हार के बाद ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी में बगावत: नेताओं ने रक्षा मंत्री को घेरा, बोले- ईरान जंग में फंसाया; टैरिफ से भी बिगड़ी बात
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी में अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर रिपब्लिकन नेतृत्व को बड़ा झटका दिया है। इसके बाद रिपब्लिकन नेताओं और पार्टी से जुड़े रणनीतिकारों ने ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
इस राजनीतिक संकट के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ निशाने पर आ गए हैं। रिपब्लिकन नेताओं और सहयोगियों के एक वर्ग का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित किया। उनके मुताबिक, इस युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति और बाहर निकलने की योजना नहीं थी।
पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि ईरान युद्ध और टैरिफ नीतियों ने आम अमेरिकी मतदाताओं की नाराजगी बढ़ाई। हालांकि, चुनावी हार के लिए केवल एक नीति को जिम्मेदार नहीं माना जा रहा है। महंगाई, जीवनयापन की लागत और सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष भी महत्वपूर्ण मुद्दे रहे।
पीट हेगसेथ पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं की नाराजगी तेजी से बढ़ी है। उनकी आलोचना करने वालों का कहना है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संभावित नतीजों को कम करके आंका।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के कुछ नेताओं और सहयोगियों ने निजी बातचीत में आरोप लगाया कि हेगसेथ ने ट्रम्प को युद्ध के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। उनका कहना है कि सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले युद्ध के संभावित विस्तार और राजनीतिक परिणामों पर पर्याप्त विचार नहीं हुआ।
रिपब्लिकन नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि ईरान के खिलाफ अभियान जल्दी समाप्त होने की उम्मीद गलत साबित हुई। संघर्ष लंबा खिंचने से अमेरिका पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ा। इसी वजह से अब पार्टी के भीतर रक्षा मंत्री की भूमिका की समीक्षा की मांग उठ रही है।
हालांकि, हेगसेथ ने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। पेंटागन के प्रवक्ता ने भी कहा है कि रक्षा मंत्री अपना काम जारी रखेंगे और राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होंगे।
हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग की चर्चा
चुनावी नतीजों के बाद पीट हेगसेथ की मुश्किलें केवल पार्टी के अंदरूनी विरोध तक सीमित नहीं हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चा भी तेज हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग पर मतदान कराने की योजना जताई है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं को उम्मीद है कि कांग्रेस में इस मुद्दे पर जल्द कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, महाभियोग की चर्चा और वास्तविक प्रक्रिया अलग-अलग बातें हैं। किसी प्रस्ताव पर मतदान, उसे पारित करना और पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के बाद रक्षा विभाग की नीतियों पर संसदीय जांच की संभावना भी बढ़ गई है। ऐसे में हेगसेथ को आने वाले समय में कांग्रेस के सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान युद्ध बना रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी चुनौती
ईरान के साथ अमेरिका का सैन्य संघर्ष ट्रम्प प्रशासन के लिए लगातार राजनीतिक चुनौती बनता गया। रिपब्लिकन नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि युद्ध को लेकर जनता में असंतोष बढ़ा और इसका असर चुनाव में दिखाई दिया।
एसोसिएटेड प्रेस के मतदाता सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग छह में से दस मतदाताओं ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को गलत फैसला बताया। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि युद्ध से असंतुष्ट मतदाताओं के बड़े हिस्से ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया।
हालांकि, युद्ध हर मतदाता के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं था। सर्वेक्षण के अनुसार, जीवनयापन की लागत और सरकारी भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताने वाले मतदाताओं की संख्या भी अधिक थी।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चुनावी हार के बाद ईरान युद्ध को नतीजों की प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी को यह विचार करना चाहिए कि क्या युद्ध की कीमत चुनाव में मिली हार के लायक थी।
वेंस का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह लंबे समय से विदेशों में लंबे सैन्य संघर्षों को लेकर सावधानी बरतने की बात करते रहे हैं। अब उनके बयान को ट्रम्प की नीति से दूरी बनाने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
टैरिफ नीति और महंगाई ने भी बढ़ाई मुश्किल
रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे केवल ईरान युद्ध ही नहीं, बल्कि ट्रम्प प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। ट्रम्प ने कई देशों से आने वाले सामान पर आयात शुल्क बढ़ाने की नीति अपनाई थी।
टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देना और व्यापारिक बातचीत में अमेरिका की स्थिति मजबूत करना बताया गया। लेकिन आलोचकों का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर सामान की कीमतों और आम उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है।
रिपब्लिकन रणनीतिकारों और सहयोगियों के बीच यह चिंता भी बढ़ी कि टैरिफ और आर्थिक अनिश्चितता ने मतदाताओं के भरोसे को प्रभावित किया। खासकर ऐसे समय में जब परिवार पहले से ही महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों का दबाव महसूस कर रहे थे।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिकन नेताओं और रणनीतिकारों ने ट्रम्प से नीतियों में बदलाव, व्हाइट हाउस में फेरबदल और टैरिफ जैसी नीतियों पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
जेडी वेंस ने भी युद्ध से बनाई दूरी
चुनावी हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान रिपब्लिकन पार्टी के भीतर बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत माना जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि ईरान युद्ध चुनावी हार की प्रमुख वजहों में शामिल रहा।
वेंस ने मतदाताओं की नाराजगी को जीवनयापन की लागत, युद्ध और अमेरिका की प्राथमिकताओं से भी जोड़ा। उनका बयान ट्रम्प के उस रुख से अलग दिखाई दिया, जिसमें राष्ट्रपति ने सैन्य कार्रवाई के फैसले का बचाव किया।
ट्रम्प ने चुनावी नतीजों के बाद भी कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने का फैसला सही था। उन्होंने रक्षा मंत्री हेगसेथ के कामकाज का समर्थन किया और उन्हें हटाने की योजना से इनकार किया।
इससे साफ है कि पार्टी के भीतर युद्ध को लेकर एक जैसी राय नहीं है। कुछ नेता इसे चुनावी नुकसान की वजह मान रहे हैं, जबकि ट्रम्प अपने फैसले को सही ठहरा रहे हैं।
ट्रम्प पर मंत्रिमंडल और व्हाइट हाउस में बदलाव का दबाव
चुनावी हार के बाद ट्रम्प प्रशासन में संभावित बदलावों की चर्चा भी शुरू हो गई है। रिपब्लिकन रणनीतिकारों का कहना है कि राष्ट्रपति को अपनी टीम और नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के कुछ नेताओं ने व्हाइट हाउस में अनुशासन बहाल करने और उन नीतियों को बदलने की मांग की है, जिन्हें वे चुनावी नुकसान की वजह मानते हैं।
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट में भी बताया गया कि ट्रम्प अपने सलाहकारों से हेगसेथ के भविष्य को लेकर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ने रक्षा मंत्री को हटाने का कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है।
डेमोक्रेट्स के कांग्रेस में बहुमत हासिल करने से ट्रम्प प्रशासन के लिए विधायी फैसले लेना कठिन हो सकता है। साथ ही, संसदीय समितियां प्रशासन की नीतियों और फैसलों की जांच कर सकती हैं।
आगे ट्रम्प के सामने क्या चुनौतियां होंगी?
चुनावी हार के बाद ट्रम्प के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर उन्हें अपनी पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी संभालनी होगी। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक बहुमत वाली कांग्रेस के साथ काम करना होगा।
ईरान युद्ध को लेकर रक्षा मंत्री की भूमिका, सैन्य रणनीति और खर्च की जांच राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती है। वहीं, टैरिफ नीति में बदलाव की मांग भी तेज हो सकती है।
रिपब्लिकन पार्टी के लिए 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी भी महत्वपूर्ण होगी। जेडी वेंस सहित कई नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए पार्टी में नेतृत्व और नीतियों को लेकर चर्चा बढ़ सकती है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ट्रम्प अपनी प्रमुख नीतियों में बदलाव करेंगे या नहीं। राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से युद्ध के फैसले का बचाव किया है। इसलिए आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर असहमति और व्हाइट हाउस के फैसले दोनों पर नजर रहेगी।
निष्कर्ष
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में हार के बाद ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आया है। पार्टी के कुछ नेता ईरान युद्ध के फैसले और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, टैरिफ और महंगाई से जुड़ी नीतियों को भी चुनावी नुकसान की वजह माना जा रहा है।
ट्रम्प फिलहाल अपनी नीतियों और रक्षा मंत्री का बचाव कर रहे हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स के कांग्रेस में बहुमत और रिपब्लिकन नेताओं की बढ़ती नाराजगी उनके लिए नई राजनीतिक चुनौती बन सकती है। आने वाले दिनों में हेगसेथ के भविष्य और ईरान नीति पर होने वाले फैसले अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करने में अहम होंगे।

