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45 साल की उम्र पार होने पर नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला

45 साल की उम्र पार होने पर नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला - News Critic

छत्तीसगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट के एक फैसले ने सरकारी नौकरी की उम्मीद कर रहे परिवारों का ध्यान खींचा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में संबंधित विभाग की नीति और निर्धारित पात्रता को महत्वपूर्ण मानता है। हालांकि, हर विभाग के लिए उम्र की सीमा एक जैसी नहीं होती।

फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी से जुड़े एक मामले में 40 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा को लागू माना। वहीं, दूसरे मामले में अदालत ने उम्र तय करने के लिए कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नीति पर विचार करने का निर्देश दिया। इसलिए 45 वर्ष के बाद नियुक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध मानने से पहले संबंधित फैसले और विभागीय नियम समझना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का क्या है फैसला?

13 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ललित कुमार साहू की याचिका पर फैसला सुनाया। यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी की अनुकंपा नियुक्ति नीति से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने अपने पिता की मृत्यु के बाद नौकरी के लिए आवेदन किया था।

याचिकाकर्ता के पिता विद्युत कंपनी में लाइन असिस्टेंट ग्रेड-II के पद पर कार्यरत थे। उनकी 16 अप्रैल 2025 को मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके बेटे ने 30 मई 2025 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

कंपनी ने आवेदन को अधिक उम्र होने के आधार पर अस्वीकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि अन्य सरकारी नियमों के तहत उन्हें आयु में छूट मिलनी चाहिए।

हालांकि, अदालत ने संबंधित विद्युत कंपनी की अपनी नीति को महत्वपूर्ण माना। फैसले में स्पष्ट किया गया कि किसी दूसरे विभाग के सामान्य नियमों को अपने आप कंपनी की अलग नियुक्ति नीति पर लागू नहीं किया जा सकता।

विद्युत कंपनी में कितनी है अधिकतम उम्र?

इस मामले में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के 11 अप्रैल 2018 के परिपत्र का उल्लेख किया गया। इसमें अनुकंपा नियुक्ति के लिए उम्र और पात्रता से जुड़े नियम निर्धारित हैं।

संबंधित नीति के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र 40 वर्ष निर्धारित थी। याचिकाकर्ता अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित थे और उनकी उम्र करीब 42 वर्ष थी।

याचिकाकर्ता ने सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों का हवाला देते हुए पांच साल की छूट की मांग की थी। उनका कहना था कि इस छूट से अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तक हो सकती है।

लेकिन कंपनी की अपनी नीति में अलग प्रावधान थे। अदालत ने माना कि सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों को विद्युत कंपनी की नीति पर लागू करने के लिए स्पष्ट आधार जरूरी है। केवल नियमित भर्ती में मिलने वाली छूट के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति में समान लाभ का दावा नहीं किया जा सकता।

क्या 45 साल के बाद हर विभाग में नियुक्ति बंद है?

इस फैसले को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर ध्यान में रखना चाहिए। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्णय का अर्थ यह नहीं है कि राज्य के हर विभाग में 45 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती।

अनुकंपा नियुक्ति के नियम विभाग, संस्था और लागू योजना के अनुसार अलग हो सकते हैं। कुछ मामलों में सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश लागू होते हैं। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों या अन्य संस्थाओं की अपनी स्वीकृत नीतियां हो सकती हैं।

इसी वजह से किसी उम्मीदवार की पात्रता तय करते समय केवल उम्र देखना पर्याप्त नहीं है। संबंधित विभाग के नियम, आयु में छूट, आवेदन की तारीख और कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नीति को भी देखना पड़ता है।

इसलिए नौकरी की उम्मीद कर रहे परिवारों को अपने मामले में लागू नियमों की जांच करनी चाहिए। किसी एक फैसले के आधार पर सभी विभागों के लिए समान निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

अनुकंपा नियुक्ति और सामान्य भर्ती में क्या अंतर है?

अनुकंपा नियुक्ति सामान्य सरकारी भर्ती से अलग होती है। इसका मुख्य उद्देश्य सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को आर्थिक संकट से राहत देना है।

सामान्य भर्ती में उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया, योग्यता और प्रतियोगिता के आधार पर होता है। दूसरी ओर, अनुकंपा नियुक्ति में संबंधित योजना के नियमों के अनुसार पात्रता की जांच की जाती है।

इस नियुक्ति को परिवार के किसी सदस्य का स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं माना जाता। उम्मीदवार को निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसके अलावा, उपलब्ध पद और परिवार की आर्थिक स्थिति जैसे पहलू भी संबंधित योजना के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसी वजह से अदालतें आमतौर पर विभाग की निर्धारित नीति के अनुसार ही मामले का फैसला करती हैं। यदि किसी नियम में स्पष्ट आयु सीमा तय है, तो उसे नजरअंदाज करके नियुक्ति का आदेश देना आसान नहीं होता।

कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नियम क्यों जरूरी हैं?

अनुकंपा नियुक्ति के कुछ मामलों में आवेदन पर फैसला होने तक उम्मीदवार की उम्र बढ़ जाती है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आयु की गणना किस तारीख से की जानी चाहिए।

28 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राम विलास सारथी के मामले में इस पहलू पर विचार किया। याचिकाकर्ता के पिता की मृत्यु 11 मार्च 2020 को हुई थी। उस समय उनकी उम्र करीब 44 वर्ष छह महीने थी।

प्रशासन ने बाद में आवेदन अस्वीकार करते हुए कहा कि विचार के समय उनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक हो चुकी थी। अदालत ने इस अस्वीकृति को रद्द कर दिया और संबंधित अधिकारियों को मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नीति के अनुसार आवेदन पर विचार किया जाए। साथ ही, उम्र को दोबारा निर्णय लेने में बाधा नहीं बनाया जाए। अधिकारियों को आदेश मिलने के 60 दिनों के भीतर पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए।

यह मामला बताता है कि हर विवाद में केवल वर्तमान उम्र के आधार पर फैसला नहीं किया जा सकता। संबंधित तारीख और लागू नियम भी महत्वपूर्ण होते हैं।

अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले क्या करें?

यदि किसी परिवार का सदस्य सरकारी सेवा में रहते हुए गुजर जाता है, तो उसके आश्रित को संबंधित विभाग की अनुकंपा नियुक्ति नीति देखनी चाहिए। आवेदन की प्रक्रिया और समय सीमा विभाग के अनुसार अलग हो सकती है।

आवेदन करने से पहले इन बातों पर ध्यान दें:

  • कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नियुक्ति नीति की जानकारी लें।
  • अधिकतम आयु सीमा और उपलब्ध छूट के नियम जांचें।
  • आवेदन की निर्धारित समय सीमा का पालन करें।
  • मृत्यु प्रमाणपत्र, सेवा संबंधी दस्तावेज और आश्रित होने के प्रमाण तैयार रखें।
  • आवेदन अस्वीकार होने पर आदेश में दिए गए कारणों को समझें।
  • जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लें और संबंधित नियमों के अनुसार उचित कदम उठाएं।

इन बातों से आवेदन में होने वाली गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, उम्मीदवार यह समझ पाएंगे कि उनका मामला किस नीति के अंतर्गत आता है।

आगे क्या होगा?

अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित विभाग की नीति और मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अलग-अलग फैसले भी यही बताते हैं कि उम्र, आवेदन की तारीख और लागू नियमों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

यदि किसी विभाग ने गलत नियम लागू करके आवेदन खारिज किया है, तो प्रभावित व्यक्ति उचित कानूनी उपाय अपना सकता है। हालांकि, अदालत में याचिका दायर करने मात्र से नियुक्ति की गारंटी नहीं मिलती।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में विभागीय नियमों और निर्धारित पात्रता को महत्वपूर्ण मानता है। विद्युत कंपनी से जुड़े फरवरी 2026 के मामले में 40 वर्ष की आयु सीमा लागू मानी गई, जबकि दूसरे मामले में मृत्यु के समय लागू नीति के आधार पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया गया।

इसलिए 45 साल के बाद अनुकंपा नियुक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध का दावा सभी विभागों के लिए सही नहीं है। उम्मीदवारों को अपने विभाग के नियम, आयु सीमा और उपलब्ध छूट की जांच करनी चाहिए। अंतिम पात्रता संबंधित नीति और अदालत के लागू फैसले के अनुसार ही तय होगी।

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