भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्राओं का हंगामा: ठंडी चाय और अवैध वसूली के आरोप, साइंस टीचर का तत्काल ट्रांसफर
भोपाल सरकारी स्कूल में हंगामा सोमवार को उस समय बढ़ गया, जब मिसरोद के नवीन शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र-छात्राएं विरोध पर उतर आए। विद्यार्थियों ने विज्ञान शिक्षिका बबीता कुशवाह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए।
छात्रों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने, फेल करने की धमकी देने और स्कूल में काम कराने के आरोप लगाए। मामला बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षिका का दूसरे स्कूल में तबादला कर दिया। साथ ही आरोपों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
मिसरोद के सरकारी स्कूल में क्यों हुआ प्रदर्शन?
यह मामला भोपाल के मिसरोद क्षेत्र में स्थित नवीन शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल का है। सोमवार को 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया।
छात्रों ने शिक्षिका पर कई तरह के आरोप लगाए। उनका कहना था कि उन्हें पढ़ाई के बजाय स्कूल से जुड़े कई काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।
विद्यार्थियों के मुताबिक, भर्ती परीक्षाओं के दौरान उनसे बेंच लगाने, परिसर की सफाई और रोल नंबर लिखने जैसे काम कराए जाते थे। छात्रों ने यह भी दावा किया कि उन्हें रविवार को भी ऐसे कामों के लिए स्कूल बुलाया जाता था।
छात्रों ने प्राचार्य को पहले दी थी शिकायत
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के अनुसार, उन्होंने 3 अक्टूबर को स्कूल के प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। उनका कहना था कि शिकायत के बाद भी तत्काल समाधान नहीं हुआ।
इसके बाद विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षिका को हटाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद छात्रों और स्कूल प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई।
प्रोजेक्ट के नाम पर हर महीने पैसे मांगने का आरोप
विद्यार्थियों ने शिक्षिका पर प्रोजेक्ट के नाम पर हर महीने पैसे मांगने का आरोप लगाया। कुछ रिपोर्टों में छात्रों द्वारा ₹2,500 प्रति माह मांगने की बात कही गई है।
छात्रों का आरोप था कि पैसे नहीं देने पर उन्हें पढ़ाई और परीक्षा को लेकर दबाव का सामना करना पड़ता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षिका विज्ञान विषय चुनने को लेकर आर्थिक स्थिति का हवाला देती थीं।
हालांकि, इन आरोपों की अभी विभागीय जांच चल रही है। इसलिए विद्यार्थियों के आरोपों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी किया गया जिक्र
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इसमें शिक्षक और छात्र के बीच बातचीत होने का दावा किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत में फीस, परीक्षा और पास-फेल से जुड़े मुद्दों का उल्लेख बताया गया है। हालांकि, ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
ऐसे में जांच के दौरान रिकॉर्डिंग की सत्यता और उसके संदर्भ की भी जांच जरूरी होगी। विभाग ने पूरे मामले के सभी पहलुओं की जांच करने की बात कही है।
ठंडी चाय वाले नारे से चर्चा में आया प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने कई नारे लगाए। इनमें “ठंडी चाय गर्म करो, बबीता मैडम शर्म करो” जैसा नारा भी शामिल था।
छात्राओं के हाथों में शिक्षिका के खिलाफ लिखे पोस्टर भी दिखाई दिए। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों के जरिए प्रदर्शन की तस्वीरें और नारे चर्चा में आए।
हालांकि, प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा केवल नारे नहीं था। विद्यार्थियों की मांग थी कि लगाए गए आरोपों की जांच हो और उन्हें पढ़ाई का सुरक्षित माहौल मिले।
मारपीट और जबरन काम कराने के भी आरोप
विद्यार्थियों ने शिक्षिका पर मारपीट से जुड़े आरोप भी लगाए। कुछ छात्रों ने दावा किया कि वरिष्ठ विद्यार्थियों के साथ लोहे के पाइप से मारपीट की गई।
इसके अलावा, छात्रों ने आरोप लगाया कि उनसे स्कूल की सफाई और अन्य काम करवाए जाते थे। कुछ विद्यार्थियों ने इसे पढ़ाई के बजाय कर्मचारियों की तरह काम कराने जैसा बताया।
दूसरी ओर, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। शिक्षा विभाग ने इन्हीं गंभीर आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं।
रविवार को भी बुलाने का दावा
विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें छुट्टी के दिन भी स्कूल बुलाया जाता था। उनसे बेंच लगाने और परिसर की सफाई जैसे काम कराए जाते थे।
छात्रों ने कहा कि वे स्कूल में पढ़ाई करने आते हैं। इसलिए उनसे ऐसे काम कराना उचित नहीं है।
वहीं, शिक्षा विभाग की जांच में यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच में शिकायत, रिकॉर्डिंग और संबंधित लोगों के बयान अहम हो सकते हैं।
चार घंटे चला विरोध, पुलिस ने संभाला मामला
प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद मिसरोद थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने छात्रों और स्कूल प्रबंधन के बीच बातचीत कराने में भूमिका निभाई।
करीब चार घंटे तक बातचीत चली। इसके बाद विद्यार्थियों को कार्रवाई का भरोसा दिया गया और वे दोपहर करीब 2 बजे अपनी कक्षाओं में लौट गए।
इस दौरान प्रशासन ने छात्रों को मामले की जांच का आश्वासन दिया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई।
वहीं, शिक्षा विभाग ने तत्काल स्तर पर शिक्षिका को दूसरे स्कूल भेजने का फैसला लिया। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए दूसरे शिक्षक की व्यवस्था भी की गई।
साइंस टीचर का दूसरे स्कूल में ट्रांसफर
जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य के अनुसार, संबंधित शिक्षिका का दूसरे स्कूल में तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह नए फिजिक्स शिक्षक की नियुक्ति की गई है।
दूसरी रिपोर्टों के अनुसार, बबीता कुशवाह का तबादला बागरोदा हायर सेकेंडरी स्कूल किया गया है। वहीं बागरोदा की शिक्षिका रेनुका श्रीवास्तव को मिसरोद स्कूल भेजा गया है।
अधिकारी ने कहा कि शिक्षिका पर लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। विभाग ने जांच को दो दिन में पूरा करने की बात कही है।
जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
शिक्षिका ने सभी आरोपों को बताया गलत
वहीं, शिक्षिका बबीता कुशवाह ने छात्रों के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने पैसे मांगने, पास-फेल के लिए दबाव बनाने और छात्रों से काम कराने के आरोपों से इनकार किया।
शिक्षिका के अनुसार, वह 1999 से अध्यापन कार्य कर रही हैं। वह 2010 से इस स्कूल में पदस्थ थीं।
उन्होंने कहा कि फिजिक्स में बेहतर परिणाम के लिए वह छात्रों के साथ सख्ती करती थीं। उनके मुताबिक, सख्ती को गलत तरीके से पेश किया गया है।
इसलिए मामले में दोनों पक्षों की बात सामने आ चुकी है। अब विभागीय जांच से यह पता चलेगा कि विद्यार्थियों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
स्कूल की पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा?
विवाद के बीच शिक्षा विभाग ने छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए नए फिजिक्स शिक्षक की व्यवस्था की है। इससे विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से बचाने की कोशिश की गई है।
नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना 1962 में हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में करीब 37 स्टाफ सदस्य हैं।
ऐसे में विभाग के सामने अब दो अहम जिम्मेदारियां हैं। पहली, छात्रों की पढ़ाई नियमित रखना और दूसरी, शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना।
जांच में किन बिंदुओं पर ध्यान रहेगा?
मामले की जांच में कई पहलुओं को देखा जा सकता है। इनमें छात्रों की लिखित शिकायत, लगाए गए आर्थिक आरोप और काम कराने से जुड़े दावे शामिल हैं।
इसके अलावा, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और संबंधित शिक्षिका का पक्ष भी जांच का हिस्सा होगा। छात्रों और स्कूल प्रबंधन के बयान भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
फिलहाल, विभाग ने आरोपों को अंतिम रूप से सही नहीं माना है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई का आधार तय होगा।
निष्कर्ष
भोपाल सरकारी स्कूल में हंगामा छात्रों की शिकायतों के बाद सामने आया। विद्यार्थियों ने विज्ञान शिक्षिका पर पैसे मांगने, धमकी देने, मारपीट और स्कूल के काम कराने जैसे आरोप लगाए। शिक्षा विभाग ने तत्काल शिक्षिका का तबादला किया और जांच के आदेश दिए।
दूसरी ओर, शिक्षिका ने सभी आरोपों को गलत बताया है। अब विभागीय जांच की रिपोर्ट से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए नए फिजिक्स शिक्षक की व्यवस्था कर दी गई है।

