोबारियों से राय ली गई।

इस सर्वे में केवल 17% कारोबारियों ने कहा कि वे 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.4% MDR वहन करने को तैयार हैं। 41% कारोबारियों ने कहा कि वे कोई MDR नहीं देना चाहते।

ऐसे में व्यापारी और ग्राहक दोनों की चिंताएं सामने आ रही हैं। व्यापारी लागत को लेकर परेशान हैं, जबकि ग्राहक अतिरिक्त भुगतान नहीं करना चाहते।

क्या सच में लौटेगा कैश का जमाना?

सर्वे के आंकड़े कैश की ओर संभावित बदलाव का संकेत जरूर देते हैं। लेकिन इसे पूरे देश में कैश के दौर की वापसी मानना अभी सही नहीं होगा।

UPI रोजमर्रा के छोटे भुगतान में अब काफी मजबूत हो चुका है। 2,000 रुपये तक के भुगतान पर प्रस्तावित MDR लागू नहीं है। इसके अलावा, Person-to-Person भुगतान भी प्रभावित नहीं होंगे।

इसलिए बदलाव का असर मुख्य रूप से बड़े दुकानी भुगतान पर देखने को मिल सकता है। अगर व्यापारी ग्राहक से अतिरिक्त रकम मांगते हैं, तभी कैश और कार्ड की ओर बड़ा बदलाव होने की संभावना बढ़ेगी।

सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती

सरकार के सामने अब दो अहम लक्ष्य हैं। पहला, UPI का डिजिटल ढांचा आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना और दूसरा, ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखना।

सरकारी सूत्रों ने कैश की ओर बड़े पैमाने पर वापसी की आशंकाओं को खारिज किया है। उनका तर्क है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के P2M भुगतान कुल UPI लेनदेन का छोटा हिस्सा हैं।

वहीं, उपभोक्ता सर्वे अलग तस्वीर दिखाते हैं। इससे साफ है कि अतिरिक्त शुल्क की धारणा भी लोगों के भुगतान व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

15 अक्टूबर के बाद क्या होगा?

अब सबसे ज्यादा नजर 15 अक्टूबर 2026 पर है। इसी तारीख से 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र P2M UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होना है।

अगर व्यापारी इस लागत को खुद वहन करते हैं, तो ग्राहकों की भुगतान आदत पर बड़ा असर नहीं पड़ सकता। लेकिन अगर कुछ दुकानदार ग्राहकों से अतिरिक्त पैसा मांगते हैं, तो कैश, क्रेडिट कार्ड और दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ सकता है।

आने वाले दिनों में यह भी अहम होगा कि ग्राहक ऐसे मामलों में कहां शिकायत करते हैं और नियमों को लागू कराने के लिए क्या व्यवस्था सामने आती है।

निष्कर्ष

UPI चार्ज को लेकर सामने आए सर्वे ने डिजिटल पेमेंट को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 53% यूजर्स ने पहले ही बड़े भुगतान पर अतिरिक्त लागत होने पर UPI से दूर जाने की बात कही थी। नए सर्वे में भी 76% लोगों ने बड़े भुगतान के लिए दूसरे विकल्प अपनाने की संभावना जताई है।

फिलहाल सरकार का रुख साफ है कि MDR का सीधा बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए। इसलिए कैश की वापसी कितनी बड़ी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि 15 अक्टूबर के बाद व्यापारी और ग्राहक इस नई व्यवस्था को कैसे अपनाते हैं।

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