पुलिस ने रोका INDIA ब्लॉक का मार्च, राहुल-अखिलेश समेत नेता हिरासत में; EC के खिलाफ 5वें दिन प्रदर्शन
नई दिल्ली में INDIA ब्लॉक मार्च को पुलिस ने मंगलवार को रोक दिया। विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। इस मार्च में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेता शामिल हुए।
प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए हैं। मार्च को नीति आयोग के पास रोकने के बाद नेताओं ने सड़क पर धरना दिया।
इसके बाद पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया। इनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी भी शामिल रहे। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के लगातार पांचवें दिन के आंदोलन का हिस्सा है।
INDIA ब्लॉक मार्च में क्या हुआ?
INDIA ब्लॉक के सांसद मंगलवार सुबह संसद के मकर द्वार पर जुटे। इसके बाद करीब 11 बजे नेताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च शुरू किया। भारी सुरक्षा के बीच सांसद संसद मार्ग से आगे बढ़ रहे थे।
पुलिस ने नीति आयोग कार्यालय के सामने मार्च को रोक दिया। यह जगह आकाशवाणी भवन और चुनाव आयोग कार्यालय के बीच पड़ती है। रास्ता रोके जाने के बाद विपक्षी सांसद सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया।
राहुल गांधी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पुलिस बैरिकेड पर चढ़ते भी नजर आए। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे नेताओं को वहां से हटाया। कई नेताओं को बस में बैठाकर हिरासत में लिया गया।
कौन-कौन से नेता प्रदर्शन में शामिल रहे?
इस मार्च में कांग्रेस के अलावा कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी मौजूद रहे।
टीएमसी की ओर से अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन ने हिस्सा लिया। इसके अलावा एनसीपी-एसपी की सुप्रिया सुले और सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास समेत कई नेता मार्च में शामिल हुए।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
मार्च के दौरान राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में भी इसी मांग को लेकर संदेश दिया।
राहुल गांधी ने पोस्ट में लिखा, “Gyanesh, it’s done bro. Time to resign.” इसके जरिए उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्ष की आपत्ति को फिर सामने रखा।
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता SIR की प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं और इन्हें तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
अखिलेश यादव समेत नेताओं को हिरासत में लिया गया
पुलिस की कार्रवाई के बाद कई बड़े विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी इनमें शामिल रहे। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद नेताओं ने सड़क पर बैठकर विरोध जताया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ समय तक आमना-सामना भी हुआ।
दिल्ली में सुरक्षा पहले से बढ़ा दी गई थी। संसद, विजय चौक और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास कई स्तर के बैरिकेड लगाए गए थे।
चुनाव आयोग के खिलाफ क्यों हो रहा प्रदर्शन?
विपक्ष का मुख्य विरोध मतदाता सूची में किए जा रहे बदलाव और SIR को लेकर है। INDIA ब्लॉक के नेता चुनाव आयोग से प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी तेज कर दी है। नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार ने किसी तरह की गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची की समीक्षा का उद्देश्य गलत और अपात्र नामों को हटाना है।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विस्तृत समीक्षा की प्रक्रिया है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ा है।
विपक्ष का कहना है कि प्रक्रिया में मांगे जा रहे दस्तावेज कई मतदाताओं के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को अधिक सही और भरोसेमंद बनाने की प्रक्रिया बताता है।
इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का भी विपक्ष ने हवाला दिया है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि अदालत की टिप्पणियों से उनके सवाल और मजबूत हुए हैं।
प्रदर्शन के पांचवें दिन बढ़ा सियासी तनाव
INDIA ब्लॉक का यह मार्च अचानक शुरू हुआ आंदोलन नहीं है। विपक्षी दल पिछले कई दिनों से चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ अलग-अलग कार्यक्रम कर रहे हैं।
पिछले पांच दिनों में दिल्ली में इस मुद्दे पर कई प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में एफआईआर और गिरफ्तारियों की जानकारी भी सामने आई है।
इसके अलावा, विपक्षी दलों ने देशभर में आंदोलन बढ़ाने की योजना बनाई है। कांग्रेस के अनुसार, 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर पदयात्राएं और प्रदर्शन भी आयोजित किए जाने हैं।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मार्च से पहले ही नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पुलिस ने कई प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए। चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास भी सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई।
विजय चौक और संसद के आसपास भी पुलिस की अतिरिक्त मौजूदगी रही। इसका असर दिल्ली के कुछ हिस्सों में यातायात पर भी पड़ा।
इस बीच, विपक्षी सांसदों ने कहा कि उनका मार्च शांतिपूर्ण था। उनका उद्देश्य चुनाव आयोग तक जाकर अपनी मांग रखना था। पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया।
बीजेपी और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक तकरार
इस पूरे विवाद ने केंद्र सरकार, बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया है। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
वहीं बीजेपी और सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। चुनाव आयोग ने भी किसी तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से इनकार किया है। इसलिए इस विवाद में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
राजनीतिक टकराव का असर अब संसद के बाहर भी दिखाई दे रहा है। INDIA ब्लॉक लगातार संयुक्त प्रदर्शन कर रहा है। इससे विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश भी साफ नजर आती है।
आगे क्या होगा?
अब नजर विपक्ष के अगले आंदोलन और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर रहेगी। INDIA ब्लॉक ने आने वाले दिनों में भी प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।
साथ ही, SIR से जुड़े मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी। विपक्ष अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की तैयारी में है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रख रहा है।
ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर यह मुद्दा चर्चा में रह सकता है। खासकर मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे भी बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
निष्कर्ष
INDIA ब्लॉक मार्च को दिल्ली पुलिस ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से पहले रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR की प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रहा है। वहीं चुनाव आयोग और सरकार आरोपों को खारिज कर रहे हैं। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक प्रदर्शन के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े बड़े सवालों का मुद्दा बन गया है।

