महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों को नहीं देनी होगी हिंदी परीक्षा, 7 मई से लागू हुआ फैसला
महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को स्थायी रूप से खत्म कर दिया गया है। राज्य सरकार के मराठी भाषा विभाग ने 31 अगस्त 2026 को इस संबंध में शासन निर्णय जारी किया। खास बात यह है कि इस फैसले को 7 मई 2026 से प्रभावी माना गया है।
करीब सात दशक से चली आ रही इस व्यवस्था को खत्म करने के पीछे सरकार ने सरकारी कामकाज में हिंदी के बेहद कम इस्तेमाल को प्रमुख वजह बताया है। राज्य सरकार के मुताबिक महाराष्ट्र में आधिकारिक कामकाज मुख्य रूप से मराठी में होता है, जबकि केंद्र और दूसरे राज्यों के साथ पत्राचार में अंग्रेजी का इस्तेमाल ज्यादा होता है।
महाराष्ट्र हिंदी परीक्षा क्यों की गई खत्म?
महाराष्ट्र सरकार ने अपने शासन निर्णय में कहा है कि राज्य गठन के बाद से सरकारी कामकाज के लिए मराठी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। महाराष्ट्र राजभाषा कानून और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए सरकारी कर्मचारियों पर हिंदी भाषा परीक्षा की अनिवार्यता को उचित नहीं माना गया।
सरकार के अनुसार राज्य के सरकारी कामकाज में हिंदी का इस्तेमाल बहुत सीमित है। वहीं केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों के साथ होने वाला आधिकारिक पत्राचार मुख्य रूप से अंग्रेजी में होता है।
इसी आधार पर सरकार ने भाषा संचालनालय की ओर से आयोजित की जाने वाली अनिवार्य हिंदी परीक्षा को समाप्त करने का फैसला किया है।
कब से लागू माना जाएगा फैसला?
महाराष्ट्र सरकार का नया शासन निर्णय 31 अगस्त 2026 को जारी हुआ है, लेकिन इसमें साफ किया गया है कि इसका प्रभाव 7 मई 2026 से माना जाएगा।
यानी हिंदी भाषा परीक्षा को स्थगित किए जाने की तारीख 7 मई 2026 से ही इस परीक्षा को खत्म करने का निर्णय प्रभावी माना जाएगा। शासन निर्णय में यह भी कहा गया है कि हिंदी परीक्षा से जुड़े पहले जारी किए गए संबंधित शासन निर्णय, परिपत्र और आदेश इस नए फैसले के तहत अधिक्रमित किए जाते हैं।
इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों के लिए आगे इस अनिवार्य परीक्षा की बाध्यता नहीं रहेगी।
किन सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा फैसला?
यह परीक्षा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भाषा संबंधी अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा थी। ताजा रिपोर्टों के अनुसार यह नियम राजपत्रित और गैर-राजपत्रित अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लागू था।
अब इस परीक्षा को स्थायी रूप से रद्द करने के बाद सरकारी कर्मचारियों को हिंदी भाषा की अनिवार्य परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि, अलग-अलग विभागों के सेवा नियमों में भाषा संबंधी विशेष प्रावधान हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष पद या भर्ती के मामले में संबंधित सेवा नियमों को अलग से देखना जरूरी होगा।
करीब सात दशक पुरानी थी व्यवस्था
महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी दक्षता परीक्षा की व्यवस्था काफी पुरानी है। रिपोर्टों के मुताबिक यह परीक्षा 1950 के दशक में शुरू की गई थी और करीब सात दशक तक अलग-अलग रूपों में सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू रही।
समय के साथ राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में मराठी का इस्तेमाल प्रमुख बना रहा। इसके अलावा सरकारी स्तर पर अंग्रेजी का इस्तेमाल भी बढ़ा। ऐसे में हिंदी परीक्षा की उपयोगिता को लेकर सरकार ने समीक्षा की।
अब इसी समीक्षा के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इसे पूरी तरह खत्म करने का फैसला लिया है।
पहले मई में परीक्षा पर लगी थी रोक
इस फैसले से पहले मई 2026 में महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए होने वाली हिंदी भाषा परीक्षा पर रोक लगा दी थी। उस समय इसे स्थगित करने का फैसला बताया गया था।
इसके बाद सरकार ने इस व्यवस्था की समीक्षा की और 31 अगस्त को इसे स्थायी रूप से खत्म करने का शासन निर्णय जारी कर दिया।
इस तरह मई में शुरू हुई प्रक्रिया अब स्थायी फैसले में बदल गई है।
मराठी और अंग्रेजी का सरकारी कामकाज में इस्तेमाल
महाराष्ट्र सरकार का तर्क है कि राज्य के प्रशासनिक कामकाज में मराठी की प्रमुख भूमिका है। महाराष्ट्र राजभाषा व्यवस्था के तहत सरकारी कामकाज में मराठी का इस्तेमाल किया जाता है।
वहीं केंद्र सरकार, दूसरे राज्यों और विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के साथ होने वाले पत्राचार में अंग्रेजी का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में होता है। ऐसे में सरकार ने हिंदी की अनिवार्य परीक्षा को प्रशासनिक जरूरत के लिहाज से गैर-जरूरी माना है।
सरकार का यह फैसला भाषा और प्रशासन से जुड़े मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या अब कर्मचारियों को हिंदी सीखने से छूट मिल गई?
फैसले का सीधा मतलब यह है कि अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा नहीं देनी होगी। इसका यह अर्थ नहीं है कि महाराष्ट्र सरकार ने हिंदी भाषा के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध लगाया है।
जो कर्मचारी अपनी इच्छा से हिंदी सीखना या इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं। फैसला सिर्फ सरकारी कर्मचारियों पर लागू अनिवार्य परीक्षा व्यवस्था को समाप्त करता है।
यानी हिंदी सीखना या बोलना प्रतिबंधित नहीं हुआ है, बल्कि परीक्षा पास करने की अनिवार्यता खत्म हुई है।
भाषा को लेकर महाराष्ट्र में क्यों अहम है फैसला?
महाराष्ट्र में भाषा का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा रहा है। मराठी भाषा को लेकर राज्य में कई संगठन और राजनीतिक दल सक्रिय रहे हैं।
ऐसे में सरकारी कर्मचारियों की हिंदी परीक्षा खत्म करने का फैसला केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि भाषा नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार ने हालांकि अपने निर्णय का आधार राजनीतिक विरोध के बजाय सरकारी कामकाज में हिंदी के सीमित इस्तेमाल और प्रशासनिक जरूरतों को बताया है।
कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
हिंदी परीक्षा खत्म होने से सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अतिरिक्त परीक्षा संबंधी आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। खासकर उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें सेवा के दौरान निर्धारित समय के भीतर भाषा परीक्षा पास करनी पड़ती थी।
पहले कुछ सेवा नियमों में हिंदी और मराठी भाषा परीक्षा पास करने से जुड़ी शर्तें भी थीं। कुछ पदों पर परीक्षा पास नहीं करने की स्थिति में वेतन वृद्धि या पदोन्नति से संबंधित प्रभाव का प्रावधान मौजूद था।
अब हिंदी परीक्षा से संबंधित पुरानी व्यवस्था को खत्म किए जाने के बाद ऐसे प्रावधानों पर भी इस नए शासन निर्णय का प्रभाव पड़ेगा।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया है। 31 अगस्त 2026 को जारी शासन निर्णय के मुताबिक यह फैसला 7 मई 2026 से प्रभावी माना गया है।
सरकार ने इसके पीछे सरकारी कामकाज में हिंदी के बेहद कम इस्तेमाल को वजह बताया है। अब महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी के दौरान अनिवार्य हिंदी परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होगी। यह बदलाव करीब सात दशक पुरानी व्यवस्था के अंत के तौर पर देखा जा रहा है।

