असम में एक से ज्यादा शादी करने वाले सरकारी कर्मचारियों की जाएगी नौकरी, कैबिनेट ने लिया बड़ा फैसला
असम सरकार ने एक से ज्यादा शादी करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 नवंबर को कैबिनेट के इस निर्णय की जानकारी दी। नए प्रावधान के तहत बहुविवाह करते पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें भविष्य में राज्य सरकार की नौकरी के लिए भी अयोग्य घोषित किया जाएगा।
सरकार ने यह फैसला असम सेवा अनुशासन एवं अपील नियम, 1964 में संशोधन करके लिया है। इसके लिए नियम 7 में नया प्रावधान जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह कदम राज्य में लागू समान नागरिक संहिता यानी UCC के प्रावधानों के अनुरूप है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य महिला अधिकारों और लैंगिक न्याय को मजबूत करना है।
असम कैबिनेट ने बहुविवाह पर लिया बड़ा फैसला
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अनुशासन संबंधी नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है।
अब यदि कोई सरकारी कर्मचारी बहुविवाह करते पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नौकरी से बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अलावा, ऐसा कर्मचारी भविष्य में असम सरकार की किसी नई सरकारी नौकरी के लिए भी पात्र नहीं होगा।
इससे पहले बहुविवाह से जुड़े मामलों में सरकारी कर्मचारियों को निलंबन और विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता था। अब सरकार ने इसे और गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन मानते हुए बर्खास्तगी का प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने इस मामले में सख्त कार्रवाई का रास्ता चुना है। सरकार के मुताबिक, नए नियमों का उद्देश्य सरकारी सेवा में अनुशासन बनाए रखना और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
सेवा नियम 1964 में किया गया संशोधन
इस फैसले को लागू करने के लिए असम सरकार ने Assam Services (Discipline and Appeal) Rules, 1964 में संशोधन किया है। इसके तहत नियम 7 में नया क्लॉज 6 जोड़ा गया है।
यह नियम सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित है। नए प्रावधान के बाद बहुविवाह करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी सजा के रूप में बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकेगी।
इसका सीधा असर राज्य सरकार के विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी के बहुविवाह की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ विभागीय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई केवल आरोप के आधार पर नहीं होनी चाहिए। संबंधित नियमों और विभागीय प्रक्रिया के अनुसार मामले की जांच और निर्णय जरूरी होगा।
क्या पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर जाएगी नौकरी?
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि किन परिस्थितियों में कर्मचारी पर कार्रवाई होगी। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों पर रोक लगाना है, जिनमें कर्मचारी पहले से विवाहित होने के बावजूद दूसरी शादी करता है।
असम सरकार ने पहले भी सरकारी कर्मचारियों के लिए इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। अक्टूबर 2023 में जारी आदेश के अनुसार, कोई सरकारी कर्मचारी अपने जीवनसाथी के जीवित रहते दूसरी शादी नहीं कर सकता था। इसके लिए सरकार से पहले अनुमति लेना जरूरी बताया गया था।
यह निर्देश उस स्थिति में भी लागू था, जब संबंधित कर्मचारी का व्यक्तिगत कानून दूसरी शादी की अनुमति देता हो। महिला सरकारी कर्मचारियों पर भी यह नियम लागू था। यानी यदि कोई महिला कर्मचारी ऐसे पुरुष से विवाह करती है जिसकी पत्नी पहले से जीवित है, तो उस पर भी विभागीय कार्रवाई हो सकती थी।
अब नए संशोधन के बाद बहुविवाह करने वाले कर्मचारियों के लिए बर्खास्तगी का प्रावधान किया गया है। इस तरह सरकार ने पहले से मौजूद प्रतिबंधों को और सख्त कर दिया है।
सभी समुदायों के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा नियम
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में लागू समान नागरिक संहिता के तहत यह व्यवस्था सभी समुदायों के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगी। इसका मतलब है कि सरकारी सेवा में बहुविवाह से जुड़ा नियम किसी एक धर्म तक सीमित नहीं रहेगा।
सरकार का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवा संबंधी अनुशासन के नियम समान रूप से लागू होने चाहिए। इसलिए धर्म या समुदाय के आधार पर अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जाएगा।
हालांकि, असम की समान नागरिक संहिता में अनुसूचित जनजाति समुदायों को छूट दी गई है। ऐसे में नियमों के दायरे और अपवादों को समझते समय UCC के लागू क्षेत्र और संबंधित कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखना जरूरी है।
सरकार के इस फैसले के बाद बहुविवाह और व्यक्तिगत कानूनों को लेकर चर्चा भी तेज हो सकती है। इस विषय पर कानूनी स्थिति और अलग-अलग समुदायों के अधिकारों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
जुलाई के बजट में पहले ही किया गया था ऐलान
असम सरकार ने इस फैसले की दिशा में पहले ही संकेत दे दिया था। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने का प्रस्ताव रखा गया था।
10 जुलाई 2026 को बजट पेश करते समय वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने इस प्रस्ताव की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा।
बजट में यह प्रस्ताव भी रखा गया था कि बहुविवाह करने वाले पुरुषों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित व्यवस्था को भी सख्त बनाने की बात कही गई थी।
अब नवंबर में कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा नियमों में संशोधन का फैसला सामने आया है। इससे बजट में घोषित प्रस्ताव को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बताया फैसले का आधार
असम सरकार ने बहुविवाह के खिलाफ सख्ती को महिला अधिकारों और लैंगिक न्याय से जोड़कर पेश किया है। सरकार का तर्क है कि एक से ज्यादा विवाह की प्रथा कई महिलाओं के लिए सामाजिक और आर्थिक समस्याएं पैदा कर सकती है।
सरकार के अनुसार, सरकारी सेवा में काम करने वाले लोगों को निर्धारित आचरण नियमों का पालन करना चाहिए। सरकारी कर्मचारियों से समाज में जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। इसी आधार पर बहुविवाह के मामलों में कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया गया है।
हालांकि, इस तरह के नियमों का प्रभाव समझने के लिए उनके कानूनी दायरे और लागू होने की प्रक्रिया को भी देखना होगा। सेवा नियमों के तहत कार्रवाई और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े सवाल अलग-अलग कानूनी पहलू हैं।
इसलिए किसी मामले में अंतिम निर्णय संबंधित नियमों, उपलब्ध दस्तावेजों और विभागीय जांच के आधार पर ही लिया जाएगा।
सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या बदल जाएगा?
नए फैसले के बाद असम सरकार के कर्मचारियों को विवाह से जुड़े सेवा नियमों का विशेष ध्यान रखना होगा। पहले से लागू निर्देशों के अनुसार, जीवनसाथी के जीवित रहते दूसरी शादी करने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी थी।
अब बहुविवाह करते पाए जाने पर कर्मचारी को नौकरी से हटाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही भविष्य में सरकारी रोजगार पाने का रास्ता भी बंद हो सकता है।
इस फैसले के प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:
- बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई होगी।
- दोषी पाए जाने पर नौकरी से बर्खास्तगी की सजा दी जा सकेगी।
- ऐसे कर्मचारी भविष्य में असम सरकार की नौकरी के लिए अयोग्य होंगे।
- सरकारी सेवा में विवाह संबंधी आचरण नियमों का पालन जरूरी होगा।
- नियमों के उल्लंघन पर विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
यह फैसला राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए है। इसे बिना किसी अलग कानूनी आधार के देश के सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं माना जाना चाहिए।
असम सरकार के फैसले पर आगे क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद संशोधित सेवा नियमों को लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। संबंधित विभागों को कर्मचारियों के लिए नियमों और कार्रवाई की प्रक्रिया स्पष्ट करनी होगी।
इसके अलावा, भविष्य में यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ बहुविवाह की शिकायत आती है, तो विभाग को मामले की जांच करनी होगी। कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर और लागू सेवा नियमों के तहत प्रक्रिया का पालन भी जरूरी होगा।
इस फैसले का असर राज्य की सरकारी सेवा व्यवस्था पर पड़ सकता है। साथ ही, बहुविवाह और समान नागरिक संहिता को लेकर कानूनी तथा सामाजिक बहस भी आगे बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
असम कैबिनेट ने बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है। संशोधित सेवा नियमों के तहत ऐसे कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किया जा सकेगा। उन्हें भविष्य में राज्य सरकार की नौकरी के लिए भी अयोग्य घोषित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय से जुड़ा कदम बताया है। अब इस फैसले का वास्तविक असर विभागीय कार्रवाई और संशोधित नियमों के लागू होने के तरीके से स्पष्ट होगा।

