अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से बीजेपी पर साधा निशाना, आरएसएस प्रमुख से पूछे पांच सवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से जनता की अदालत को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। साथ ही उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पांच सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि जिस तरह पीएम मोदी सीबीआई का डर दिखाकर सरकार गिरा रहे हैं क्या आरएसएस उससे सहमत है।
केजरीवाल के संघ प्रमुख से पांच सवाल
1- जिस तरह मोदी जी ईडी सीबीआई का डर दिखाकर सरकारें गिरा रहे हैं क्या आरएसएस उससे सहमत है?
2- मोदी जी ने सबसे भ्रष्ट नेताओं को बीजेपी में शामिल कराया। क्या आरएसएस मोदी जी से सहमत है?
3- जेपी नड्डा के बयान से आरएसएस दुखी हुआ या नहीं?
4- 75 साल वाला रूल मोदी जी पर लागू होगा या नहीं?
5- बीजेपी आरएसएस की कोख से पैदा हुई है। कहा जाता है कि ये देखना आरएसएस की जिम्मेदारी है कि बीजेपी पथभ्रष्ट न हो। क्या आप आज की बीजेपी के कदमों से सहमत हैं। क्या आपने कभी मोदी जी से ये सब न करने के लिए कहा ?
हमने ईमानदारी से चुनाव लड़ा और जीता– केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से जनता की अदालत को सम्बोधित करते हुए कहा कि 4 अप्रैल 2011 को यहीं जंतर मंतर से अन्ना आंदोलन की शुरुआत हुयी थी। तब की सरकार ने हमें चैलेंज किया कि चुनाव लड़कर दिखाओ और जीतकर दिखाओ। हमने उस चैलेंज को स्वीकार किया और चुनाव लड़ लिए। हमने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी से भी चुनाव लड़ा जा सकता है और जीता जा सकता है। हमने सरकार चलाई। बिजली पानी फ्री कर दिया। बसों में महिलाओं का सफर फ्री कर दिया। इलाज फ्री कर दिया। शानदार अस्पताल और स्कूल बना दिए। ये देखकर मोदी जी घबरा गए और हमारे ऊपर झूठे आरोप लगा दिये और जेल भेज दिया।
आगे अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले का जिक्र करते हुए कहा कि वकीलों ने बताया है कि यह केस दस साल भी चल सकता है। मैं इस दाग के साथ नहीं जी सकता। इसलिए सोचा कि जनता की अदालत में जाऊंगा। अगर मैं बेईमान होता तो बिजली फ्री करने के तीन हजार करोड़ खा जाता, महिलाओं का किराया फ्री नहीं करता, बच्चों के लिए स्कूल नहीं बनवाता। दरअसल, अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से इस केस में जमानत मिली है, इसके बाद उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।
