गैरसैंण सत्र में 31 मिनट में 10 विधेयक पास, विपक्ष के हंगामे के बीच विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
उत्तराखंड के गैरसैंण विधानसभा सत्र का समापन हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच हुआ। बुधवार, 28 अक्टूबर को सदन में विपक्ष के विरोध के दौरान सरकार ने अनुपूरक बजट समेत 10 विधेयक पारित करा दिए। इन विधेयकों को पारित करने की प्रक्रिया करीब 31 मिनट में पूरी हुई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग उठाई थी। इस दौरान सदन में नारेबाजी हुई और कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। सरकार ने विधायी कामकाज पूरा किया, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। इससे सत्र के समापन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद और गहरे हो गए।
गैरसैंण विधानसभा सत्र में क्या-क्या हुआ?
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में दो दिवसीय सत्र आयोजित किया गया था। मौजूदा विधानसभा का यह अंतिम सत्र भी था। इसलिए उम्मीद थी कि सदन में राज्य के विकास, जनहित और विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांत रही। हालांकि, दूसरे दिन माहौल बदल गया। कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों पर तत्काल चर्चा कराई जाए।
विरोध के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। इसी दौरान सरकार ने अनुपूरक बजट और अन्य विधेयकों को पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
दोपहर करीब 1 बजकर 6 मिनट पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस तरह दो दिवसीय सत्र का समापन राजनीतिक खींचतान के बीच हुआ।
31 मिनट में कैसे पारित हुए 10 विधेयक?
गैरसैंण विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सरकार ने कम समय में विधायी कामकाज पूरा किया। संसदीय कार्यवाही के दौरान मंत्रियों ने अलग-अलग विभागों से संबंधित विधेयकों को पारित करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद सदन में ध्वनिमत के जरिए विधेयक पारित किए गए।
करीब 31 मिनट के भीतर अनुपूरक बजट से जुड़े विनियोग विधेयक समेत कुल 10 विधेयक पारित हो गए। विपक्ष लगातार विरोध कर रहा था, इसलिए इस दौरान विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि 31 मिनट का समय 10 विधेयकों को पारित कराने की प्रक्रिया से जुड़ा है। पूरे विधानसभा सत्र की अवधि इससे अधिक थी। सत्र के दौरान पहले दिन और दूसरे दिन की कार्यवाही भी हुई थी।
इस घटनाक्रम ने विधानसभा में चर्चा की प्रक्रिया और विपक्ष की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष ने जहां अपनी मांगों को नजरअंदाज किए जाने की बात उठाई, वहीं सरकार ने निर्धारित विधायी कामकाज पूरा करने पर जोर दिया।
₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट भी पारित
सत्र के दौरान उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित कराया। यह बजट राज्य की विभिन्न योजनाओं और विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों से जुड़ा है।
अनुपूरक बजट का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब मौजूदा वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजट के अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है। सरकार इसके जरिए अलग-अलग विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान कर सकती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट को राज्य के विकास और विभिन्न वर्गों की जरूरतों से जुड़ा बताया। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त धनराशि से विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी।
हालांकि, बजट के वास्तविक प्रभाव का आकलन इस बात से होगा कि राशि किन योजनाओं में खर्च होती है और उनका लाभ लोगों तक किस तरह पहुंचता है। इसके लिए विभागवार आवंटन, खर्च और योजनाओं की प्रगति पर नजर रखना जरूरी होगा।
कौन-कौन से 10 विधेयक हुए पारित?
गैरसैंण विधानसभा सत्र में पारित विधेयकों का संबंध वित्तीय प्रबंधन, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, नागरिक कानून और आपात सेवाओं जैसे क्षेत्रों से था। इनमें प्रमुख विधेयक शामिल हैं:
- उत्तराखंड विनियोग (अनुपूरक) विधेयक।
- उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक।
- राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक।
- निवेश और आधारिक संरचना विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक।
- उत्तराखंड जनविश्वास उपबंधों का संशोधन द्वितीय विधेयक।
- अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक।
- निजी विश्वविद्यालय द्वितीय संशोधन विधेयक।
- उत्तराखंड सिविल विधि संशोधन विधेयक।
- अग्निशमन एवं आपात सेवा संशोधन विधेयक।
- माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक।
इन विधेयकों के प्रावधान अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनके प्रभाव को समझने के लिए संबंधित कानूनों में किए गए बदलाव और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया देखना जरूरी होगा।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर क्यों भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्ष?
सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर चर्चा कराने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस विधायकों ने सदन के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
विपक्ष ने मंत्री रेखा आर्य से जुड़े आरोपों समेत अन्य मामलों को उठाते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की। विरोध के दौरान कुछ विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। उन्होंने नारेबाजी की, काले झंडे दिखाए और कार्यसूची की प्रतियां फाड़ीं।
विपक्ष का कहना था कि जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। दूसरी ओर, संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने विपक्ष की कार्यवाही पर सवाल उठाए। सत्ता पक्ष ने कहा कि विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने के अवसर का उपयोग करना चाहिए था।
इन आरोपों और राजनीतिक दावों के बीच यह स्पष्ट है कि सत्र में भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुख रहा। हालांकि, आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
प्रश्नकाल और जनहित के मुद्दों पर नहीं हो सकी पूरी चर्चा
विधानसभा सत्र का उद्देश्य केवल विधेयक पारित करना नहीं होता। सदन में प्रश्नकाल के जरिए विधायक सरकार से विभागीय कामकाज और योजनाओं के बारे में जवाब मांगते हैं। इसके अलावा, विभिन्न नियमों के तहत जनहित से जुड़े मुद्दे भी उठाए जाते हैं।
गैरसैंण सत्र के अंतिम दिन हंगामे के कारण प्रश्नकाल और अन्य कार्यवाही प्रभावित हुई। बार-बार स्थगन से सदन का निर्धारित समय कम हो गया। इसके बाद विधायी कार्यवाही पूरी करने पर जोर दिया गया।
इस घटनाक्रम से यह सवाल उठता है कि राजनीतिक मतभेदों के बीच जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय कैसे सुनिश्चित किया जाए। विपक्ष के लिए सरकार से जवाब मांगना महत्वपूर्ण है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी भी विधायी कामकाज को आगे बढ़ाना है।
यदि सदन में गंभीर आरोप उठते हैं, तो उन पर तथ्यों के आधार पर चर्चा और आवश्यक कार्रवाई जनता का भरोसा मजबूत कर सकती है। वहीं, लगातार हंगामे से सवालों के जवाब और नीतियों की समीक्षा प्रभावित हो सकती है।
धामी सरकार के अंतिम सत्र का क्या है राजनीतिक महत्व?
यह सत्र मौजूदा विधानसभा का अंतिम सत्र होने के कारण राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण था। राज्य में अगले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने मुद्दों को जनता के सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी सरकार ने अनुपूरक बजट और विधेयकों को पारित कराने को अपनी विधायी उपलब्धि के रूप में पेश किया। वहीं, कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया।
आने वाले समय में दोनों पक्ष इस सत्र की कार्यवाही को अपने राजनीतिक तर्कों के समर्थन में उठा सकते हैं। हालांकि, इस घटनाक्रम का चुनावी असर क्या होगा, इसका अनुमान केवल एक विधानसभा सत्र के आधार पर नहीं लगाया जा सकता।
मतदाताओं के लिए बजट का उपयोग, योजनाओं का क्रियान्वयन, सरकारी जवाबदेही और विपक्ष की भूमिका जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे। इन सभी पहलुओं का मूल्यांकन तथ्यों और सरकार के कामकाज के आधार पर किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
गैरसैंण विधानसभा सत्र का समापन विपक्ष के भारी हंगामे के बीच हुआ। सरकार ने करीब 31 मिनट में अनुपूरक बजट समेत 10 विधेयक पारित कराए। इसके साथ ही 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट भी मंजूर हुआ और विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
सत्र के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों पर चर्चा की मांग और सरकार की विधायी प्राथमिकताओं के बीच टकराव साफ दिखाई दिया। हंगामे के कारण प्रश्नकाल और अन्य मुद्दों पर विस्तृत चर्चा प्रभावित हुई। अब इन विधेयकों के क्रियान्वयन और बजट के इस्तेमाल पर नजर रहेगी। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में सदन के भीतर जनहित के सवालों पर सार्थक चर्चा के लिए कितना समय मिल पाता है।

