आप के 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल, राघव चड्ढा ने बताई पार्टी छोड़ने की वजह
सोमवार, 27 अप्रैल को आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों ने आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इन नेताओं में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल हैं। इन सांसदों के बीजेपी में आने से राज्यसभा में पार्टी की स्थिति और मजबूत हो गई है। अब राज्यसभा में एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 148 तक पहुंच गया है।
इस बदलाव के बाद आम आदमी पार्टी के पास अब केवल तीन राज्यसभा सांसद ही बचे हैं। राज्यसभा सचिवालय ने भी इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्यसभा के सभापति ने इन सांसदों के बीजेपी में शामिल होने को मंजूरी दे दी है और अब ये सभी बीजेपी संसदीय दल का हिस्सा हैं।
आप की नाराजगी, सांसदों को बर्खास्त करने की मांग
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इस घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी ने राज्यसभा के सभापति से मांग की थी कि पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने वाले इन सभी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाए। आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में इस मुद्दे को उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों के दबाव के जरिए नेताओं को पार्टी बदलने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब कोई नेता एक पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद में पहुंचता है और बाद में दूसरी पार्टी में चला जाता है, तो यह लोकतंत्र के साथ विश्वासघात है। संजय सिंह ने इसे जनता और संविधान दोनों के खिलाफ बताया और कहा कि इस तरह की राजनीति देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करती है।
राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर दी सफाई
बीजेपी में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने फैसले के पीछे की वजह बताई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लोगों के कई संदेश मिल रहे थे—कुछ लोग उन्हें बधाई दे रहे थे, जबकि कुछ उनके फैसले को लेकर सवाल कर रहे थे।
चड्ढा ने बताया कि उन्होंने राजनीति में कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए कदम नहीं रखा। वे आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे और उन्होंने अपने जीवन के लगभग 15 साल पार्टी को दिए। लेकिन उनके अनुसार अब पार्टी पहले जैसी नहीं रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर का माहौल खराब हो चुका है। उनके मुताबिक, पार्टी में काम करने की आजादी नहीं है और संसद में अपनी बात रखने में भी बाधाएं आती हैं। उन्होंने कहा कि अब पार्टी कुछ ऐसे लोगों के नियंत्रण में आ गई है जो समझौता करने वाले और भ्रष्ट हैं।
राघव चड्ढा के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां बीजेपी इस बदलाव को अपनी मजबूती के रूप में देख रही है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक दबाव और लोकतंत्र के खिलाफ कदम बता रही है। आने वाले समय में इसका असर संसद और राजनीति दोनों में देखने को मिल सकता है।
