कर्नाटक में SIR पर बढ़ा विवाद; बेंगलुरु के मल्लेश्वरम में 778 ‘फॉर्म-7’ आवेदनों पर धांधली के आरोप, FIR दर्ज!
कर्नाटक SIR विवाद अब बेंगलुरु के मल्लेश्वरम तक पहुंच गया है। यहां 778 फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर पुलिस ने FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी जांच चल रही है।
यह मामला मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 64 से जुड़ा है। पुलिस अब इन आवेदनों, उनमें दर्ज जानकारी और हस्ताक्षरों की जांच कर रही है। मामले ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
कर्नाटक SIR विवाद में क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान मल्लेश्वरम क्षेत्र में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन सामने आए। इन आवेदनों में 778 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग किए जाने का आरोप है।
कांग्रेस नेता अनूप अय्यंगार ने 2 अक्टूबर को व्यालिकावल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि कुछ मतदाता अभी भी अपने पते पर रह रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें दूसरी जगह चले गए या अनुपस्थित बताया गया।
शिकायत के अनुसार, इन आवेदनों का इस्तेमाल मतदाता सूची में बदलाव के लिए किया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि सभी 778 आवेदन गलत थे।
778 आवेदन आठ मतदान हिस्सों में दर्ज हुए
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 778 आवेदन एक ही जगह से नहीं आए थे। ये आवेदन मल्लेश्वरम के वार्ड नंबर 64 के आठ मतदान हिस्सों से जुड़े बताए गए हैं।
शिकायत में आवेदनों का विवरण इस तरह दिया गया है:
- मतदान हिस्सा 155 में 233 आवेदन
- मतदान हिस्सा 205 में 171 आवेदन
- मतदान हिस्सा 157 में 122 आवेदन
- मतदान हिस्सा 153 में 104 आवेदन
- मतदान हिस्सा 203 में 68 आवेदन
- मतदान हिस्सा 154 में 47 आवेदन
- मतदान हिस्सा 156 में 28 आवेदन
- मतदान हिस्सा 158 में 5 आवेदन
इन सभी आंकड़ों का कुल योग 778 है। अब जांच एजेंसियां यह पता करेंगी कि आवेदन किसने तैयार किए और किस आधार पर जमा किए गए।
मामले की अहम बात यह है कि शिकायत में कई मतदाताओं के अभी भी उसी क्षेत्र में रहने का दावा किया गया है। इसलिए आवेदन में दी गई जानकारी की सत्यता जांच का मुख्य हिस्सा बन गई है।
फॉर्म-7 क्या होता है?
फॉर्म-7 मतदाता सूची से जुड़ी आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा है। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इसका इस्तेमाल किसी मतदाता के नाम को हटाने पर आपत्ति दर्ज करने के लिए किया जा सकता है।
इसके अलावा, कोई मतदाता अपना नाम हटाने के लिए भी फॉर्म-7 का इस्तेमाल कर सकता है। इसमें मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने या अन्य निर्धारित कारणों का उल्लेख किया जा सकता है।
हालांकि, फॉर्म-7 में दी गई जानकारी सही होना जरूरी है। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों में गलत घोषणा को दंडनीय बताया गया है। इसी वजह से मल्लेश्वरम में जमा हुए आवेदनों की सत्यता की जांच अहम हो गई है।
हस्ताक्षरों को लेकर भी उठे सवाल
मामले में केवल मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप ही नहीं हैं। शिकायत में कुछ फॉर्म पर मौजूद हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कई आवेदन जीएस वसंथा लक्ष्मी के नाम से जमा किए गए। उन्हें शिकायत में बीजेपी की बूथ लेवल एजेंट के रूप में बताया गया है।
शिकायत के अनुसार, अलग-अलग फॉर्म पर उनके नाम से किए गए हस्ताक्षरों में अंतर दिखाई देता है। इससे यह सवाल उठाया गया कि क्या सभी आवेदन एक ही व्यक्ति ने जमा किए थे।
हालांकि, यह अभी शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। पुलिस दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांच के बाद ही इस बारे में निष्कर्ष निकाल सकेगी।
FIR में किन आरोपों की जांच हो रही है?
व्यालिकावल पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की है। इसमें गलत जानकारी देने, फर्जी दस्तावेज और मतदाता रिकॉर्ड से छेड़छाड़ जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, FIR में जीएस वसंथा लक्ष्मी को आरोपी नंबर एक बनाया गया है। एक अन्य व्यक्ति को कथित रूप से आरएसएस से जुड़े व्यक्ति के रूप में अज्ञात आरोपी बताया गया है।
पुलिस ने अभी आरोपों को साबित नहीं माना है। जांच अधिकारी यह देख रहे हैं कि आवेदन में दर्ज जानकारी सही थी या नहीं। साथ ही, दस्तावेज किसने तैयार किए और किसने जमा किए, इसकी भी पड़ताल होगी।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
शिकायतकर्ता अनूप अय्यंगार ने आरोप लगाया है कि पात्र मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश की गई। उनका दावा है कि कुछ मतदाता अपने पुराने पते पर रह रहे हैं। इसके बावजूद उनके नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों ने आवेदन तैयार करने या जमा करने में भूमिका निभाई। शिकायत में बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि, इन दावों को अभी पुलिस जांच में साबित किया जाना बाकी है। इसलिए इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बीजेपी ने FIR पर क्या कहा?
दूसरी ओर, बीजेपी ने फॉर्म-7 से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक एमए सलीम से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने FIR की समीक्षा की मांग की।
बीजेपी का कहना है कि फॉर्म-7 निर्वाचन प्रक्रिया का वैध हिस्सा है। पार्टी ने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में आवेदन जमा होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता।
बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि हर आवेदन की वैधता की जांच सबूतों के आधार पर होनी चाहिए। वहीं, चुनाव अधिकारियों ने गलत जानकारी देने वाले आवेदकों पर कार्रवाई की बात कही है।
SIR प्रक्रिया में क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
मतदाता सूची में नाम जोड़ना और हटाना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने से उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
वहीं, गलत या अपात्र नामों को सूची से हटाना भी जरूरी है। इसी वजह से फॉर्म-7 जैसी प्रक्रिया में सही जानकारी और जांच दोनों जरूरी होते हैं।
मल्लेश्वरम का मामला इसी संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण है। एक तरफ गलत दावों की पहचान जरूरी है। दूसरी ओर, पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना भी उतना ही अहम है।
आगे क्या होगी पुलिस की कार्रवाई?
अब पुलिस 778 आवेदनों की जांच करेगी। सबसे पहले फॉर्म में दर्ज जानकारी और संबंधित मतदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।
इसके अलावा, हस्ताक्षरों की जांच भी की जाएगी। आवेदन जमा करने वाले लोगों और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
अगर किसी आवेदन में जानबूझकर गलत जानकारी मिलती है, तो कानून के अनुसार आगे कार्रवाई हो सकती है। वहीं, अगर आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो जांच के नतीजे उसी आधार पर सामने आएंगे।
कर्नाटक में फॉर्म-7 को लेकर पहले भी विवाद
मल्लेश्वरम की घटना अकेली नहीं है। कर्नाटक में SIR के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन सामने आने को लेकर पहले भी विवाद हुआ है।
इसी बीच बीजेपी ने फॉर्म-7 मामलों में अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR को लेकर पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि वैध चुनावी प्रक्रिया में आवेदन करना अपराध नहीं माना जाना चाहिए।
वहीं, चुनाव अधिकारियों ने गलत जानकारी या झूठी घोषणा के मामलों में कानूनी कार्रवाई की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।
निष्कर्ष
कर्नाटक SIR विवाद में मल्लेश्वरम के 778 फॉर्म-7 आवेदन अब पुलिस जांच के केंद्र में हैं। शिकायत में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने और गलत जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने FIR दर्ज कर दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांच शुरू कर दी है।
हालांकि, अभी किसी आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संगठन को दोषी मानना उचित नहीं होगा। अब पुलिस और चुनाव अधिकारियों की जांच से ही साफ होगा कि इन 778 आवेदनों में वास्तविक गड़बड़ी कितनी थी।

