अमेरिका-कनाडा ट्रेड वॉर: बातचीत फेल होने के बाद अमेरिका ने लगाया 50% टैरिफ, कनाडा का जवाबी कार्रवाई का ऐलान
अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच कई दिनों से चल रही व्यापार वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी।
इसके बाद अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी अमेरिका को जवाब देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का डॉलर-फॉर-डॉलर जवाब देगा।
अमेरिका ने कनाडा पर क्यों लगाया 50% टैरिफ?
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने कनाडा की कुछ व्यापार नीतियों को अमेरिकी कारोबार के लिए अनुचित बताया है।
इन्हीं मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही थी। हालांकि, अंतिम समय में दोनों पक्ष किसी समझौते पर सहमत नहीं हो सके।
अमेरिका ने इसके बाद करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। ये शुल्क शनिवार से प्रभावी हुए।
तीन दिन की मोहलत भी नहीं बचा पाई डील
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले 50% टैरिफ लागू करने की समयसीमा को तीन दिन के लिए बढ़ाया था। इसका मकसद दोनों देशों को बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देना था।
इस दौरान बातचीत में कुछ प्रगति की खबरें भी सामने आई थीं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 18 अगस्त को कहा था कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम बाकी है।
आखिरकार यह अतिरिक्त समय भी किसी अंतिम समझौते के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
अमेरिका ने किन सामानों पर लगाया टैरिफ?
नए 50% टैरिफ का असर कनाडा से अमेरिका भेजे जाने वाले कई उत्पादों पर पड़ेगा। इनमें कुछ रोजमर्रा और औद्योगिक सामान शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रभावित सामानों में हॉकी स्टिक, निर्माण सामग्री और कुछ अन्य उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, यह शुल्क कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल निर्यात के करीब 5% हिस्से को प्रभावित करता है।
इसका मतलब यह है कि टैरिफ का दायरा कनाडा के पूरे अमेरिकी निर्यात पर नहीं है। फिर भी इसका राजनीतिक और आर्थिक असर बड़ा हो सकता है।
कनाडा ने भी दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिका के कदम के तुरंत बाद कनाडा ने भी सख्त रुख अपनाया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का बराबर जवाब देगा।
कार्नी ने इसे डॉलर-फॉर-डॉलर प्रतिक्रिया बताया। साथ ही, उन्होंने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता को रोकने और कनाडाई वार्ताकारों को वापस बुलाने का फैसला किया।
इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।
बातचीत आखिर क्यों टूटी?
दोनों देशों के बीच बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश हुई। इनमें स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो सेक्टर से जुड़े टैरिफ भी शामिल थे।
कनाडा ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बातचीत के आखिरी चरण में अपनी शर्तों में बदलाव किया। कार्नी ने इन बदलावों को अनुचित और कनाडा के आर्थिक हितों के खिलाफ बताया।
दूसरी ओर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने कहा कि कनाडा ने पहले से तय शर्तों पर समझौता करने से इनकार किया। दोनों देशों के बयान से साफ है कि वार्ता टूटने के लिए दोनों एक-दूसरे को जिम्मेदार मान रहे हैं।
अमेरिका और कनाडा के बीच कितना बड़ा व्यापार?
अमेरिका और कनाडा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार का आकार बहुत बड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल दोनों देशों ने करीब 880 अरब डॉलर के सामान और सेवाओं का व्यापार किया था।
ऐसे में टैरिफ बढ़ने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। खासकर उन कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, जिनकी सप्लाई चेन दोनों देशों में फैली हुई है।
कनाडा के कारोबार पर क्या होगा असर?
कनाडा के कई कारोबारी अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। नए टैरिफ से उनके उत्पाद अमेरिका में महंगे हो सकते हैं।
इससे कनाडाई कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। कुछ कंपनियां लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
दूसरी ओर, कुछ कंपनियां अमेरिका के बाहर नए बाजार तलाश सकती हैं। इससे कनाडा की व्यापार नीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी कंपनियों और ग्राहकों पर भी असर
टैरिफ का असर सिर्फ कनाडा तक सीमित नहीं रहता। अमेरिका में भी आयातित सामान की लागत बढ़ सकती है।
अगर कनाडाई उत्पाद महंगे होते हैं, तो अमेरिकी कंपनियों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।
यही वजह है कि ट्रेड वॉर लंबे समय तक चलने पर महंगाई और कारोबार की लागत पर असर डालने की चिंता बढ़ती है।
USMCA समझौते पर भी संकट
अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच USMCA मुक्त व्यापार समझौता लागू है। यह समझौता उत्तर अमेरिकी व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
नए टैरिफ विवाद के कारण इस समझौते के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच मौजूदा तनाव से भविष्य की व्यापार वार्ता और मुश्किल हो सकती है।
अगर दोनों देशों के बीच तनाव लंबा चलता है, तो इसका असर उत्तर अमेरिकी सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
किन सेक्टरों पर ज्यादा दबाव?
ट्रेड वॉर का असर अलग-अलग सेक्टर पर अलग हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में टैरिफ पहले से ही तनाव का कारण बने हुए हैं।
खास तौर पर इन क्षेत्रों पर नजर रहेगी:
- ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स
- स्टील और एल्युमिनियम
- निर्माण सामग्री
- कृषि और डेयरी उत्पाद
- खाद्य और पेय पदार्थ
- रोजमर्रा के कुछ उपभोक्ता उत्पाद
इन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन काफी मजबूत है। इसलिए व्यापार बाधित होने पर कंपनियों को नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।
कनाडा ने बातचीत क्यों रोकी?
मार्क कार्नी ने कहा कि बातचीत में हुई प्रगति कनाडा के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके बाद उन्होंने व्यापार वार्ता को निलंबित कर दिया।
कनाडा चाहता है कि उसके कारोबारियों को अमेरिकी बाजार तक व्यापक पहुंच बनी रहे। साथ ही, वह प्रमुख सेक्टरों पर लगने वाले टैरिफ को कम करने की कोशिश कर रहा था।
अब बातचीत रुकने से दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना फिलहाल कमजोर हुई है।
क्या ट्रेड वॉर और बढ़ सकता है?
अमेरिका के 50% टैरिफ के जवाब में कनाडा ने बराबर कार्रवाई की बात कही है। ऐसे में दोनों देशों के बीच शुल्क की नई श्रृंखला शुरू होने का खतरा है।
अगर दोनों पक्ष लगातार नए टैरिफ लगाते हैं, तो कारोबारियों पर दबाव बढ़ेगा। इसके साथ ही सप्लाई चेन और निवेश पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, व्यापारिक रिश्ते इतने बड़े हैं कि लंबे समय तक टकराव दोनों देशों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कनाडा ने बातचीत रोक दी है। अमेरिका की ओर से भी नए टैरिफ लागू हो चुके हैं।
अब दोनों देशों के सामने दो रास्ते हैं। पहला रास्ता लंबे समय तक टैरिफ युद्ध जारी रखना है। दूसरा रास्ता फिर से बातचीत शुरू करके किसी समझौते तक पहुंचना है।
आने वाले दिनों में दोनों सरकारों के बयान और नए व्यापारिक फैसले काफी महत्वपूर्ण होंगे।
भारत पर भी पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार तनाव का असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रह सकता। वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव होने पर दूसरे देशों के कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।
अगर कंपनियां नए बाजार और सप्लायर तलाशती हैं, तो भारत जैसे बड़े बाजारों के लिए नए अवसर बन सकते हैं। दूसरी ओर, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ने से कुछ क्षेत्रों पर दबाव भी आ सकता है।
हालांकि, भारत पर सीधा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका-कनाडा का विवाद कितने समय तक चलता है और दोनों देश आगे क्या कदम उठाते हैं।
निष्कर्ष
अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया है।
कनाडा ने भी इसका जवाब देने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ डॉलर-फॉर-डॉलर कार्रवाई की बात कही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों देश फिर बातचीत की मेज पर कब लौटते हैं। अगर विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर कारोबार, सप्लाई चेन और उपभोक्ताओं पर भी देखने को मिल सकता है।

