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मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के नए राज्यपाल, सीएम धामी ने दी बधाई

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के नए राज्यपाल, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी बधाई - News Critic

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 12 अक्टूबर 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा की। इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में यह खबर चर्चा का विषय बन गई है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. बिसेन को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। उन्होंने उनके राजनीतिक अनुभव और जनसेवा में योगदान का उल्लेख किया। साथ ही, उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

डॉ. बिसेन मध्य प्रदेश में विधायक, सांसद और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। अब वे उत्तराखंड में राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी नियुक्ति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) के स्थान पर हुई है। हालांकि, नई जिम्मेदारी औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने के बाद शुरू होगी।

राष्ट्रपति ने छह राज्यों में किए बदलाव

राष्ट्रपति भवन ने 12 अक्टूबर 2026 को छह राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति और बदलाव से जुड़ी घोषणा जारी की। इस सूची में डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है।

इसके अलावा, अन्य राज्यों में भी नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। कुछ मौजूदा राज्यपालों को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव केंद्र की संवैधानिक नियुक्ति प्रक्रिया के तहत हुआ है।

किन राज्यों में हुई नियुक्तियां?

राष्ट्रपति भवन की घोषणा के अनुसार, छह राज्यों में ये बदलाव किए गए हैं:

  • उत्तराखंड: डॉ. ढाल सिंह बिसेन
  • कर्नाटक: डॉ. सुधा यादव
  • ओडिशा: ब्रज मोहन राम
  • सिक्किम: दुष्यंत गौतम
  • केरलम: ओम प्रकाश माथुर
  • तमिलनाडु: राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर

इन नियुक्तियों के प्रभावी होने की तारीख संबंधित व्यक्तियों के पदभार ग्रहण करने से जुड़ी है। इसलिए घोषणा जारी होने और कार्यभार संभालने को अलग-अलग चरणों के रूप में समझना चाहिए।

गुरमीत सिंह की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी

डॉ. बिसेन उत्तराखंड में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लेंगे। गुरमीत सिंह ने सितंबर 2021 में राज्यपाल पद की शपथ ली थी। अब उनकी जगह डॉ. बिसेन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। वह संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाता है। विधानसभा, विधेयकों और राज्य सरकार से जुड़े कुछ मामलों में भी राज्यपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन?

डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शामिल हैं। उनका जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वे चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े रहे। उन्होंने आयुर्वेद और होम्योपैथी चिकित्सा में भी काम किया है।

उनका राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश की विधानसभा से लेकर लोकसभा तक अपनी भूमिका निभाई। इसके अलावा, राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी काम किया।

चार बार विधायक और एक बार सांसद रहे

डॉ. बिसेन पहली बार 1990 में विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 1993, 1998 और 2003 के विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज की। इस तरह वे चार बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बालाघाट सीट से जीत हासिल की। इसके बाद वे संसद पहुंचे और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को टिकट दिया था।

उनका राजनीतिक अनुभव केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने राज्य सरकार और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं में भी जिम्मेदारियां निभाईं। अब राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका पहले से अलग होगी।

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं

डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने वर्ष 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियां संभालीं। उनके राजनीतिक अनुभव में राज्य प्रशासन और जनप्रतिनिधित्व दोनों शामिल हैं।

इसके अलावा, उन्होंने वर्ष 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई। इस भूमिका में राज्य के वित्तीय मामलों से जुड़े विषय महत्वपूर्ण रहे।

उनकी राजनीतिक यात्रा में संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव शामिल है। हालांकि, राज्यपाल के पद पर रहते हुए उन्हें अपने दायित्व संविधान के अनुसार निभाने होंगे।

चिकित्सा से राजनीति तक का सफर

डॉ. बिसेन की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है, जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र से सार्वजनिक जीवन की ओर कदम बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में अपनी जगह बनाई। धीरे-धीरे वे मध्य प्रदेश की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो गए।

उनका सफर बताता है कि उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। पहले चिकित्सा क्षेत्र, फिर विधानसभा, उसके बाद राज्य सरकार और लोकसभा तक उनका अनुभव फैला रहा।

अब उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उन्हें नई जिम्मेदारी निभानी होगी। इस पद पर उनकी भूमिका राजनीतिक प्रतिनिधि की जगह संवैधानिक प्रमुख की होगी।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने क्या कहा?

डॉ. बिसेन की नियुक्ति पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, जनसेवा के प्रति समर्पण और सार्वजनिक जीवन में योगदान का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने उनके सफल और मंगलमय कार्यकाल की कामना भी की। उन्होंने उम्मीद जताई कि डॉ. बिसेन के अनुभव और मार्गदर्शन से उत्तराखंड के विकास को दिशा मिलेगी।

नियुक्ति पर मध्य प्रदेश में भी चर्चा

डॉ. बिसेन का राजनीतिक आधार मध्य प्रदेश में रहा है। वे सिवनी और बालाघाट क्षेत्र की राजनीति से जुड़े रहे हैं। इसलिए उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी है।

उनके समर्थकों और विभिन्न नेताओं ने नियुक्ति पर शुभकामनाएं दी हैं। वहीं, उत्तराखंड में अब उनके औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने का इंतजार रहेगा।

यह नियुक्ति उनके सार्वजनिक जीवन का नया चरण है। हालांकि, राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां संविधान के तहत तय होंगी।

राज्यपाल की क्या होती हैं जिम्मेदारियां?

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। भारतीय संविधान में इस पद की शक्तियां और जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। राज्यपाल को अपने सभी कार्य संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप करने होते हैं।

उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:

  • मुख्यमंत्री की नियुक्ति सहित निर्धारित संवैधानिक दायित्व निभाना।
  • विधानसभा सत्र बुलाने और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाना।
  • विधानसभा से पारित विधेयकों पर संविधान के अनुसार निर्णय लेना।
  • राज्य सरकार और विधानसभा से जुड़े मामलों में निर्धारित भूमिका निभाना।
  • विशेष संवैधानिक परिस्थितियों में राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजना।

इन जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय राज्यपाल को संविधान और कानून के प्रावधानों का पालन करना होता है। यह पद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आगे क्या होगा?

राष्ट्रपति भवन की घोषणा के अनुसार, डॉ. बिसेन की नियुक्ति उनके कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी। इसलिए उनकी औपचारिक जिम्मेदारी पदभार ग्रहण करने के बाद शुरू होगी।

इसके बाद वे उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में निर्धारित संवैधानिक दायित्व निभाएंगे। राज्य सरकार और विधानसभा से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका संविधान के नियमों के अनुसार होगी।

फिलहाल, उनकी नियुक्ति और मुख्यमंत्री धामी की बधाई इस घटनाक्रम के प्रमुख पहलू हैं। आगे उनके शपथ ग्रहण और कार्यभार संभालने से जुड़ी आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

निष्कर्ष

डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे मध्य प्रदेश में चार बार विधायक, बालाघाट से सांसद और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें बधाई दी।

डॉ. ढाल सिंह बिसेन के लिए यह नई संवैधानिक जिम्मेदारी है। अब उनका कार्य उत्तराखंड में संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्यपाल के दायित्व निभाना होगा। उनकी नियुक्ति औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी।

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