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बेंगलुरु में वोट चोरी के आरोपों पर प्रदर्शन, प्रकाश राज और ध्रुव राठी भी हुए शामिल

वोट चोरी के आरोप पर बेंगलुरु में CJP का चप्पल प्रोटेस्ट, प्रकाश राज और ध्रुव राठी - News Critic

बेंगलुरु में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर 8 अक्टूबर 2026 को बड़ा प्रदर्शन हुआ। फ्रीडम पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम में अभिनेता प्रकाश राज, यूट्यूबर ध्रुव राठी और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को रद्द करने की मांग की। इस दौरान चप्पल दिखाकर विरोध जताने की योजना भी चर्चा में रही। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मतदाता सूची में नाम हटने से लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

क्या है बेंगलुरु का CJP चप्पल प्रोटेस्ट?

बेंगलुरु CJP चप्पल प्रोटेस्ट मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ चल रहे विरोध का हिस्सा है। इस कार्यक्रम में नागरिक संगठनों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और डिजिटल माध्यमों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

प्रदर्शन का एक अहम हिस्सा ‘जनता न्यायालय’ था। इसमें कर्नाटक के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों ने मतदाता सूची में अपने नाम हटाए जाने या अन्य कथित समस्याओं से जुड़े अनुभव साझा किए। आयोजकों ने प्रभावित होने का दावा करने वाले लोगों की बात सामने रखने पर जोर दिया।

इसके बाद चप्पल दिखाकर विरोध जताने की योजना रखी गई। आयोजकों ने इसे मतदाता सूची से नाम हटने की शिकायत करने वाली महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाने से भी जोड़ा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के आरोपों और किसी नाम को हटाने के आधिकारिक कारणों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

प्रकाश राज ने SIR प्रक्रिया पर क्या कहा?

अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की और कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने का मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है।

प्रकाश राज के अनुसार, मतदान का अधिकार नागरिकों की गरिमा और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया। यह उनका आरोप है, कोई स्थापित तथ्य नहीं।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। साथ ही, जिन नागरिकों के नाम गलत तरीके से हटे हैं, उन्हें अपनी शिकायत रखने और नाम दोबारा जुड़वाने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

ध्रुव राठी ने चुनाव आयोग की जवाबदेही पर उठाए सवाल

यूट्यूबर ध्रुव राठी भी बेंगलुरु के इस प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए। राठी ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है।

उन्होंने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से जुड़े मामलों पर चिंता जताई। उनके भाषण में पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों से संबंधित दावे भी शामिल थे। इन दावों को संबंधित राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर अलग से जांचना जरूरी है।

राठी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन की मांग करना नहीं है। उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं या हटाए गए हैं।

दीपके ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मतदाता सूची की पुरानी स्थिति बहाल करने और SIR प्रक्रिया को वापस लेने की मांग भी रखी।

हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटने के प्रत्येक मामले का कारण अलग हो सकता है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित सूची, आधिकारिक रिकॉर्ड और शिकायतों की स्थिति देखना जरूरी है।

SIR प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?

SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक जांच और अद्यतन करना है। इसमें पात्र मतदाताओं की जानकारी की पुष्टि करने और सूची में मौजूद गलत प्रविष्टियों की पहचान करने का काम किया जाता है।

चुनाव आयोग की ऐसी प्रक्रियाओं में मतदाताओं की सही पहचान और सूची की शुद्धता अहम होती है। वहीं, विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि जांच की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटने का जोखिम भी हो सकता है।

इसी वजह से SIR को लेकर विवाद बढ़ा है। एक तरफ मतदाता सूची को सही रखने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ पात्र नागरिकों का मतदान का अधिकार सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

मतदाता सूची से नाम हटने पर क्या चिंता है?

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से हट गए, जबकि वे खुद को पात्र मतदाता बता रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि उनके जीवित होने के बावजूद रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया गया।

ये शिकायतें गंभीर हैं, लेकिन हर मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है। किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं होना अपने आप में वोट चोरी का प्रमाण नहीं है। यह भी देखना होगा कि नाम क्यों हटाया गया, संबंधित व्यक्ति को सूचना मिली या नहीं और सुधार के लिए क्या प्रक्रिया उपलब्ध है।

यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटता है, तो उसे शिकायत दर्ज करने और नियमों के अनुसार नाम जुड़वाने का अवसर मिलना चाहिए। यही प्रक्रिया मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद कर सकती है।

प्रदर्शन में दिखे पोस्टर और नारे

फ्रीडम पार्क में प्रदर्शनकारियों ने कई पोस्टर दिखाए। इनमें मतदाता सूची से नाम गायब होने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़े संदेश लिखे थे।

कुछ पोस्टरों पर “Error 404 – Name Not Found” और “Don’t erase us, hear us” जैसे नारे दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने “Vote theft” और “Gyanesh Kumar, गद्दी छोड़ो” जैसे नारे भी लगाए।

इन नारों के जरिए प्रदर्शनकारी यह संदेश देना चाहते थे कि मतदाता सूची में नाम हटने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। हालांकि, नारों और राजनीतिक आरोपों से अलग, प्रत्येक मामले का समाधान संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकता है।

दिल्ली में भी आंदोलन तेज करने की तैयारी

बेंगलुरु का प्रदर्शन मतदाता सूची और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर चल रहे व्यापक विरोध का हिस्सा है। इससे पहले नई दिल्ली में भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।

6 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कुछ नेताओं को हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। विपक्ष ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

CJP ने बेंगलुरु के बाद 10 अक्टूबर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन करने की घोषणा की है। आयोजकों की मांग है कि SIR प्रक्रिया पर दोबारा विचार किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें।

चुनाव आयोग की भूमिका और आगे की चुनौती

चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव कराने के साथ विश्वसनीय मतदाता सूची बनाए रखना भी है। इसके लिए सूची में गलत प्रविष्टियों को सुधारना जरूरी है। साथ ही, पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटने की शिकायतों का समय पर समाधान करना भी अहम है।

ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नाम हटाने के कारण स्पष्ट करना, शिकायतों पर कार्रवाई करना और सुधार की प्रक्रिया को आसान बनाना महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है।

दूसरी ओर, किसी संस्था पर लगाए गए आरोपों की जांच ठोस प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की मांग और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष, दोनों को समझना जरूरी है। इससे विवाद से जुड़े तथ्यों और राजनीतिक दावों के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सकता है।

निष्कर्ष

बेंगलुरु CJP चप्पल प्रोटेस्ट में प्रकाश राज, ध्रुव राठी और अभिजीत दीपके की भागीदारी ने मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है।

फिलहाल, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों की जांच तथ्यों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पात्र नागरिकों का मतदान अधिकार सुरक्षित रखना और मतदाता सूची को विश्वसनीय बनाए रखना, दोनों महत्वपूर्ण हैं।

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