पटना में गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड, गांधी घाट पर 50.53 मीटर पहुंचा जलस्तर
बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर बढ़कर 50.53 मीटर पहुंच गया है, जिसने वर्ष 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के उच्चतम स्तर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के कारण पटना समेत गंगा किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग ने भी अगले दिन जलस्तर में और वृद्धि का अनुमान जताया है।
गांधी घाट पर गंगा ने 2016 का रिकॉर्ड तोड़ा
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर शनिवार को 50.53 मीटर दर्ज किया गया। यह 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से एक सेंटीमीटर ज्यादा है।
बिहार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों में गांधी घाट का उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर दर्ज है, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है। इसका मतलब है कि नदी इस समय खतरे के निशान से करीब 1.93 मीटर ऊपर बह रही है।
लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खासकर नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
चार घंटे में 10 सेंटीमीटर बढ़ा पानी
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार भी चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार गांधी घाट पर करीब चार घंटे के भीतर जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण बाढ़ का पानी निचले इलाकों की ओर पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
गंगा के अलावा बिहार की कई अन्य नदियां भी उफान पर हैं। इससे राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।
6 सितंबर को और बढ़ सकता है जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के मुताबिक गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 6 सितंबर की सुबह तक 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो मौजूदा रिकॉर्ड से अंतर और बढ़ जाएगा।
इस पूर्वानुमान के बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए लोगों से नदी, घाट और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है।
पटना के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा
गंगा के जलस्तर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर निचले इलाकों पर पड़ सकता है। नदी के आसपास बसे क्षेत्रों में पानी घुसने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
पटना के अलावा भोजपुर, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद जैसे जिलों के संवेदनशील इलाकों में भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए SDRF और NDRF की मदद लेने की तैयारी भी रखी गई है।
बिहार की कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में बाढ़ का खतरा केवल गंगा तक सीमित नहीं है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है।
नदियों में बढ़ते पानी का असर ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। कई निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन की समस्या पैदा हो गई है।
ऐसे में प्रशासन के सामने राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती है।
33 रेस्क्यू टीम और करीब 700 नावें तैनात
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के संवेदनशील इलाकों में NDRF की 6 और SDRF की 27 टीमों समेत कुल 33 बचाव दल तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा करीब 700 सरकारी नावों को भी राहत और बचाव कार्यों में लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
पटना, भागलपुर, मुंगेर और वैशाली समेत कई जिलों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
प्रशासन ने लोगों को दी सावधानी बरतने की सलाह
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी और घाटों के आसपास जाने से बचने की अपील की है। जलभराव वाले क्षेत्रों में भी अनावश्यक आवाजाही से बचने को कहा गया है।
लोगों को खास तौर पर इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- नदी और घाट के पास जाने से बचें।
- जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखें।
- बच्चों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में न जाने दें।
- जरूरी सामान और दवाइयां पहले से सुरक्षित रखें।
- प्रशासन की चेतावनी और निर्देशों का पालन करें।
- अफवाहों पर ध्यान न दें।
- आपात स्थिति में प्रशासन की मदद लें।
2016 की बाढ़ की याद हुई ताजा
गांधी घाट पर 2016 में गंगा का जलस्तर 50.52 मीटर तक पहुंचा था। उस समय गंगा और उसकी सहायक नदियों में लंबे समय तक बाढ़ की स्थिति बनी रही थी। बिहार विधानसभा के रिकॉर्ड में भी 21 अगस्त 2016 को गांधी घाट पर 50.52 मीटर का उच्चतम जलस्तर दर्ज होने की पुष्टि होती है।
अब 10 साल बाद इसी स्तर का रिकॉर्ड टूटने से उस समय की बाढ़ की याद फिर ताजा हो गई है। हालांकि वर्तमान स्थिति को 2016 जैसी बाढ़ मानने से पहले आगे के जलस्तर और प्रशासन की रिपोर्ट देखना जरूरी होगा।
दीघा घाट और दूसरे इलाकों पर भी नजर
पटना में केवल गांधी घाट ही नहीं, बल्कि दीघा घाट और हाथीदह जैसे निगरानी केंद्रों पर भी गंगा के जलस्तर को लगातार मापा जा रहा है। बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों में इन स्थानों पर भी पानी का स्तर लगातार ऊंचा दर्ज किया गया है।
दीघा घाट का उच्चतम बाढ़ स्तर 52.52 मीटर है, जबकि हाथीदह का उच्चतम स्तर 43.52 मीटर दर्ज किया गया है। ऐसे में इन इलाकों में भी जलस्तर की निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
राहत और बचाव कार्यों पर प्रशासन की नजर
बिहार सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामान समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेकर अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने और तटबंधों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
आने वाले 24 से 48 घंटे स्थिति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि गंगा के जलस्तर में और बढ़ोतरी का अनुमान है।
निष्कर्ष
पटना के गांधी घाट पर गंगा जलस्तर 50.53 मीटर पहुंचने के साथ 2016 का 50.52 मीटर का रिकॉर्ड टूट गया है। जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच चुका है और केंद्रीय जल आयोग ने इसमें और वृद्धि का अनुमान जताया है।
गंगा के साथ बिहार की कई अन्य नदियों में भी उफान के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लोगों को प्रशासन की चेतावनियों का पालन करते हुए नदी, घाट और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

