May 17, 2026

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नीट-यूजी पेपर लीक पर अशोक गहलोत का केंद्र सरकार पर हमला, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि लगातार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं ने देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों को चिंता में डाल दिया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अब उनके पास पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं बचा है।

गहलोत ने कहा कि अगर शिक्षा मंत्री स्वयं इस्तीफा नहीं देते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें पद से हटाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को यह दिखाना होगा कि वह छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर है।

लगातार पेपर लीक से बढ़ी छात्रों की चिंता

अशोक गहलोत ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि 2024, 2025 और 2026 में हुई घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके मुताबिक यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परिवार अपनी आर्थिक स्थिति को नजरअंदाज कर बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, लेकिन जब परीक्षा से पहले पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो छात्रों का मनोबल टूट जाता है। गहलोत ने कहा कि ऐसी घटनाओं से मेहनती और ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय होता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह बार-बार हो रही इन घटनाओं को रोकने में असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि हर बार जांच और कार्रवाई की बातें कही जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं देता। इसी कारण छात्रों और अभिभावकों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।

राहुल गांधी ने भी उठाया था मुद्दा

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की सलाह देता रहा है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सख्त व्यवस्था बनाई जाती तो बार-बार परीक्षाएं रद्द करने की नौबत नहीं आती। गहलोत ने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को केवल राजनीतिक मुद्दा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता

अशोक गहलोत ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का सबसे ज्यादा असर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई छात्र लंबे समय तक तैयारी करते हैं और परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने के बाद निराशा में चले जाते हैं। कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आई हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कानून और तकनीकी व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

गौरतलब है कि नीट-यूजी परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। इसके बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किए। सरकार ने अब दोबारा परीक्षा 21 जून को कराने का फैसला लिया है। हालांकि विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग कर रहा है।

 

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