कोलकाता गैंगरेप मामला: जेडीयू ने टीएमसी से की स्पीडी ट्रायल और कड़ी कार्रवाई की मांग
कोलकाता में एलएलबी की छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले पर बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 30 जून 2025 को जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि किसी अभियुक्त का केवल गिरफ्तारी हो जाना ही पर्याप्त नहीं है, खासकर जब उसका संबंध किसी राजनीतिक पार्टी से हो।
नीरज कुमार ने कहा कि सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना काफी नहीं है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अपील की कि वह इस गंभीर अपराध में शामिल आरोपियों के खिलाफ समयबद्ध चार्जशीट दाखिल करे और स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि जब न्यायपालिका आरोपियों को सजा देती है, तब ही लोगों का न्याय प्रणाली पर विश्वास मजबूत होता है और पीड़िता को न्याय की उम्मीद मिलती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “आप एक महिला मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में इस गंभीर सामाजिक अपराध को राजनीतिक एजेंडे में मत घसीटिए। इस तरह के जघन्य अपराध में शामिल कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी राजनीतिक दल, जाति या धर्म से जुड़ा हो, उसके खिलाफ सख्त और पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए। और यह कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखनी भी चाहिए।”
क्या है मामला?
यह मामला 25 जून को सामने आया था, जब कोलकाता के साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज की प्रथम वर्ष की एक छात्रा ने आरोप लगाया कि कॉलेज के दो सीनियर छात्रों और एक पूर्व छात्र ने उसके साथ गैंगरेप किया। जैसे ही यह घटना सार्वजनिक हुई, राज्य की सत्तारूढ़ टीएमसी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई। विपक्षी दलों ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां इस घटना की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की गई है। पीड़िता को न्याय दिलाने और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कोर्ट की निगरानी में जांच की याचिका दायर की गई है। राज्य सरकार ने इस केस की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया है और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
बीजेपी ने भेजी तथ्यान्वेषी टीम
इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी सक्रियता दिखाई है। पार्टी ने एक चार सदस्यीय तथ्यान्वेषी टीम का गठन किया है, जो 30 जून की सुबह कोलकाता पहुंची। इस टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह, सांसद मीनाक्षी लेखी, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देब और अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा शामिल हैं। यह टीम पीड़िता से मिलने और मामले की वस्तुस्थिति जानने के लिए बनाई गई है।
यह मामला सिर्फ एक अपराध की घटना नहीं है, बल्कि यह देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर उठते सवालों की एक कड़ी है। राजनीतिक दलों से लेकर आम जनता तक, सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोषियों को समय पर सजा मिलेगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह कानूनी प्रक्रिया में उलझकर रह जाएगा। जेडीयू, बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों की ओर से उठ रही मांगों का एक ही मकसद है – पीड़िता को न्याय और दोषियों को कड़ी सजा। अब देखना यह है कि ममता सरकार इस मामले में कितना पारदर्शी और निष्पक्ष रवैया अपनाती है।
