MP में पटवारियों का बड़ा आंदोलन: 52 पटवारियों पर गिरी गाज, विरोध में आज से ऑनलाइन राजस्व काम पूरी तरह बंद!
मध्य प्रदेश में MP पटवारी आंदोलन अब तेज हो गया है। स्वामित्व योजना से जुड़े काम को लेकर पटवारियों और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। गुना में चार पटवारियों के निलंबन और 52 पटवारियों को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके विरोध में पटवारी संघ ने 7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व काम से अलग रहने का फैसला किया है। पटवारियों ने सरकारी व्हाट्सऐप समूहों से भी बाहर होने का निर्णय लिया है। ऐसे में नामांतरण और दूसरे ऑनलाइन राजस्व काम प्रभावित होने की आशंका है।
MP पटवारी आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
यह पूरा विवाद स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और रजिस्ट्री का काम किया जा रहा है।
पटवारी संघ का कहना है कि योजना में पटवारियों को दी गई जिम्मेदारियों को लेकर कई व्यावहारिक और कानूनी सवाल हैं। संघ का दावा है कि इन समस्याओं की जानकारी पहले ही अधिकारियों को दी जा चुकी है।
वहीं, प्रशासन का पक्ष अलग है। प्रशासन ने कुछ मामलों में काम में लापरवाही और अपेक्षित प्रगति नहीं होने को कार्रवाई का आधार बताया है। देवास में तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त होने के बाद विवाद और बढ़ गया।
देवास की कार्रवाई बनी विवाद की वजह
देवास में तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों को सेवा से हटाने की कार्रवाई सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार इन पटवारियों को स्वामित्व योजना के काम में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने के आरोप में पहले नोटिस दिए गए थे।
इसके बाद कार्रवाई होने पर पटवारी संघ ने विरोध तेज कर दिया। बुधवार को देवास में एक हजार से अधिक पटवारियों के जुटने की जानकारी भी सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने सेवा समाप्ति और दूसरी दंडात्मक कार्रवाइयां वापस लेने की मांग की।
गुना में 52 पटवारियों को नोटिस
गुना में विवाद ने नया मोड़ तब लिया, जब चार पटवारियों के निलंबन की जानकारी सामने आई। साथ ही, पटवारी संघ के अनुसार जिले के सभी 52 पटवारियों को सेवा समाप्ति से जुड़े नोटिस दिए गए हैं।
प्रशासन की ओर से कार्रवाई को योजना के काम में कथित लापरवाही और निर्देशों के पालन से जोड़ा गया है। वहीं, पटवारी संघ का कहना है कि कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
गुना के मामले में चार पटवारियों के निलंबन की जानकारी भी सामने आई है। संघ का कहना है कि नोटिस और निलंबन की कार्रवाई के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है।
कई जिलों में पटवारियों पर कार्रवाई
विवाद केवल गुना और देवास तक सीमित नहीं रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में मध्य प्रदेश के कई जिलों में पटवारियों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
रायसेन में छह पटवारियों के निलंबन की बात सामने आई है। वहीं, देवास और आगर-मालवा में कुल नौ परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त होने की रिपोर्ट सामने आई है।
इसके अलावा, अलग-अलग जिलों में करीब 200 से 250 परिवीक्षाधीन पटवारियों को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में है। हालांकि, अलग-अलग जिलों के आंकड़े और कार्रवाई की स्थिति अलग हो सकती है।
आज से ऑनलाइन राजस्व काम से दूरी
पटवारी संघ ने कार्रवाई के विरोध में प्रदेशव्यापी कदम उठाया है। संगठन के अनुसार 7 अक्टूबर से पटवारी ऑनलाइन राजस्व कार्यों से अलग रहेंगे।
इसके साथ ही सरकारी व्हाट्सऐप और दूसरे आधिकारिक समूहों से बाहर रहने का फैसला भी लिया गया है। संघ का कहना है कि यह विरोध दंडात्मक कार्रवाई वापस होने तक जारी रहेगा।
इस फैसले का असर राजस्व विभाग से जुड़े डिजिटल काम पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर जिलेवार प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था और आंदोलन की अवधि पर निर्भर करेगा।
किन कामों पर पड़ सकता है असर?
पटवारियों के ऑनलाइन काम से अलग रहने पर कई राजस्व सेवाओं की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इनमें जमीन के रिकॉर्ड और संबंधित डिजिटल कार्य शामिल हैं।
संभावित असर वाले कामों में शामिल हैं:
- ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े काम
- जमीन के नामांतरण से जुड़े कार्य
- स्वामित्व योजना की प्रगति से जुड़े काम
- भूमि अभिलेखों के अपडेट से संबंधित प्रक्रिया
- प्रशासन को भेजी जाने वाली ऑनलाइन राजस्व रिपोर्ट
हालांकि, सभी सेवाएं पूरी तरह बंद होंगी या नहीं, यह संबंधित विभाग की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। इसलिए हर ऑनलाइन राजस्व सेवा को पूरी तरह बंद मानना सही नहीं होगा।
स्वामित्व योजना में क्या है विवाद?
पटवारी संघ की मुख्य आपत्ति स्वामित्व योजना में उनकी भूमिका को लेकर है। संघ का कहना है कि पटवारियों को संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों में निष्पादक की भूमिका देना भविष्य में कानूनी जिम्मेदारी बढ़ा सकता है।
संघ के अनुसार पटवारी जमीन के मालिक या टाइटल होल्डर नहीं होते। ऐसे में स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में जिम्मेदारी तय करने को लेकर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
दूसरी ओर, सरकार इस योजना को ग्रामीण संपत्तियों के रिकॉर्ड और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मान रही है। इसलिए प्रशासन योजना के तय लक्ष्यों को पूरा करने पर जोर दे रहा है।
पटवारी संघ ने क्या मांग रखी है?
पटवारी संघ ने अलग-अलग जिलों में ज्ञापन देकर कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। संगठन चाहता है कि सेवा समाप्ति, निलंबन और नोटिस से जुड़े मामलों पर दोबारा विचार किया जाए।
इसके अलावा, संघ ने योजना से जुड़ी कानूनी और व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि मैदानी स्तर की दिक्कतों को समझने के बाद जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
देवास में प्रदर्शन के दौरान भी पटवारियों ने कार्रवाई वापस लेने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग के नाम ज्ञापन सौंपने की जानकारी दी।
इंदौर में 320 पटवारियों ने छोड़े सरकारी ग्रुप
इंदौर में भी आंदोलन का असर दिखाई दिया है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 320 पटवारियों ने सरकारी व्हाट्सऐप समूह छोड़कर विरोध दर्ज कराया।
पटवारियों ने ऑनलाइन राजस्व काम से दूरी बनाने की बात भी कही है। उनका विरोध स्वामित्व योजना में निष्पादक अधिकारी की भूमिका को लेकर बताया गया है।
इस बीच, प्रदेश के दूसरे जिलों में भी ज्ञापन और प्रदर्शन की गतिविधियां सामने आई हैं। ऐसे में विवाद अब केवल किसी एक जिले की कार्रवाई तक सीमित नहीं दिख रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे अहम सवाल यह है कि सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से समाधान निकलता है या नहीं। फिलहाल संघ ने दंडात्मक कार्रवाई वापस होने तक विरोध जारी रखने की बात कही है।
दूसरी ओर, प्रशासन के सामने स्वामित्व योजना से जुड़े काम को तय समय में आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। इसलिए आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के रुख पर नजर रहेगी।
यदि ऑनलाइन राजस्व काम से दूरी लंबी चलती है, तो इसका असर आम लोगों से जुड़े कुछ राजस्व कार्यों पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका स्तर जिलेवार प्रशासन की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में MP पटवारी आंदोलन अब व्यापक विरोध का रूप ले चुका है। गुना में 52 पटवारियों को नोटिस, चार के निलंबन और दूसरे जिलों में कार्रवाई के बाद पटवारी संघ ने ऑनलाइन राजस्व काम से दूरी बनाई है।
वहीं, देवास में तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त होने के बाद विवाद और गहरा गया है। अब सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से ही आगे की स्थिति साफ होगी। फिलहाल, आंदोलन के चलते राजस्व से जुड़े ऑनलाइन कामकाज पर असर पड़ने की संभावना बनी हुई है।

