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वाराणसी के घाट डूबे, छतों पर आरती-अंतिम संस्कार; दिल्ली में ज्यादा बारिश, राजस्थान में मानसून कमजोर

न्यूज़ क्रिटिक - देश में मानसून के मिश्रित असर को दर्शाता ग्राफ़िक, जिसमें वाराणसी के जलमग्न घाट, दिल्ली में बारिश और राजस्थान के सूखे हालात को एक साथ दिखाया गया है।

देश के कई हिस्सों में मानसून का अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट डूब गए हैं। वहीं, दिल्ली में बारिश ने सामान्य से ज्यादा आंकड़ा दर्ज किया है। राजस्थान में इसके उलट मानसून कमजोर नजर आ रहा है।

काशी में हालात इतने बिगड़े कि मणिकर्णिका घाट के शवदाह प्लेटफॉर्म पानी में डूब गए। इसके बाद ऊंची जगह और छतों पर अंतिम संस्कार करना पड़ा। गंगा आरती भी कुछ जगहों पर छत से करनी पड़ी।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा

वाराणसी में गंगा लगातार उफान पर है। नदी का पानी बढ़ने से शहर के निचले इलाकों पर असर पड़ा है।

18 अगस्त को गंगा का जलस्तर 66.72 मीटर तक पहुंच गया था। उस समय नदी चेतावनी स्तर से करीब 3.54 मीटर नीचे थी और जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था।

इसके बाद घाटों पर बाढ़ का असर और बढ़ गया। कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गईं। आसपास के मंदिरों और गलियों तक भी पानी पहुंचने की खबर सामने आई।

मणिकर्णिका घाट पर छत पर अंतिम संस्कार

काशी के मणिकर्णिका घाट की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। घाट के शवदाह प्लेटफॉर्म पानी में डूब गए हैं।

ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए ऊंची जगहों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ मामलों में छत पर भी अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

घाट पर जगह कम होने के कारण शव लेकर पहुंचने वाले लोगों को इंतजार भी करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, एक समय में करीब 20 शवों का ही अंतिम संस्कार हो पा रहा है।

गंगा आरती भी छत पर करनी पड़ी

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। घाटों के डूबने के कारण नियमित जगहों पर आरती करना मुश्किल हो गया।

इसके बाद कुछ स्थानों पर ऊंची छतों से आरती की गई। काशी में गंगा आरती का विशेष धार्मिक महत्व है। इसलिए यह बदलाव स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए भी अलग अनुभव रहा।

बाढ़ की स्थिति के कारण घाटों पर आवाजाही भी प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

घाटों के आसपास बढ़ी परेशानी

गंगा का पानी बढ़ने के साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। कई जगहों पर पानी गलियों तक पहुंच गया है।

घाटों के आसपास रोजाना होने वाली गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। नाव संचालन पर भी रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए निगरानी बढ़ाई है। राहत और बचाव के लिए बाढ़ चौकियों की व्यवस्था भी की गई है।

दिल्ली में सामान्य से ज्यादा बारिश

उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों में भी मानसून सक्रिय है। दिल्ली में इस महीने बारिश सामान्य से अधिक रहने की स्थिति बनी है।

राजधानी में बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और यातायात की परेशानी देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग ने भी दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है।

22 अगस्त को मौसम विभाग से जुड़े अपडेट में दिल्ली समेत कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई गई। कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी हो सकती है।

दिल्ली-NCR में बारिश से क्या असर?

दिल्ली में ज्यादा बारिश का असर सड़कों पर भी दिखाई दे सकता है। निचले इलाकों में पानी जमा होने से यातायात धीमा पड़ सकता है।

बारिश के साथ तेज हवा और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

खासकर खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना भी बेहतर है।

राजस्थान में मानसून कमजोर

जहां उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश का असर दिख रहा है, वहीं राजस्थान में मानसून कमजोर रहने की स्थिति बनी हुई है।

राजस्थान में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं है। कुछ इलाकों में बारिश हो रही है, जबकि कई क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधि अपेक्षाकृत कमजोर है।

मौसम की यह असमान स्थिति राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तापमान और खेती पर असर डाल सकती है। आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधि पर नजर बनी रहेगी।

देशभर में मानसून का अलग-अलग असर

इस समय देश में मानसून एक समान तरीके से सक्रिय नहीं है। कुछ राज्यों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों में बारिश कमजोर है।

मौसम विभाग के अलग-अलग पूर्वानुमानों में भी कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। उत्तर भारत के साथ पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना बताई गई है।

इससे साफ है कि मानसून का असर क्षेत्र के हिसाब से अलग हो रहा है।

बाढ़ वाले इलाकों में बढ़ी चुनौती

वाराणसी जैसे नदी किनारे बसे शहरों में जलस्तर बढ़ने का असर ज्यादा तेजी से दिखाई देता है। घाटों और निचले इलाकों में पानी पहुंचने से सामान्य गतिविधियां रुक जाती हैं।

ऐसे समय में प्रशासन के सामने राहत और सुरक्षा दोनों बड़ी चुनौती होती हैं। लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाना और जरूरी सेवाएं जारी रखना भी जरूरी होता है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर में कमी आने तक घाटों पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा असर

वाराणसी में घाट केवल पर्यटन स्थल नहीं हैं। यहां रोजाना धार्मिक अनुष्ठान और अंतिम संस्कार भी होते हैं।

बाढ़ के कारण इन गतिविधियों को वैकल्पिक स्थानों पर करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए जगह की कमी भी बड़ी समस्या बन गई है।

गंगा आरती को भी ऊंची जगह पर ले जाना पड़ा है। इससे बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मौसम विभाग की चेतावनी पर ध्यान जरूरी

बारिश और बाढ़ के बीच मौसम विभाग लगातार अपडेट जारी कर रहा है। 22 अगस्त के पूर्वानुमान में कई राज्यों के लिए भारी बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है।

ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करना चाहिए। नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी रखना जरूरी है।

यात्रा करने वाले लोगों को भी मौसम की स्थिति देखकर ही योजना बनानी चाहिए। भारी बारिश के दौरान सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।

आने वाले दिनों में कैसी रहेगी स्थिति?

वाराणसी में गंगा के जलस्तर पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी। अगर नदी का पानी और बढ़ता है, तो आसपास के इलाकों में परेशानी बढ़ सकती है।

दिल्ली में भी बारिश का दौर जारी रहने पर जलभराव और यातायात की समस्या सामने आ सकती है। दूसरी ओर, राजस्थान में कमजोर मानसून के बीच बारिश की गतिविधि में बदलाव का इंतजार रहेगा।

मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है। इसलिए अगले कुछ दिनों के स्थानीय पूर्वानुमान महत्वपूर्ण होंगे।

निष्कर्ष

देश में मानसून का असर इस समय अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट डूब गए हैं और मणिकर्णिका घाट पर छतों पर अंतिम संस्कार तक करना पड़ रहा है।

दिल्ली में बारिश सामान्य से ज्यादा रहने के बीच मौसम विभाग ने आगे भी कई इलाकों में बारिश का अलर्ट दिया है। वहीं, राजस्थान में मानसून अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है।

फिलहाल वाराणसी के लिए गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता है। दिल्ली में भारी बारिश के कारण जलभराव का खतरा बना हुआ है। लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

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