बेंगलुरु क्रिप्टो स्कैम: ED की Mudrex और Instadapp पर छापेमारी, ₹4,600 करोड़ के लेन-देन की जांच
बेंगलुरु क्रिप्टो स्कैम को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने क्रिप्टो प्लेटफॉर्म Mudrex और Instadapp से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में हजारों करोड़ रुपये के कथित अनधिकृत सीमा-पार लेन-देन का मामला सामने आया है।
ED के मुताबिक, Mudrex से जुड़े मामले में विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर 4,600 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध क्रिप्टो होल्डिंग और लेन-देन की जानकारी मिली है। वहीं, Instadapp से जुड़े मामले में करीब 40 मिलियन डॉलर के कथित विदेशी मुद्रा नियम उल्लंघन की जांच की जा रही है। एजेंसी ने फिलहाल इसे प्रारंभिक जांच का हिस्सा बताया है।
बेंगलुरु क्रिप्टो स्कैम में ED की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत यह कार्रवाई की। एजेंसी ने 27 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में तीन और मध्य प्रदेश में एक ठिकाने पर तलाशी ली।
यह जांच क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कथित तौर पर बिना अनुमति विदेशों में पैसे भेजने से जुड़ी है। ED को शिकायतें मिली थीं कि कुछ प्लेटफॉर्म डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय भुगतान की सुविधा दे रहे हैं।
जांच में बेंगलुरु की RPFAS Technologies Private Limited का नाम सामने आया है। यह कंपनी Mudrex और Saber.money नाम के प्लेटफॉर्म संचालित करती है। ED का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से रुपये और विदेशी मुद्रा को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर सीमा-पार लेन-देन किया जा रहा था।
एजेंसी के अनुसार, संबंधित कंपनी के पास RBI से विदेशी मुद्रा भेजने या प्राप्त करने की आवश्यक अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद कथित रूप से ऐसे लेन-देन किए जा रहे थे।
Mudrex पर क्या हैं ED के आरोप?
ED की जांच का एक प्रमुख हिस्सा Mudrex और Saber.money के कामकाज से जुड़ा है। एजेंसी का दावा है कि इन प्लेटफॉर्म पर तत्काल अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण की सुविधा का प्रचार किया जा रहा था।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया में सबसे पहले ग्राहक प्लेटफॉर्म पर अपना पंजीकरण करता था। इसके बाद वह कंपनी के बैंक खाते में रकम जमा करता था। कंपनी कथित तौर पर इस रकम से क्रिप्टोकरेंसी खरीदती थी।
इसमें मुख्य रूप से USDT जैसे स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। स्टेबलकॉइन ऐसी डिजिटल करेंसी होती है, जिसकी कीमत किसी पारंपरिक मुद्रा या अन्य संपत्ति से जुड़ी रहती है।
ED के मुताबिक, खरीदे गए डिजिटल टोकन को क्रिप्टो एक्सचेंज पर बेचा जाता था। इसके बाद बिक्री से मिली रकम संबंधित प्राप्तकर्ता तक पहुंचाई जाती थी। एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अधिकृत अंतरराष्ट्रीय भुगतान माध्यमों को दरकिनार किया गया।
प्रारंभिक जांच में विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर 4,600 करोड़ रुपये से अधिक की अनधिकृत क्रिप्टो होल्डिंग सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, यह जांच एजेंसी का प्रारंभिक निष्कर्ष है। अंतिम वित्तीय देनदारी और नियम उल्लंघन की पुष्टि आगे की जांच के बाद होगी।
विदेशी कंपनियों और क्रिप्टो एक्सचेंजों का इस्तेमाल
ED ने अपनी जांच में कई विदेशी कंपनियों और क्रिप्टो एक्सचेंजों की भूमिका भी खंगाली है। एजेंसी का आरोप है कि कनाडा, लिथुआनिया और अमेरिका में पंजीकृत कुछ कंपनियों का इस्तेमाल कथित लेन-देन में किया गया।
जांचकर्ताओं को बड़े स्तर पर ओवर-द-काउंटर यानी OTC क्रिप्टो सौदों के संकेत भी मिले हैं। OTC कारोबार में डिजिटल संपत्तियों की खरीद-बिक्री सीधे खरीदार और विक्रेता के बीच होती है। इसमें सामान्य एक्सचेंज ऑर्डर बुक का इस्तेमाल जरूरी नहीं होता।
ED के अनुसार, Binance और Bybit जैसे विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर भी लेन-देन और डिजिटल संपत्तियों की मौजूदगी की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन खातों और वॉलेट के जरिए आगे भेजी गई।
इस मामले में विदेशी कंपनियों के वास्तविक संचालन और उनके पंजीकृत कार्यालयों की स्थिति भी जांच के दायरे में है। ED का आरोप है कि कुछ विदेशी संस्थाओं का नियंत्रण भारत से किया जा रहा था।
Instadapp और Fluid पर भी जांच का शिकंजा
इस कार्रवाई में ED ने Instadapp से जुड़े कारोबार की भी जांच की है। Instadapp एक विकेंद्रीकृत वित्त यानी DeFi प्रोटोकॉल है। यह Ethereum ब्लॉकचेन पर काम करता है और उपयोगकर्ताओं को डिजिटल संपत्तियों के जरिए वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराता है।
इस प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ता अपनी क्रिप्टो संपत्तियां उधार दे सकते हैं। इसके बदले उन्हें ब्याज मिल सकता है। इसके अलावा, वे अपनी डिजिटल संपत्तियों के आधार पर दूसरी क्रिप्टोकरेंसी उधार लेने और टोकन बदलने जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
Instadapp का कारोबार अब Fluid नाम से भी संचालित होता है। ED के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म से जुड़ी कंपनी अमेरिका के डेलावेयर में पंजीकृत दिखाई गई है। हालांकि, एजेंसी का आरोप है कि इसका वास्तविक संचालन और विकास कार्य भारत से किया जा रहा था।
जांच में करीब 40 मिलियन डॉलर के कथित FEMA उल्लंघन का अनुमान लगाया गया है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 380 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है।
टैक्स हेवन देशों में कंपनियां बनाने का आरोप
ED का आरोप है कि Instadapp से जुड़े कारोबार के लिए कई विदेशी कंपनियां बनाई गई थीं। इनमें अमेरिका, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, सिंगापुर और दुबई में पंजीकृत संस्थाओं के नाम शामिल हैं।
एजेंसी के अनुसार, इनमें से कुछ कंपनियों के पंजीकृत पते पर वास्तविक कार्यालय या कर्मचारी मौजूद नहीं थे। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल विदेशों में कमाई और निवेश से जुड़ी रकम को अलग-अलग खातों के जरिए भेजने में किया गया।
ED का दावा है कि Instadapp से जुड़ी कमाई और निवेशकों की कुछ रकम स्टेबलकॉइन के रूप में विदेशी डिजिटल वॉलेट में रखी गई थी। बाद में इन्हें सिंगापुर के क्रिप्टो कारोबारियों और एक्सचेंजों के माध्यम से बेचने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, बिक्री से मिली रकम विदेशी बैंक खातों में जमा हुई। इसके बाद कुछ भुगतान भारत में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर भेजे जाने का आरोप है। एजेंसी इन भुगतान की वास्तविकता और उनके दस्तावेजों की जांच कर रही है।
FEMA नियमों के तहत क्यों हो रही है जांच?
भारत में विदेशी मुद्रा के लेन-देन और सीमा-पार भुगतान के लिए FEMA के नियम लागू होते हैं। इन नियमों का उद्देश्य विदेशों से आने और विदेशों में भेजी जाने वाली रकम को निर्धारित व्यवस्था के तहत रखना है।
यदि कोई कंपनी आवश्यक अनुमति के बिना विदेशी मुद्रा का लेन-देन करती है, तो उसके खिलाफ FEMA के तहत कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों, विदेशी कंपनियों और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
क्रिप्टोकरेंसी के मामले में जांच और जटिल हो जाती है। डिजिटल टोकन अलग-अलग वॉलेट और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के बीच भेजे जा सकते हैं। इसलिए एजेंसियों को यह पता लगाना पड़ता है कि रकम का स्रोत क्या था और उसका अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ।
हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा हर लेन-देन अपने आप में अवैध नहीं होता। किसी भी मामले में नियम उल्लंघन का निर्धारण संबंधित कानून, अनुमति और लेन-देन की वास्तविक प्रकृति के आधार पर होता है।
निवेशकों और क्रिप्टो कारोबार पर क्या पड़ेगा असर?
ED की इस कार्रवाई से भारत में क्रिप्टो कारोबार और अंतरराष्ट्रीय भुगतान सेवाओं पर नियामकीय निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। खासकर ऐसे प्लेटफॉर्म जांच के दायरे में आ सकते हैं, जो रुपये और विदेशी मुद्रा को डिजिटल टोकन में बदलकर सीमा-पार भुगतान की सुविधा देते हैं।
इस कार्रवाई का असर निवेशकों की चिंता पर भी पड़ सकता है। हालांकि, किसी कंपनी के खिलाफ जांच शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके सभी उपयोगकर्ता या निवेशक किसी गलत गतिविधि में शामिल हैं।
उपयोगकर्ताओं को किसी भी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर पैसा जमा करने से पहले उसकी सेवाओं और नियमों की जानकारी लेनी चाहिए। साथ ही, लेन-देन का रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।
आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
फिलहाल ED की जांच प्रारंभिक चरण में है। एजेंसी को संबंधित कंपनियों, विदेशी खातों, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टो एक्सचेंजों से जुड़े लेन-देन की कड़ियां जोड़नी हैं।
आने वाले समय में संबंधित कंपनियों और उनके प्रतिनिधियों से पूछताछ हो सकती है। जरूरत पड़ने पर एजेंसी अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकती है। हालांकि, अब तक उपलब्ध जानकारी में किसी गिरफ्तारी या अंतिम दंडात्मक आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितनी रकम नियमों के उल्लंघन से जुड़ी थी और किन व्यक्तियों या संस्थाओं की जिम्मेदारी तय होती है।
निष्कर्ष
बेंगलुरु क्रिप्टो स्कैम में ED की कार्रवाई ने डिजिटल करेंसी के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। Mudrex से जुड़े मामले में 4,600 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनधिकृत क्रिप्टो होल्डिंग और सीमा-पार लेन-देन की जांच हो रही है। वहीं, Instadapp से जुड़े मामले में करीब 380 करोड़ रुपये के कथित FEMA उल्लंघन का आरोप है।
फिलहाल ये आरोप जांच एजेंसी के प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित हैं। अंतिम नतीजे जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। यह मामला भारत में क्रिप्टो कारोबार के लिए नियामकीय अनुपालन और पारदर्शिता के महत्व को भी रेखांकित करता है।

