उत्तराखंड रोडवेज हड़ताल: सरकार से वार्ता विफल, आज से प्रदेशभर में बसों का चक्का जाम
उत्तराखंड में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल से शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो गई है। उत्तराखंड रोडवेज हड़ताल के कारण प्रदेशभर में बसों के पहिए थमने की स्थिति बन गई है। कर्मचारियों ने अपनी मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार जारी रखने का ऐलान किया है।
इस आंदोलन में करीब 3,500 चालक और परिचालक शामिल हो रहे हैं। इससे देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल और टनकपुर समेत कई शहरों की बस सेवाएं प्रभावित होंगी।
गुरुवार को परिवहन निगम प्रबंधन और कर्मचारी यूनियन के बीच करीब साढ़े तीन घंटे बातचीत हुई। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच किसी प्रमुख मांग पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारियों ने शुक्रवार सुबह छह बजे से आंदोलन शुरू कर दिया।
सरकार और कर्मचारियों के बीच वार्ता क्यों विफल हुई?
रोडवेज कर्मचारियों की मांगों को लेकर गुरुवार को परिवहन निगम मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी और तीनों मंडलों के महाप्रबंधक मौजूद रहे।
वहीं, कर्मचारी यूनियन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष कमल पपनै और महामंत्री अशोक चौधरी समेत कई पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुई और दोपहर तक चली।
यूनियन ने कर्मचारियों की समस्याओं को प्रबंधन के सामने रखा। इनमें बकाया वेतन, महंगाई भत्ता, बोनस और बसों की कमी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
इसके अलावा निजी बसों के परमिट और कथित अवैध संचालन पर भी चर्चा हुई। लेकिन प्रबंधन और यूनियन के बीच मांगों पर सहमति नहीं बन पाई।
इसके बाद कर्मचारी नेताओं ने पहले से घोषित आंदोलन को जारी रखने का फैसला किया। यूनियन ने साफ किया कि ठोस समाधान मिलने तक कार्यबहिष्कार वापस नहीं लिया जाएगा।
तीन महीने के वेतन का भुगतान नहीं होने से नाराज कर्मचारी
उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग लंबित वेतन का भुगतान है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। इससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है।
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, अगस्त और सितंबर का वेतन कई कर्मचारियों को नहीं मिला है। कर्मचारी इसे लंबे समय से चली आ रही समस्या बता रहे हैं।
समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों को घर का खर्च चलाने में मुश्किल होती है। बच्चों की पढ़ाई, मकान का किराया और दूसरी जरूरी जरूरतों पर भी असर पड़ता है।
यूनियन चाहती है कि परिवहन निगम हर महीने की सात तारीख तक कर्मचारियों के खातों में वेतन भेजे। कर्मचारियों का कहना है कि नियमित वेतन मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी।
महंगाई भत्ता और बोनस भी प्रमुख मांग
वेतन के अलावा कर्मचारियों ने महंगाई भत्ते और बोनस के भुगतान की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि लंबे समय से कई वित्तीय लाभ लंबित हैं।
कर्मचारियों की छह प्रमुख मांगों में ये मुद्दे शामिल हैं:
- अगस्त और सितंबर समेत लंबित वेतन का भुगतान।
- महंगाई भत्ते का बकाया जारी करना।
- दीपावली पर कर्मचारियों को बोनस देना।
- संविदा कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन देना।
- निगम के बेड़े में नई बसें शामिल करना।
- निजी बसों की डग्गामारी और अवैध परमिट पर रोक लगाना।
कर्मचारी यूनियन का कहना है कि इन मांगों पर कई बार प्रबंधन का ध्यान दिलाया गया है। इसके बावजूद समाधान नहीं निकलने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है।
संविदा कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन चाहिए
रोडवेज कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण मांग संविदा कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी है। यूनियन चाहती है कि समान काम करने वाले संविदा कर्मचारियों को भी उचित वेतन मिले।
कर्मचारी नेताओं ने समान काम, समान वेतन के तहत 30,447 रुपये मासिक भुगतान की मांग उठाई है। उनका कहना है कि संविदा कर्मचारी भी नियमित कर्मचारियों की तरह परिवहन सेवाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।
इसके अलावा यूनियन ने वेतन भुगतान के लिए हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर ट्रेजरी व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी है।
इस व्यवस्था से कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस मांग पर अभी परिवहन निगम प्रबंधन की ओर से कोई अंतिम सहमति सामने नहीं आई है।
करीब 1000 बसों का संचालन हो सकता है प्रभावित
उत्तराखंड में रोडवेज बसों का संचालन बड़ी संख्या में चालक और परिचालकों पर निर्भर करता है। कर्मचारी यूनियन के अनुसार, करीब 3,500 कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 1,000 बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है। लंबी दूरी और मैदानी क्षेत्रों के रूट पर इसका असर ज्यादा पड़ने की आशंका है।
देहरादून, दिल्ली, हरिद्वार, बरेली और हल्द्वानी जैसे प्रमुख रूट प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में भी यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
यूनियन से जुड़े कर्मचारियों का लंबी दूरी और मैदानी मार्गों पर बस संचालन में बड़ा योगदान है। इसलिए कार्यबहिष्कार का सीधा असर परिवहन निगम की सेवाओं पर पड़ सकता है।
हालांकि, सभी बसों का संचालन पूरी तरह बंद होने की स्थिति डिपो और उपलब्ध कर्मचारियों पर निर्भर करेगी।
हल्द्वानी, देहरादून और नैनीताल के यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी
इस हड़ताल का असर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजाना रोडवेज बसों से सफर करने वाले हजारों लोगों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है।
हल्द्वानी से देहरादून और दिल्ली जाने वाले यात्रियों को विशेष परेशानी हो सकती है। इसी तरह हरिद्वार, ऋषिकेश और टनकपुर के यात्रियों की यात्रा भी प्रभावित हो सकती है।
इसका असर इन लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है:
- रोजाना नौकरी पर जाने वाले कर्मचारी।
- स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी।
- इलाज के लिए दूसरे शहर जाने वाले मरीज।
- बुजुर्ग और अकेले यात्रा करने वाले लोग।
- लंबी दूरी के लिए रोडवेज पर निर्भर यात्री।
इसके अलावा त्योहार के कारण बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे समय में बस सेवाएं प्रभावित होने से परेशानी और बढ़ सकती है।
निजी बसों और टैक्सियों से बढ़ सकता है किराया
रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित होने पर निजी बसों, टैक्सियों और अन्य यात्री वाहनों की मांग बढ़ सकती है। इससे यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ सकता है।
कर्मचारी यूनियन ने भी निजी बसों के कथित अवैध संचालन पर रोक लगाने की मांग की है। यूनियन का आरोप है कि निजी वाहनों को अनुचित तरीके से परमिट मिलने से रोडवेज की आय प्रभावित होती है।
हालांकि, निजी वाहन संचालकों पर मनमाना किराया वसूलने का कोई सामान्य निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यात्रियों को सफर शुरू करने से पहले किराया तय कर लेना चाहिए।
वहीं, प्रशासन को भी यात्रियों की सुविधा और किराया नियंत्रण पर ध्यान देना होगा।
इंप्लाइज यूनियन ने भी दिया हड़ताल को समर्थन
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के आंदोलन को उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन का भी समर्थन मिला है।
इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश महामंत्री रविनंदन कुमार ने आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है। शुरुआती चरण में नैतिक समर्थन के बाद एक नवंबर से पूरी तरह हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की गई है।
इस समर्थन से आंदोलन का दायरा और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बस संचालन पर दबाव बना रहने की आशंका है।
दूसरी ओर, परिवहन निगम के सामने यात्रियों को नियमित सेवाएं उपलब्ध कराने की चुनौती होगी।
यात्रियों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
हड़ताल को देखते हुए यात्रियों को यात्रा की योजना पहले से बनानी चाहिए। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को बसों की उपलब्धता की जानकारी लेनी चाहिए।
यात्रियों के लिए कुछ जरूरी सुझाव हैं:
- घर से निकलने से पहले संबंधित डिपो से संपर्क करें।
- ऑनलाइन बस बुकिंग की स्थिति जांचें।
- जरूरी यात्रा के लिए वैकल्पिक साधन तैयार रखें।
- निजी वाहन का किराया पहले तय करें।
- मरीजों और बुजुर्गों की यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखें।
इसके अलावा यात्रियों को बिना पुष्टि के बस अड्डे नहीं पहुंचना चाहिए। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
कब खत्म होगी उत्तराखंड रोडवेज हड़ताल?
फिलहाल कर्मचारी यूनियन ने आंदोलन खत्म करने के लिए कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। यूनियन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक कार्यबहिष्कार जारी रहेगा।
अब सभी की नजर परिवहन निगम प्रबंधन और राज्य सरकार के अगले कदम पर है। यदि दोनों पक्षों के बीच दोबारा बातचीत होती है, तो समाधान निकलने की संभावना बन सकती है।
वहीं, दीपावली के आसपास यात्रियों की संख्या बढ़ने से सरकार पर परिवहन व्यवस्था सामान्य रखने का दबाव भी रहेगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड रोडवेज हड़ताल के कारण 30 अक्टूबर से प्रदेशभर में बस सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। करीब 3,500 कर्मचारी वेतन, महंगाई भत्ता, बोनस और समान काम के समान वेतन जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
गुरुवार की वार्ता विफल होने के बाद कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार शुरू कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और परिवहन निगम प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों पर कब तक समाधान निकालते हैं। फिलहाल यात्रियों को सफर से पहले बसों की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।

