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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल; नायरा का पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा

कच्चे तेल में उछाल से नायरा पेट्रोल-डीजल महंगा, भोपाल में पेट्रोल 120 के पार – News Critic

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब भारत के निजी ईंधन कारोबार पर दिखने लगा है। नायरा पेट्रोल कीमत में ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं।

नायरा एनर्जी ने 3 अक्टूबर से देशभर में अपने पेट्रोल पंपों पर नई कीमतें लागू कीं। कंपनी के इस फैसले से मध्य प्रदेश में भी पेट्रोल और डीजल महंगा हुआ है। भोपाल में नायरा के पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की कीमत करीब ₹119.81 प्रति लीटर पहुंच गई।

हालांकि, यह बढ़ोतरी नायरा के पंपों पर लागू हुई है। सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल और डीजल के दाम इस समय अलग हैं। 6 अक्टूबर को भोपाल में सामान्य पेट्रोल की कीमत करीब ₹114.57 प्रति लीटर दर्ज हुई।

नायरा पेट्रोल कीमत में ₹5 का इजाफा

नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में सीधे ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही डीजल के दाम भी ₹3 प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं। कंपनी ने यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के बीच लिया है।

कंपनी देशभर में 7,000 से ज्यादा पेट्रोल पंप चलाती है। नई दरें 3 अक्टूबर की सुबह से लागू हुईं। इसका असर अलग-अलग राज्यों में स्थानीय टैक्स और कीमतों के कारण अलग हो सकता है।

मध्य प्रदेश में भी नायरा के ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमत चुकानी पड़ रही है। भोपाल में कंपनी के पंपों पर पेट्रोल ₹119.81 और डीजल ₹102.59 प्रति लीटर तक पहुंच गया।

भोपाल में सरकारी और निजी पंपों का अंतर

भोपाल में पेट्रोल की कीमत को लेकर एक जरूरी अंतर समझना जरूरी है। सरकारी तेल कंपनियों के पंप और नायरा जैसे निजी पंपों की कीमत एक जैसी नहीं है।

6 अक्टूबर को सरकारी तेल कंपनियों के आधार पर भोपाल में पेट्रोल ₹114.57 प्रति लीटर था। वहीं नायरा की बढ़ी दर के बाद उसके पंपों पर कीमत करीब ₹119.81 रही।

इसलिए शहर में पेट्रोल की कीमत पूछते समय यह देखना जरूरी है कि पंप किस कंपनी का है। यही वजह है कि अलग-अलग पंपों पर पेट्रोल के दाम में अंतर दिखाई दे सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

नायरा की कीमत बढ़ाने के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति अहम है। कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज बदलाव ने तेल कंपनियों की लागत बढ़ाई है।

हालांकि, 6 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी भी आई। रॉयटर्स के अनुसार, मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर 99.49 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई भी 1.1 प्रतिशत गिरकर 88.43 डॉलर प्रति बैरल रहा।

इसके बावजूद तेल बाजार में जोखिम बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री रास्तों पर सुरक्षा चिंता के कारण आपूर्ति को लेकर बाजार सतर्क है। ऐसे में कीमतों में तेजी और गिरावट दोनों तेजी से देखने को मिल सकती हैं।

तेल कंपनियों पर क्यों बढ़ा दबाव?

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर तेल कंपनियों की लागत बढ़ती है। लेकिन अगर पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ते, तो कंपनियों का मार्जिन कम हो जाता है।

इक्रा के अनुसार, सितंबर में तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹8 और डीजल पर करीब ₹9 प्रति लीटर का नकारात्मक मार्केटिंग मार्जिन झेलना पड़ा था। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू ईंधन दरों में सीमित बदलाव से कंपनियों पर दबाव बढ़ा।

इसी वजह से निजी ईंधन कंपनियां अपनी कीमतों में बदलाव कर रही हैं। नायरा की ताजा बढ़ोतरी को भी इसी लागत दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

सरकारी कंपनियों ने अभी दाम नहीं बढ़ाए

नायरा की कीमत बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने उसी समय पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए। यही कारण है कि निजी और सरकारी पंपों की कीमत में अंतर बढ़ गया है।

भारत में सरकारी तेल कंपनियों का खुदरा नेटवर्क बहुत बड़ा है। इनके दाम लंबे समय से बड़े बदलाव के बिना चल रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का पूरा असर खुदरा ग्राहकों तक तुरंत नहीं पहुंचा है।

वहीं, निजी कंपनियों के सामने बाजार लागत और खुदरा कीमत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। नायरा का फैसला इसी दबाव का एक उदाहरण है।

पेट्रोल महंगा होने का आम लोगों पर असर

पेट्रोल की कीमत बढ़ने का सीधा असर वाहन चलाने वाले लोगों पर पड़ता है। रोज लंबी दूरी तय करने वाले लोगों का मासिक ईंधन खर्च बढ़ सकता है।

इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की कीमत परिवहन लागत को भी प्रभावित करती है। डीजल महंगा होने पर माल ढुलाई का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर कुछ वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, केवल एक कंपनी के पंप पर हुई बढ़ोतरी से पूरे बाजार की कीमत तय नहीं होती। इसके लिए सरकारी और निजी दोनों कंपनियों के दामों को देखना जरूरी है।

डीजल ₹3 महंगा होने से क्या बदलेगा?

नायरा ने डीजल की कीमत में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। डीजल का इस्तेमाल निजी वाहनों के अलावा माल ढुलाई और कई व्यावसायिक गतिविधियों में होता है।

इसलिए डीजल की कीमत में बदलाव का असर पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा व्यापक हो सकता है। ट्रक, बस और दूसरे व्यावसायिक वाहनों का खर्च बढ़ने पर परिवहन क्षेत्र पर दबाव आता है।

हालांकि, इसका वास्तविक असर स्थानीय बाजार, वाहन के इस्तेमाल और दूरी पर निर्भर करेगा। हर उपभोक्ता पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा।

क्या आगे और बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि आने वाले दिनों में सभी कंपनियां पेट्रोल-डीजल महंगा करेंगी। कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल, रुपये की विनिमय दर और घरेलू लागत जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक, G7 देशों ने आपात भंडार से 10 करोड़ बैरल कच्चे तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई है। इससे आपूर्ति की चिंता कुछ कम हुई है।

इसके बावजूद पश्चिम एशिया में जारी तनाव बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। इसलिए आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर रहेगी।

भोपाल के वाहन चालकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

भोपाल में वाहन चालकों को पेट्रोल भरवाने से पहले पंप की कंपनी और लागू कीमत जरूर देखनी चाहिए। नायरा और सरकारी तेल कंपनियों के दाम इस समय अलग हैं।

इसके अलावा, रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोग ईंधन खर्च का हिसाब नए दाम के अनुसार कर सकते हैं। इससे महीने के बजट पर बढ़ी कीमत का असर समझना आसान होगा।

वहीं, वाहन चलाते समय ईंधन की बचत पर ध्यान देना भी उपयोगी रहेगा। सही टायर प्रेशर, नियमित सर्विस और अनावश्यक तेज रफ्तार से बचने से खपत कम की जा सकती है।

आगे क्या होगा?

अब नजर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू ईंधन बाजार पर रहेगी। अगर वैश्विक कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो तेल कंपनियों पर खुदरा कीमतों में बदलाव का दबाव बना रह सकता है।

फिलहाल नायरा की बढ़ोतरी निजी ईंधन बाजार में बड़ा बदलाव है। सरकारी कंपनियों के दाम स्थिर रहने से दोनों के बीच कीमत का अंतर भी महत्वपूर्ण हो गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कच्चे तेल की कीमत किस दिशा में जाती है। इसी आधार पर कंपनियों की अगली कीमत रणनीति भी तय हो सकती है।

निष्कर्ष

नायरा पेट्रोल कीमत में ₹5 और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की ऊंची लागत के बीच लिया है।

भोपाल में नायरा के पंपों पर पेट्रोल करीब ₹119.81 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर 6 अक्टूबर को पेट्रोल करीब ₹114.57 प्रति लीटर था। इसलिए उपभोक्ताओं को पंप की कंपनी देखकर कीमत की जानकारी लेनी चाहिए।

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