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कैंसर की दवाओं के दाम घटे, ₹80 हजार का इंजेक्शन अब ₹7,150 में मिलेगा

NPPA ने घटाई 543 कैंसर दवाओं की कीमतें, ₹80 हजार का इंजेक्शन अब ₹7 हजार में - News Critic

कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था ने कैंसर रोधी दवाओं के 543 ब्रांड की अधिकतम खुदरा कीमतों में संशोधन किया है। इनमें कुछ दवाओं के दाम हजारों रुपये तक कम हुए हैं। सबसे बड़ी कटौती वाले उदाहरणों में करीब ₹80,072 का इंजेक्शन अब लगभग ₹7,150 में मिलेगा।

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 28 अक्टूबर को संशोधित कीमतों की सूची जारी की। नई दरें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। इस कदम का उद्देश्य दवाओं के वितरण और बिक्री में अत्यधिक व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और कैंसर के इलाज का आर्थिक बोझ कम करना है।

हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव दवा के ब्रांड, उसकी खुराक और पैक के आकार पर निर्भर करेगा। इसलिए मरीजों और उनके परिजनों को खरीदारी से पहले संबंधित दवा की नई अधिकतम खुदरा कीमत जरूर जांचनी चाहिए।

कैंसर के ₹80 हजार के इंजेक्शन की कीमत कितनी हुई?

इस फैसले में सबसे ज्यादा चर्चा थियो टेपा (Thiotepa) 100 एमजी इंजेक्शन के ब्रांड Samtepa की हो रही है। इसकी पुरानी कीमत ₹80,071.86 थी। संशोधित सूची में इसकी कीमत घटाकर ₹7,150.33 कर दी गई है।

इस बदलाव से एक पैक या निर्धारित इकाई पर करीब ₹72,921.53 की कमी आती है। यानी इस विशेष उत्पाद की कीमत में लगभग 91 प्रतिशत की गिरावट हुई है। हालांकि, वास्तविक खर्च मरीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली खुराक और इंजेक्शन की जरूरत पर निर्भर करेगा।

यह समझना भी जरूरी है कि कीमत में इतनी बड़ी कटौती हर कैंसर इंजेक्शन पर लागू नहीं होगी। यह बदलाव एक खास दवा और ब्रांड से संबंधित है। अन्य दवाओं की कीमतें अलग-अलग निर्धारित की गई हैं।

कैंसर के उपचार में दवाओं का खर्च बीमारी के प्रकार, इलाज के चरण और डॉक्टर की सलाह के अनुसार बदलता है। इसलिए मरीज को केवल कीमत देखकर दवा बदलने या उपचार में बदलाव करने का फैसला नहीं लेना चाहिए।

543 ब्रांड की दवाओं की नई कीमतें 9 नवंबर से लागू

NPPA ने 543 कैंसर रोधी दवा ब्रांड की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतें जारी की हैं। यह सूची दवा कंपनियों की ओर से 27 अक्टूबर तक दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। नियामक ने यह भी कहा है कि कंपनियों से नई जानकारी मिलने पर सूची को आगे अपडेट किया जाएगा।

इससे पहले 17 अक्टूबर को सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को तर्कसंगत बनाने का फैसला लिया था। इसके बाद कंपनियों को अपनी दवाओं की संशोधित कीमतें जमा करनी थीं।

इस व्यवस्था के तहत संबंधित दवाओं की बिक्री में व्यापारिक मार्जिन पर नियंत्रण लगाया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वितरण और खुदरा बिक्री के दौरान अत्यधिक मार्जिन के कारण मरीजों को दवाएं महंगी न खरीदनी पड़ें।

नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होने के बाद दवा विक्रेताओं, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को संबंधित उत्पादों की संशोधित कीमत के अनुसार शुल्क लेना होगा। उन्हें नई मूल्य सूची प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इन कैंसर दवाओं के दाम में भी बड़ी कटौती

संशोधित सूची में कई ऐसी दवाएं शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है। कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:

दवा या ब्रांडपुरानी कीमतनई कीमत
Samtepa 100 एमजी इंजेक्शन₹80,071.86₹7,150.33
Anarzole टैबलेट, 10 का पैक₹695.76₹73
Azacytin 100 एमजी इंजेक्शन₹6,337₹1,495.04
Bevacizab 100 एमजी/4 एमएल इंजेक्शन₹21,767.70₹5,930.13
Debrumab 60 एमजी इंजेक्शन₹22,031.25₹5,941
Dasanat 20 एमजी टैबलेट, 60 का पैक₹2,812.50₹1,085.93
Fulbreca इंजेक्शन, 5 एमएल₹26,072.16₹5,491
Fludanox 50 एमजी इंजेक्शन₹14,235₹2,432

ये उदाहरण बताते हैं कि कुछ दवाओं की कीमतों में हजारों रुपये की कमी हुई है। हालांकि, सूची में शामिल हर दवा की कीमत में एक जैसा बदलाव नहीं हुआ है। दवा खरीदते समय नाम, ब्रांड, खुराक और पैक का आकार मिलाना जरूरी है।

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली किन दवाओं पर असर पड़ेगा?

सरकार की इस पहल के दायरे में कई प्रकार की कैंसर रोधी दवाएं शामिल हैं। इनमें कुछ इम्यूनोथेरेपी दवाएं भी हैं, जिनका इस्तेमाल 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है।

इसके अलावा, कुछ दवाओं का इस्तेमाल खास जरूरतों के लिए किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, Denosumab का उपयोग स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के कुछ मरीजों में किया जाता है। Pegfilgrastim का इस्तेमाल कैंसर के उपचार के दौरान न्यूट्रोपीनिया के जोखिम को कम करने के लिए किया जा सकता है। Bevacizumab कुछ परिस्थितियों में कोलन, अंडाशय और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के उपचार में उपयोग की जाती है।

इन दवाओं का इस्तेमाल हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होता। डॉक्टर बीमारी की स्थिति, जांच रिपोर्ट और उपचार योजना के आधार पर दवा तय करते हैं।

कीमत कम होने से उन मरीजों को राहत मिल सकती है, जिन्हें संबंधित दवाओं की जरूरत है। हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि मरीज की निर्धारित दवा नई मूल्य सूची में शामिल है या नहीं और उपचार के दौरान उसकी कितनी मात्रा इस्तेमाल होती है।

दवाओं की कीमत कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

NPPA ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करने के लिए Trade Margin Rationalisation यानी TMR का सहारा लिया है। इसका उद्देश्य दवा की आपूर्ति श्रृंखला में अलग-अलग स्तरों पर लिए जाने वाले मार्जिन को सीमित करना है।

कई बार किसी दवा की अंतिम कीमत में निर्माता के अलावा वितरक और खुदरा विक्रेता के मार्जिन की भी भूमिका होती है। व्यापारिक मार्जिन पर नियंत्रण से कुछ दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत कम हो सकती है।

सरकार ने कंपनियों को उत्पादन और आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। इसका मकसद यह है कि कीमतें घटने के बाद बाजार में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित न हो।

अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों को भी नई दरें लागू करने तथा मूल्य सूची प्रदर्शित करने की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य के औषधि नियंत्रकों को निर्देशों के पालन की निगरानी करनी है। इससे मरीजों को संशोधित कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

मरीज नई कीमत कैसे जांच सकते हैं?

मरीज और उनके परिजन दवा खरीदने से पहले संबंधित ब्रांड की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत की पुष्टि कर सकते हैं। इसके लिए NPPA की आधिकारिक वेबसाइट और Pharma Sahi Daam ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

दवा खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • दवा का पूरा नाम और ब्रांड जांचें।
  • उसकी खुराक और पैक का आकार मिलाएं।
  • 9 नवंबर 2026 से लागू होने वाली संशोधित कीमत देखें।
  • अस्पताल या मेडिकल स्टोर से बिल जरूर लें।
  • यदि पुरानी कीमत से अधिक शुल्क लिया जाता है, तो संबंधित औषधि नियामक से जानकारी लें।

ध्यान रहे कि अधिकतम खुदरा कीमत और वास्तविक इलाज का कुल खर्च अलग-अलग हो सकते हैं। डॉक्टर की फीस, अस्पताल में भर्ती, जांच और अन्य उपचार संबंधी खर्च इस मूल्य संशोधन से अपने आप कम नहीं होते।

निष्कर्ष

कैंसर की दवाओं के दाम घटाने के फैसले से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। NPPA ने 543 ब्रांड की संशोधित कीमतें जारी की हैं, जो 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। Samtepa 100 एमजी इंजेक्शन की कीमत ₹80,071.86 से घटकर ₹7,150.33 हो गई है। वहीं, Azacytin, Bevacizab और अन्य दवाओं की कीमतों में भी उल्लेखनीय कमी की गई है।

हालांकि, हर दवा पर एक जैसी कटौती लागू नहीं होगी। मरीजों को अपनी निर्धारित दवा की नई कीमत आधिकारिक सूची से जांचनी चाहिए। साथ ही, दवा बदलने या उपचार में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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