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मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर भोपाल में लोक नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार | News Critic

मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में भव्य समारोह की शुरुआत हुई। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस 2026 के मौके पर लाल परेड ग्राउंड में तीन दिवसीय राज्योत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और विकास की झलक देखने को मिल रही है।

रविवार, 1 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यस्तरीय समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कई प्रदर्शनियों और विशेष आयोजनों की शुरुआत भी हुई। राज्योत्सव 1 से 3 नवंबर तक चलेगा। इसमें प्रदेश के कलाकारों, विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों की भागीदारी रहेगी।

इस वर्ष समारोह की मुख्य थीम ‘विरासत से विकास के पथ की ओर अग्रसर प्रदेश’ रखी गई है। इसके जरिए मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक उपलब्धियों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया राज्योत्सव का शुभारंभ

स्थापना दिवस के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने सुबह 11 बजे विभिन्न प्रदर्शनियों और विशेष मंडपों का शुभारंभ किया।

इसके बाद शाम 6:30 बजे मुख्य सांस्कृतिक समारोह की शुरुआत हुई। आयोजन में प्रदेश की कला, संगीत और लोक परंपराओं को विशेष स्थान दिया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाना है।

राज्योत्सव में केवल मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां नहीं रखी गई हैं। इसके साथ कृषि, महिला उद्यमिता, विकास योजनाओं और स्थानीय उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इस तरह आयोजन को संस्कृति और विकास दोनों से जोड़ा गया है।

71 बच्चों के वंदे मातरम् गायन से हुई शुरुआत

मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत ‘देशराग’ कार्यक्रम से हुई। इसमें 71 बच्चों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन किया। यह प्रस्तुति मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस को समर्पित रही।

इसके बाद पुलिस बैंड ने राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का विशेष माहौल देखने को मिला। वहीं, आतिशबाजी ने समारोह के उद्घाटन को और आकर्षक बनाया।

इस आयोजन में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता गायिका मोनाली ठाकुर मुख्य आकर्षण रहीं। उन्होंने अपनी संगीत प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुति ने स्थापना दिवस की पहली सांस्कृतिक शाम को खास बना दिया।

मोनाली ठाकुर से लेकर मामे खान तक संगीत का रंग

तीन दिवसीय राज्योत्सव में अलग-अलग दिनों के लिए विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रखी गई हैं। पहले दिन मोनाली ठाकुर की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में संगीत का रंग भरा। वहीं, अंतिम दिन प्रसिद्ध लोक गायक मामे खान अपनी प्रस्तुति देंगे।

मामे खान की लोक गायकी समारोह के समापन का प्रमुख आकर्षण होगी। उनके संगीत के जरिए राजस्थान की लोक परंपराओं की झलक भी देखने को मिलेगी। इस तरह आयोजन में मध्य प्रदेश के साथ अन्य क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता को भी स्थान दिया गया है।

इसके अलावा दूसरे दिन यानी 2 नवंबर को 20 से अधिक लोक और जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुतियां रखी गई हैं। इन प्रस्तुतियों में अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक कला और संगीत दिखाई देगा। इसके बाद वाद्ययंत्रों पर आधारित विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

कृषि प्रदर्शनी और महिला उद्यमिता मंडप भी आकर्षण

लाल परेड ग्राउंड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ कई उपयोगी प्रदर्शनियां भी लगाई गई हैं। इनमें आधुनिक कृषि प्रदर्शनी प्रमुख है। यहां किसानों को नई तकनीकों और खेती के बेहतर तरीकों की जानकारी मिलेगी।

प्रदर्शनी में उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और स्मार्ट सिंचाई तकनीक जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा जैविक खेती और कृषि से जुड़े नए प्रयोगों पर भी जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती में उपलब्ध नए विकल्पों से परिचित कराना है।

वहीं, महिला उद्यमिता मंडप में महिलाओं के उत्पादों और उनके काम को प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। साथ ही देशज व्यंजन मेले में स्थानीय स्वाद और पारंपरिक खानपान को बढ़ावा दिया जा रहा है।

160 चित्रों में दिखाई देगी ऐतिहासिक विरासत

राज्योत्सव का एक अन्य खास आकर्षण ‘राजा भोज का भोपाल’ विषय पर आधारित चित्र प्रदर्शनी है। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की ओर से तैयार इस प्रदर्शनी में 160 वॉटर कलर चित्र शामिल किए गए हैं।

इन चित्रों के माध्यम से भोपाल और आसपास के क्षेत्रों की ऐतिहासिक तथा स्थापत्य विरासत दिखाई गई है। इसमें रायसेन किला, भोजपुर शिव मंदिर, भीमबेटका और सांची स्तूप जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।

इसके अलावा ताज-उल-मसाजिद, गौहर महल और रानी कमलापति महल की झलक भी चित्रों में देखने को मिलती है। यह प्रदर्शनी लोगों को प्रदेश के इतिहास और महत्वपूर्ण धरोहरों से जोड़ने का प्रयास करती है।

जनसंपर्क विभाग की विकास प्रदर्शनी में सरकारी योजनाओं और प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी भी दी जा रही है। इस तरह नागरिकों को इतिहास के साथ वर्तमान विकास कार्यों को समझने का अवसर मिल रहा है।

मेधावी विद्यार्थियों और किसानों को मिलेगा सम्मान

स्थापना दिवस समारोह में शिक्षा और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मानित करने की भी व्यवस्था की गई है। भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत 102 विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति देने का कार्यक्रम रखा गया है।

इसके साथ विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र भी दिए जाएंगे। यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रखा गया है।

वहीं, किसान स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके लिए कुल 165 विजेताओं का चयन किया गया है। पुरस्कारों में 55 ट्रैक्टर, 55 बुलेट मोटरसाइकिल और 55 ई-स्कूटर शामिल हैं।

इस पहल के जरिए किसानों को कृषि संबंधी जानकारी और नई तकनीकों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है। साथ ही प्रतियोगिता में भाग लेने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

3 नवंबर तक जारी रहेंगे सांस्कृतिक आयोजन

भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित राज्योत्सव का समापन 3 नवंबर को होगा। दूसरे दिन लोक और जनजातीय नृत्यों के साथ वाद्य संगीत की प्रस्तुतियां रखी गई हैं। वहीं, अंतिम दिन मामे खान की लोक गायकी समारोह का प्रमुख आकर्षण बनेगी।

प्रदर्शनियों और विभिन्न मंडपों के माध्यम से नागरिक प्रदेश की संस्कृति, कृषि और विकास से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आयोजन में स्थानीय उत्पादों, देशज व्यंजनों और महिला उद्यमिता को भी प्रमुखता दी गई है।

इसके अलावा स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश के अन्य जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों, स्थानीय उत्पादों और क्षेत्रीय उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे स्थापना दिवस का उत्सव राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा।

मध्य प्रदेश के गठन का ऐतिहासिक महत्व

मध्य प्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था। उस समय विभिन्न क्षेत्रों और रियासतों को मिलाकर नए राज्य का निर्माण किया गया था। भोपाल को इसकी राजधानी बनाया गया।

बाद में 1 नवंबर 2000 को राज्य का पुनर्गठन हुआ। इसके तहत मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से को अलग करके छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया। इसके बाद वर्तमान मध्य प्रदेश का भौगोलिक स्वरूप सामने आया।

हर साल 1 नवंबर को स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर राज्य की उपलब्धियों, ऐतिहासिक यात्रा और भविष्य की योजनाओं को याद किया जाता है। इस वर्ष 71वें स्थापना दिवस पर भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया गया है।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस 2026 का राज्यस्तरीय समारोह भोपाल में संस्कृति, इतिहास और विकास के संगम के रूप में आयोजित हो रहा है। लाल परेड ग्राउंड में तीन दिनों तक चलने वाले इस राज्योत्सव में संगीत, लोक नृत्य, कृषि प्रदर्शनी और ऐतिहासिक चित्रों के जरिए प्रदेश की पहचान सामने रखी जा रही है।

मोनाली ठाकुर की प्रस्तुति से शुरू हुआ यह उत्सव 3 नवंबर को मामे खान की लोक गायकी के साथ संपन्न होगा। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश स्थापना दिवस का यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और विकास यात्रा को आम लोगों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

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