2026 में सुपर एल नीनो का खतरा: बढ़ सकती है गर्मी, कमजोर पड़ सकता है मानसून
वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक गंभीर चेतावनी जारी की है कि भारत को इस साल “सुपर एल नीनो” जैसी शक्तिशाली जलवायु घटना का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर देश के मौसम पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। खासकर अत्यधिक गर्मी, कमज़ोर मानसून और सूखे जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इससे पहले भी जब ऐसी स्थिति बनी थी, तब देश को बड़े स्तर पर नुकसान झेलना पड़ा था। इसलिए इस बार भी चिंता बढ़ती जा रही है।
क्या होता है सुपर एल नीनो?
सुपर एल नीनो, एल नीनो का ही एक बहुत अधिक ताकतवर रूप होता है। एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन जब यह तापमान बहुत अधिक, यानी 2 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे “सुपर एल नीनो” कहा जाता है।
इस बढ़े हुए तापमान का असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है। इससे कई जगहों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सूखा और भीषण गर्मी देखने को मिलती है। भारत जैसे देशों में इसका असर खासतौर पर मानसून पर पड़ता है, जो खेती और जल संसाधनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
पहले कब पड़ा इसका असर?
भारत ने पिछली बार 2015-16 में एक शक्तिशाली सुपर एल नीनो का सामना किया था। उस समय मानसून कमजोर रहा था और सामान्य से कम बारिश हुई थी। इसका सीधा असर खेती पर पड़ा था, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। कई राज्यों में पानी की कमी हो गई थी और तापमान भी काफी बढ़ गया था।
इससे पहले 1997-98 में भी एक मजबूत एल नीनो देखा गया था, जिसने दुनियाभर के मौसम को प्रभावित किया था। वहीं, 1877-78 का सुपर एल नीनो तो बेहद विनाशकारी साबित हुआ था। उस समय भारत में भयंकर अकाल पड़ा था, जिसमें लाखों लोगों की जान चली गई थी। यह घटना इतिहास की सबसे बड़ी जलवायु आपदाओं में गिनी जाती है।
2026 में क्या हो सकता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, मई से जुलाई के बीच एल नीनो जैसी स्थितियां बनने की संभावना 61% से 80% तक है। अगर यह स्थिति और मजबूत होती है, तो यह सुपर एल नीनो का रूप ले सकती है। ऐसे में इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और कुल बारिश लगभग 92% तक सीमित हो सकती है।
देखने में यह कमी ज्यादा नहीं लगती, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा हो सकता है। कम बारिश का मतलब है कि खेती के लिए पानी कम मिलेगा, जलाशय जल्दी सूख सकते हैं और पीने के पानी की भी समस्या बढ़ सकती है।
यह क्यों है खतरनाक?
सुपर एल नीनो का सबसे बड़ा खतरा इसका “चेन रिएक्शन” है। यानी यह सिर्फ तापमान नहीं बढ़ाता, बल्कि कई समस्याओं को एक साथ जन्म देता है। गर्मी बढ़ने से पानी की मांग बढ़ती है, लेकिन बारिश कम होने से पानी की उपलब्धता घट जाती है। इससे खेती प्रभावित होती है, खाद्य उत्पादन कम होता है और महंगाई बढ़ सकती है।
इसके अलावा, जल संकट, बिजली की मांग में वृद्धि और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए, तो सूखा और अकाल जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते तैयारी करना बहुत जरूरी है, ताकि इसके प्रभाव को कम किया जा सके और लोगों को ज्यादा नुकसान न झेलना पड़े।
