लॉस एंजिल्स में केरल मूल की नित्या रमन ने रचा इतिहास, बनीं पहली दक्षिण एशियाई मेयर
अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर में भारतीय मूल की नित्या रमन ने इतिहास रच दिया है। केरल में जन्मी नित्या रमन ने मेयर चुनाव में मौजूदा मेयर करेन बास को हराकर जीत हासिल की है। इस जीत के साथ वह लॉस एंजिल्स की पहली दक्षिण एशियाई और एशियाई अमेरिकी मेयर बनने जा रही हैं। उनकी सफलता को अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की राजनीतिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नित्या रमन की जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने मौजूदा मेयर को चुनाव में पराजित किया है। करेन बास ने गुरुवार को अपनी हार स्वीकार करते हुए नित्या रमन को जीत की बधाई दी। उन्होंने सत्ता के सुचारु हस्तांतरण में सहयोग करने की बात भी कही। इस चुनाव के नतीजे ने लॉस एंजिल्स की राजनीति में नए नेतृत्व की शुरुआत का रास्ता खोल दिया है।
करेन बास को हराकर हासिल की जीत
लॉस एंजिल्स में 3 नवंबर 2026 को मेयर पद के लिए मतदान हुआ था। इस चुनाव में नित्या रमन और मौजूदा मेयर करेन बास के बीच मुकाबला हुआ। शुरुआती मतगणना में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला।
हालांकि, बाद में आने वाले डाक मतपत्रों की गिनती के साथ नित्या रमन आगे निकल गईं। लॉस एंजिल्स टाइम्स की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध मतगणना में नित्या रमन को लगभग 52 प्रतिशत और करेन बास को 48 प्रतिशत वोट मिले थे। उस समय लगभग 76 प्रतिशत संभावित मतों की गिनती पूरी हुई थी।
इसके बाद करेन बास ने अपनी हार स्वीकार कर ली। उन्होंने नित्या रमन को फोन करके जीत की बधाई दी और शहर में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारु बनाने का भरोसा दिया।
नित्या रमन ने भी अपनी जीत पर खुशी जताई और लॉस एंजिल्स के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह शहर के निवासियों का भरोसा जीतने और उनकी समस्याओं पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केरल के त्रिशूर में हुआ था जन्म
नित्या रमन का भारत से गहरा संबंध है। उनका जन्म वर्ष 1981 में केरल के त्रिशूर में हुआ था। उनके पिता वेंकटरमन और मां सुधा केचरी केरल में रहते थे। बाद में उनके पिता की उच्च शिक्षा के सिलसिले में परिवार अमेरिका चला गया।
नित्या जब लगभग छह वर्ष की थीं, तब उनका परिवार अमेरिका में बस गया। उन्होंने वहीं अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षा हासिल की।
हार्वर्ड से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MIT से अर्बन प्लानिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने शहरों के विकास, आवास और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी समझ को मजबूत किया।
हालांकि, अमेरिका में पढ़ाई और करियर बनाने के बावजूद उनका भारत से जुड़ाव बना रहा। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन के दौरान भारत में भी सामाजिक और शहरी विकास से जुड़े काम किए।
भारत में झुग्गी बस्तियों के लिए भी किया काम
नित्या रमन का सामाजिक कार्यों से जुड़ाव राजनीति में आने से पहले ही शुरू हो गया था। अमेरिका में शिक्षा पूरी करने के बाद वह भारत लौटीं और दिल्ली में गैर-सरकारी संगठनों के साथ काम किया।
इस दौरान उन्होंने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को समझने और उनके अधिकारों के लिए काम करने पर ध्यान दिया। वर्ष 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों से पहले दिल्ली में झुग्गी बस्तियों को हटाने के मुद्दे पर भी उन्होंने प्रभावित लोगों के साथ काम किया।
इसके बाद वह चेन्नई पहुंचीं। यहां उन्होंने 2010 में ट्रांसपेरेंट चेन्नई नाम की पहल शुरू की। इस पहल के माध्यम से शहर की सार्वजनिक सुविधाओं, स्वच्छता और झुग्गी बस्तियों से जुड़े आंकड़ों को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया।
इस काम का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने में मदद करना था, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। उनके इन अनुभवों ने आगे चलकर शहरी प्रशासन और आवास से जुड़े मुद्दों पर उनके काम को दिशा दी।
2020 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर
नित्या रमन ने वर्ष 2020 में लॉस एंजिल्स की स्थानीय राजनीति में कदम रखा। उन्होंने सिटी काउंसिल के डिस्ट्रिक्ट 4 से चुनाव लड़ा और तत्कालीन पार्षद डेविड रयू को हराया।
इस जीत के साथ वह लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई और पहली एशियाई अमेरिकी महिला बनीं। वर्ष 2024 में उन्होंने दोबारा चुनाव जीतकर अपना कार्यकाल जारी रखा।
सिटी काउंसिल में रहते हुए उन्होंने आवास, बेघर लोगों की समस्या और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर काम किया। वह शहर की हाउसिंग एंड होमलेसनेस कमेटी की अध्यक्ष भी रहीं।
उनके राजनीतिक सफर में शहरी नियोजन का अनुभव महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन में रहते हुए आवास की उपलब्धता और शहर की बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
आवास और बेघर लोगों की समस्या रही चुनाव का प्रमुख मुद्दा
लॉस एंजिल्स अमेरिका के बड़े शहरों में शामिल है। यहां महंगे मकान, किराये में बढ़ोतरी और बेघर लोगों की समस्या लंबे समय से चर्चा में रही है।
नित्या रमन ने अपने चुनाव प्रचार में इन मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने किफायती आवास उपलब्ध कराने, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने और शहर की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही।
उनके एजेंडे में बच्चों के लिए पार्क, बेहतर सड़कें, स्ट्रीट लाइट और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही जैसे विषय भी शामिल रहे।
वहीं, करेन बास ने अपने कार्यकाल के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और शहर की व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाया था। जनवरी 2025 में लॉस एंजिल्स क्षेत्र में लगी भीषण आग के बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी।
इस चुनाव में आवास और बेघर लोगों की समस्या मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहे। अंततः मतदाताओं ने नित्या रमन को अगले मेयर के रूप में चुना।
लॉस एंजिल्स के लिए नित्या रमन की क्या हैं प्राथमिकताएं?
जीत के बाद नित्या रमन ने शहर के विकास और लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं पर काम करने की बात कही है। उनका जोर ऐसे आवास बनाने पर है, जिन्हें आम लोग खरीद या किराये पर ले सकें।
इसके अलावा वह सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में काम करना चाहती हैं।
लॉस एंजिल्स में बेघर लोगों की समस्या भी उनके सामने बड़ी चुनौती रहेगी। शहर में हजारों लोग स्थायी आवास के बिना रह रहे हैं। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित आवास और जरूरी सेवाओं की व्यवस्था करना नए प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
नित्या रमन ने अपने संदेश में कामकाजी परिवारों की सुरक्षा और बच्चों के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
निष्कर्ष
केरल के त्रिशूर में जन्मी नित्या रमन ने लॉस एंजिल्स का मेयर चुनाव जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। वह शहर की पहली दक्षिण एशियाई और एशियाई अमेरिकी मेयर बनने जा रही हैं। हार्वर्ड और MIT से शिक्षा प्राप्त करने वाली नित्या ने भारत में सामाजिक कार्यों से शुरुआत की और अमेरिका में स्थानीय राजनीति में अपनी जगह बनाई।
करेन बास को हराकर मिली उनकी जीत लॉस एंजिल्स की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव है। अब शहर के लोगों की नजरें उनके कार्यकाल और आवास, सार्वजनिक परिवहन तथा बेघर लोगों की समस्या से निपटने की योजनाओं पर रहेंगी।

