नई वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ रही दुनिया, ईरान ने कहा- भविष्य अब ग्लोबल साउथ का
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने दुनिया की बदलती राजनीति और वैश्विक ताकतों के संतुलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब एक नई वैश्विक व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है और पश्चिमी देशों का लंबे समय से चला आ रहा प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। गालिबाफ के मुताबिक आने वाला समय “ग्लोबल साउथ” यानी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे विकासशील देशों का होगा।
उन्होंने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में कही। गालिबाफ ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दुनिया में ऐसा बड़ा परिवर्तन हो रहा है, जैसा पिछले सौ वर्षों में नहीं देखा गया। ईरानी नेता ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के दबाव के खिलाफ ईरान के लंबे प्रतिरोध ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है।
ईरान ने अपने प्रतिरोध को बताया बदलाव की वजह
गालिबाफ ने कहा कि ईरानी जनता ने कठिन हालात के बावजूद जिस तरह से संघर्ष किया, उससे दुनिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार पश्चिमी देशों द्वारा आर्थिक प्रतिबंध, सैन्य दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसी नीतियों का असर अब पहले जैसा नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि कई विकासशील देश अब पश्चिमी ताकतों पर निर्भर रहने के बजाय अपने लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने अपने बयान में यह भी कहा कि दुनिया अब एकध्रुवीय व्यवस्था से निकलकर बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। इसका मतलब यह है कि अब केवल अमेरिका जैसी एक ताकत पूरी दुनिया पर प्रभाव नहीं रखेगी, बल्कि कई बड़े देश मिलकर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेंगे।
ईरान के सरकारी मीडिया ने भी इस बयान को नई विश्व व्यवस्था का संकेत बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान का प्रतिरोध अमेरिका के नेतृत्व वाली पुरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर रहा है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि एशिया, अफ्रीका और लैिन अमेरिका के कई देश अब पश्चिमी प्रभुत्व से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक के बाद बढ़ी चर्चा
गालिबाफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में चीन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस मुलाकात में व्यापार, टैरिफ, ताइवान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि पूरी दुनिया चीन और अमेरिका के रिश्तों पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया एक नए मोड़ पर खड़ी है। शी ने यह भी कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चीन और अमेरिका आपसी प्रतिस्पर्धा के बावजूद संघर्ष से बच सकते हैं और संबंधों का नया मॉडल तैयार कर सकते हैं।
इसी संदर्भ में “थ्यूसीडिड्स ट्रैप” शब्द की भी चर्चा हुई। यह अवधारणा हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विद्वान ग्राहम टी. एलिसन ने दी थी। इसका अर्थ ऐसी स्थिति से है, जब कोई उभरती हुई ताकत किसी स्थापित वैश्विक शक्ति को चुनौती देती है और इससे दोनों के बीच टकराव का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और अमेरिका के मौजूदा संबंधों को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
सहयोग को बताया दोनों देशों के लिए जरूरी
शी जिनपिंग ने अपने बयान में यह भी कहा कि चीन और अमेरिका के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन दोनों देशों के साझा हित ज्यादा बड़े हैं। उन्होंने कहा कि एक देश की प्रगति दूसरे देश के लिए खतरा नहीं बल्कि अवसर बन सकती है। चीन के राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा, जबकि टकराव से केवल नुकसान होगा।
दूसरी ओर, ईरान और चीन जैसे देशों के बयानों से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि दुनिया धीरे-धीरे ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां विकासशील देशों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी।

