भोपाल में अवैध फिनाइल फैक्ट्रियां सील, भारी मात्रा में खतरनाक रसायन जब्त
भोपाल में अवैध फिनाइल फैक्ट्रियां संचालित होने का मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने अवधपुरी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की है। निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने दो फिनाइल बनाने वाली इकाइयों को सील कर दिया। दोनों फैक्ट्रियां करीब चार साल से संचालित होने की बात सामने आई है।
कार्रवाई के दौरान परिसर में बड़ी मात्रा में रसायन, ड्रम और फिनाइल से भरी छोटी-बड़ी बोतलें मिलीं। अधिकारियों के मुताबिक इतनी मात्रा में रसायन रखने से आग का खतरा बढ़ सकता था। निगम ने जरूरी दस्तावेज और अनुमति नहीं मिलने के बाद यह कार्रवाई की।
अवधपुरी में दो फिनाइल फैक्ट्रियों पर कार्रवाई
नगर निगम की टीम ने मंगलवार को अवधपुरी क्षेत्र में स्थित दो इकाइयों की जांच की। ये दोनों इकाइयां न्यू भारत ट्रेडर्स के नाम से संचालित हो रही थीं। निगम के अनुसार, यहां फिनाइल तैयार करने और रखने का काम किया जा रहा था।
जांच के दौरान टीम को परिसर में बड़ी संख्या में ड्रम मिले। इनमें रसायन और फिनाइल रखा हुआ था। इसके अलावा कई छोटी-बड़ी बोतलों में भी तैयार फिनाइल मिला।
नगर निगम की कार्रवाई केवल कारोबार बंद कराने तक सीमित नहीं रही। टीम ने दोनों परिसरों को सील भी कर दिया। इसके साथ ही वहां चल रही गतिविधियों को तत्काल बंद कराया गया।
चार साल से चल रही थीं इकाइयां
नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों फैक्ट्रियां करीब चार साल से चल रही थीं। इस दौरान वहां फिनाइल बनाने और उसका भंडारण किया जा रहा था।
अधिकारियों ने जांच के दौरान संचालक से जरूरी दस्तावेज मांगे। इनमें भवन निर्माण और भवन के उपयोग से संबंधित अनुमति भी शामिल थी। निर्धारित समय में संतोषजनक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
इसके बाद निगम ने नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक पहले नोटिस देकर जरूरी कागजात पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
बड़ी मात्रा में मिला रसायन और फिनाइल
कार्रवाई के दौरान निगम की टीम को परिसर में काफी मात्रा में रसायन मिला। कई ड्रमों में सामग्री रखी थी। इसके अलावा फिनाइल से भरी छोटी और बड़ी बोतलें भी मौके पर मिलीं।
अधिकारियों ने रसायन के भंडारण को गंभीरता से लिया। उनका कहना था कि इतनी मात्रा में रसायन रखने से आग लगने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बिना जरूरी अनुमति के इस तरह की गतिविधि चलाना चिंता का विषय बन गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बरामद रसायनों की सटीक मात्रा या उनके नाम की विस्तृत सूची सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में किसी विशेष रसायन को खतरनाक बताना उचित नहीं होगा। निगम ने फिलहाल अनुमति और भवन उपयोग से जुड़े उल्लंघन को कार्रवाई का आधार बताया है।
पहले नोटिस, फिर हुई सीलिंग की कार्रवाई
नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने कार्रवाई से पहले फैक्ट्री संचालक को नोटिस जारी किया था। नोटिस में आवश्यक दस्तावेज और भवन उपयोग से जुड़ी अनुमति पेश करने को कहा गया था।
निगम के अनुसार, तय समय में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद भी फैक्ट्री की गतिविधियां जारी रहीं। इसी वजह से निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर संचालन बंद कराया।
इसके बाद दोनों इकाइयों को सील कर दिया गया। निगम ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियमों के तहत की गई है। मामला केवल फिनाइल निर्माण तक सीमित नहीं था। भवन के उपयोग और जरूरी अनुमति का सवाल भी इसमें शामिल था।
न्यू भारत ट्रेडर्स के नाम से चल रहा था कारोबार
दोनों इकाइयां न्यू भारत ट्रेडर्स के नाम से संचालित होने की जानकारी सामने आई है। निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
जांच में आवश्यक अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। इसके बाद निगम ने कार्रवाई आगे बढ़ाई। अधिकारियों ने पहले से जारी नोटिस का भी हवाला दिया।
इस पूरी कार्रवाई के बाद अब दोनों परिसरों में गतिविधियां बंद रहेंगी। बिना सक्षम अनुमति के सील किए गए परिसर को दोबारा खोलना नियमों के तहत कार्रवाई को जन्म दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल में बढ़ी सख्ती
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रही अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। अदालत के निर्देशों के बाद नगर निगम ने शहर में ऐसे प्रतिष्ठानों की पहचान और कार्रवाई तेज की है।
अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में कार्रवाई को लेकर सख्त रुख दिखाया था। इसके बाद नगर निगम ने बड़ी संख्या में संपत्तियों को जांच के दायरे में लिया।
सितंबर में भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों का भू-उपयोग स्पष्ट रूप से आवासीय है, वहां अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई जारी रह सकती है। वहीं मिश्रित भू-उपयोग वाले क्षेत्रों की स्थिति अलग हो सकती है।
हजारों संपत्तियां जांच के दायरे में
नगर निगम के सर्वे में भोपाल में 62,500 से अधिक ऐसी संपत्तियों की पहचान की गई थी, जहां आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई। इसके बाद बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए।
कार्रवाई के दायरे में दुकान, होटल, रेस्टोरेंट, शोरूम, क्लीनिक और अन्य कारोबारी गतिविधियां शामिल हैं। नगर निगम ने अलग-अलग इलाकों में जांच और सीलिंग अभियान चलाया है।
अवधपुरी की दोनों फिनाइल फैक्ट्रियों पर हुई कार्रवाई इसी व्यापक अभियान के बीच हुई है। हालांकि, इन दोनों इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई में भवन अनुमति और उपयोग से जुड़े नियम भी प्रमुख आधार रहे हैं।
नगर निगम ने किस नियम के तहत कार्रवाई की?
नगर निगम के अनुसार, दोनों फैक्ट्रियों पर नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 303(1) और लागू भवन निर्माण नियमों के तहत कार्रवाई की गई।
इस प्रावधान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों को बंद कराने की कार्रवाई की जा सकती है। यहां निगम ने पहले दस्तावेज और अनुमति मांगी थी। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने के बाद फैक्ट्रियों को सील किया गया।
इससे यह भी साफ होता है कि कार्रवाई केवल सुप्रीम कोर्ट के व्यापक निर्देशों के संदर्भ में नहीं थी। स्थानीय स्तर पर भवन उपयोग और अनुमति से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी था।
आगे क्या होगा?
दोनों फैक्ट्रियां सील होने के बाद अब संचालक के लिए अगला कदम संबंधित विभाग से जुड़ा होगा। यदि परिसर को दोबारा इस्तेमाल करना है, तो आवश्यक अनुमति और दस्तावेज की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
वहीं नगर निगम की ओर से आगे भी ऐसे मामलों की जांच जारी रहने की संभावना है। खासकर उन जगहों पर नजर रखी जा रही है, जहां आवासीय या अनधिकृत परिसरों में कारोबारी गतिविधियां चल रही हैं।
इसके अलावा, जहां रसायनों का भंडारण किया जाता है, वहां सुरक्षा नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण है। किसी भी कारोबारी इकाई को अपने परिसर के उपयोग और संचालन से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है।
कार्रवाई से क्या संदेश गया?
अवधपुरी की घटना ने एक बार फिर शहर में अनधिकृत कारोबारी गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर ऐसे परिसरों में जहां बड़ी मात्रा में रसायन या अन्य सामग्री रखी जाती है, वहां नियमों की अनदेखी जोखिम बढ़ा सकती है।
वहीं नगर निगम की कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि नोटिस के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच स्थानीय प्रशासन भी ऐसे मामलों में सख्ती दिखा रहा है।
हालांकि, हर मामले में कार्रवाई संबंधित जमीन के उपयोग, भवन अनुमति और उपलब्ध दस्तावेजों की स्थिति के आधार पर होगी। इसलिए किसी भी कारोबारी परिसर को एक ही आधार पर अवैध मानना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष
भोपाल में अवैध फिनाइल फैक्ट्रियां सील किए जाने की कार्रवाई ने शहर में अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों पर चल रही सख्ती को फिर सामने ला दिया है। अवधपुरी में दो इकाइयों में बड़ी मात्रा में रसायन और फिनाइल मिला। जरूरी दस्तावेज और अनुमति नहीं मिलने के बाद निगम ने दोनों परिसरों को सील कर दिया।
फिलहाल, यह कार्रवाई नियमों के पालन और सुरक्षित तरीके से कारोबारी गतिविधियां चलाने पर जोर देती है। आगे भी नगर निगम की जांच में जिन इकाइयों में नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

