April 16, 2026

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महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम, लोकसभा में पीएम मोदी का संबोधन

संसद का तीन दिन का विशेष सत्र शुरू हो चुका है और इसके पहले ही दिन केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए। इन विधेयकों का उद्देश्य महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। यह कानून वर्ष 2023 में पारित किया गया था, जिसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के नाम से भी जाना जाता है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन संशोधन प्रस्तावों को सदन में प्रस्तुत किया, जिनमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसी विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए कई अहम बातें रखीं।

महिला भागीदारी पर जोर और राजनीतिक संदेश

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर है और सभी सांसदों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस चर्चा से जो निष्कर्ष निकलेंगे, वे देश के भविष्य की दिशा तय करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत 21वीं सदी में एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर भी देश की स्थिति मजबूत हुई है।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी यानी महिलाओं को नीति निर्धारण में बराबर की भागीदारी मिलनी चाहिए। यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि समय की मांग है। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में जब-जब महिला आरक्षण का विरोध हुआ, तब महिलाओं ने चुनाव में उसका जवाब दिया।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अब इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने में किसी को परेशानी नहीं होती थी, क्योंकि वहां व्यक्तिगत राजनीतिक नुकसान का खतरा कम था। लेकिन अब जब बात बड़े स्तर पर भागीदारी की हो रही है, तो कुछ लोग असहज हो रहे हैं।

महिलाओं की बदलती भूमिका और सामाजिक संदेश

पीएम मोदी ने अपने भाषण में समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं अपनी बात खुलकर नहीं रख पाती थीं, लेकिन अब वे अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। महिलाएं अब सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी शामिल होना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में लाखों महिलाएं जमीनी स्तर पर नेतृत्व की भूमिका में आई हैं, जिससे समाज में बड़ा बदलाव आया है। यह बदलाव अब राजनीति में भी दिखना चाहिए। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि अगर वे राजनीतिक रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें इस परिवर्तन को स्वीकार करना होगा।

प्रधानमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि जो लोग आज इस पहल का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि वे एक अति पिछड़े वर्ग से आते हैं, लेकिन संविधान ने उन्हें सभी को साथ लेकर चलने की प्रेरणा दी है।

आगे की योजना और राजनीतिक संतुलन

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2023 में जब इस कानून पर चर्चा हुई थी, तब इसे जल्द लागू करने की मांग उठी थी, लेकिन 2024 तक इसे लागू करना संभव नहीं था। अब 2029 तक इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए जरूरी प्रक्रियाएं शुरू की जा रही हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर उन पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन उनका कहना है कि अगर कोई इसका विरोध करता है, तो स्वाभाविक रूप से उन्हें राजनीतिक फायदा हो सकता है। वहीं, अगर सभी मिलकर इसका समर्थन करते हैं, तो किसी को नुकसान नहीं होगा।

अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने हल्के अंदाज में कहा कि उन्हें इस कानून का श्रेय लेने की कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो वे सभी दलों को धन्यवाद देने के लिए तैयार हैं और सभी को इसका श्रेय लेने का अवसर दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, सरकार इस विशेष सत्र के जरिए महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहती है। प्रधानमंत्री का संबोधन इस बात का संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे को केवल कानून तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे सामाजिक बदलाव के रूप में देख रही है।

 

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