2029 तक महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी, लोकसभा सीटें बढ़ाने के लिए तीन अहम बिल पेश होंगे
केंद्र सरकार ने संसद के विशेष सत्र में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की सूची जारी की गई है। इन विधेयकों का उद्देश्य वर्ष 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करना और लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है। इन प्रस्तावों को लेकर सियासी माहौल भी काफी गर्म हो गया है, क्योंकि विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है।
तीन प्रमुख विधेयक लोकसभा में होंगे पेश
सरकार जिन तीन विधेयकों को पेश करने जा रही है, उनमें ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ शामिल हैं। पहले दो विधेयक केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किए जाएंगे, जबकि तीसरा विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में रखेंगे।
लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इन विधेयकों पर चर्चा के लिए कुल 18 घंटे का समय तय किया है। यह बहस एक दिन में पूरी नहीं हो पाएगी, इसलिए संभावना है कि यह शुक्रवार तक जारी रहे। लोकसभा में पारित होने के बाद इन विधेयकों को राज्यसभा में भेजा जाएगा, जहां आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।
विपक्ष ने जताई आपत्ति, परिसीमन पर उठाए सवाल
विधेयकों के पेश होने से पहले ही विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर कई विपक्षी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का विरोध करने का निर्णय लिया गया।
विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण को मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही 2029 से लागू किया जाना चाहिए, न कि सीटों की संख्या बढ़ाकर। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह कदम महिला आरक्षण से ज्यादा चुनावी क्षेत्रों के पुनर्गठन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल कर रही है, जबकि देश में फिलहाल जाति-आधारित जनगणना चल रही है। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे जनता को गुमराह किया जा रहा है।
सरकार का पक्ष: लोकतंत्र को मिलेगा मजबूती
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा है कि यदि 2029 के आम चुनाव महिला आरक्षण के पूरी तरह लागू होने के साथ कराए जाते हैं, तो इससे भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उनका मानना है कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और शासन व्यवस्था अधिक समावेशी बनेगी।
सरकार का तर्क है कि परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने से जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व बेहतर होगा। साथ ही, महिला आरक्षण लागू करने के लिए यह एक आवश्यक कदम है।
कुल मिलाकर, यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति का केंद्र बना रहेगा। जहां सरकार इसे लोकतांत्रिक सुधार के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रहा है। अब सभी की नजरें संसद में होने वाली बहस और उसके परिणाम पर टिकी हैं।
