May 19, 2026

News Critic

Latest News In Hindi

एससीओ की बैठक में भारत-चीन रक्षा मंत्रियों की मुलाकात, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन के बीच चीन के शहर क़िंगदाओ में अहम बैठक हुई। इस मुलाकात के दौरान राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में चीन को यह संदेश दिया कि दोनों देशों को सीमा पर शांति बनाए रखनी चाहिए और किसी भी नए तनाव से बचना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-चीन संबंधों में स्थायित्व और शांति दोनों देशों के हित में हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से होगी शुरू

बैठक के दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भी चर्चा हुई। यह यात्रा पिछले छह वर्षों से बंद थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह पवित्र यात्रा अब फिर से शुरू की जा रही है। यह यात्रा 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण रोक दी गई थी और इसके बाद गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य संघर्ष के चलते भी इसे बहाल नहीं किया जा सका था।

राजनाथ सिंह की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके बावजूद दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की यह मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

चीन के रक्षा मंत्री से हुई रचनात्मक बातचीत

राजनाथ सिंह ने बताया कि उन्होंने चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन से सकारात्मक और आगे की दिशा में बढ़ने वाली बातचीत की। यह बातचीत द्विपक्षीय मसलों पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने इस दौरान आपसी सहयोग और विश्वास बढ़ाने पर जोर दिया।

भारतीय संस्कृति की झलक: मधुबनी पेंटिंग की भेंट

इस मौके पर राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष को बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग भेंट की। यह पेंटिंग भारत की पारंपरिक कला शैली है, जिसे मिथिला चित्रकला भी कहा जाता है। यह चित्रकला अपने बारीक डिजाइनों, चमकदार रंगों और सांस्कृतिक प्रतीकों के लिए जानी जाती है। यह भेंट भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।

एससीओ दस्तावेज पर हस्ताक्षर से इंकार

एससीओ बैठक के दौरान जब एक साझा घोषणापत्र पर सभी देशों के रक्षा मंत्रियों के हस्ताक्षर किए जा रहे थे, तब भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, भारत का मानना था कि दस्तावेज़ में आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे को कमजोर रूप में पेश किया गया, जिससे भारत की आतंकवाद के खिलाफ कड़ी नीति को नुकसान पहुंच सकता था।

आतंकवाद पर कड़ा संदेश

एससीओ बैठक में अपने भाषण के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं और उसे अपनी विदेश नीति का हिस्सा बनाते हैं, उन्हें इसके नतीजे भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश आतंकियों को शरण देते हैं और उन्हें सीमा पार हमलों के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह दोहरा रवैया अब स्वीकार्य नहीं है।

रक्षा मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि शंघाई सहयोग संगठन को ऐसे देशों की आलोचना करने से पीछे नहीं हटना चाहिए और आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

भारत और चीन के बीच रक्षा मंत्रियों की यह बातचीत जहां एक ओर द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद जगाती है, वहीं दूसरी ओर आतंकवाद जैसे वैश्विक खतरे को लेकर भारत के सख्त रुख को भी दर्शाती है। कैलाश मानसरोवर यात्रा का दोबारा शुरू होना न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *